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अलगाववादियों तथा नक्सलियों के बीच गठजोड़ की कड़ी था मसरत
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श्रीनगर। कश्मीर में वर्ष 2010 में विरोध-प्रदर्शन के दौरान पोस्टर ब्वॉय के रूप में पहचाना जाने वाला मसरत आलम आतंकी संगठनों को वित्त पोषण करने के आरोप में जेल में बंद है। एनआईए ने अक्तूबर 2019 में मसरत के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था और वह वर्तमान में तिहाड़ जेल में बंद है। मसरत ने अलगाववादियों तथा नक्सलियों के बीच गठजोड़ में भूमिका निभाई थी।
मसरत वर्ष 2010 में घाटी में विरोध का नेतृत्व करने वाले के रूप में उभरा था। चार महीने की तलाशी के बाद उसे श्रीनगर शहर के बाहरी इलाके से गिरफ्तार किया गया था। उसके बारे में जानकारी देने के लिए 10 लाख रुपये के पुरस्कार की घोषणा की गई थी। 2010 में प्रदर्शन के दौरान आंसू गैस के गोले से एक युवक की मौत के बाद भड़की हिंसा के दौरान विरोध कैलेंडर जारी कर मसरत आंदोलन का एक प्रमुख चेहरा बन गया था। उसने प्रतिबंधित नक्सली समूहों को कश्मीरी अलगाववादियों से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस कड़ी का संकेत 2010 के दौरान आया जब कई महीनों तक चले आंदोलन में 112 लोगों की जान लेने वाली पथराव की घटनाओं के मास्टरमाइंड मसरत ने अलगाववादियों द्वारा हड़ताल की योजना के बारे में एक पम्फलेट प्रसारित किया। यह पम्फलेट एक ओवरग्राउंड नक्सली कार्यकर्ता द्वारा तैयार किया गया था और कई जगहों पर चस्पा पम्फलेट की भाषा भी वही थी। विस्तृत जांच से पता चला था कि नक्सल नेता किशनजी और मसरत द्वारा प्रसारित पम्फलेट में इस्तेमाल किए गए फ ॉन्ट एक जैसे थे और यहां तक कि प्रिंटर भी एक थे। 50 वर्षीय विज्ञान स्नातक को गिलानी के उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता था।
आरोपपत्र में एनआईए ने कहा था कि गिरफ्तारी के तुरंत बाद मुस्लिम लीग के अध्यक्ष मसरत आलम ने खुलासा किया था कि पाकिस्तान स्थित एजेंटों ने हवाला ऑपरेटरों के माध्यम से धन भेजा और यह सैयद अली शाह गिलानी सहित अन्य अलगाववादियों को हस्तांतरित किए गए। फं ड को लेकर हुर्रियत में मतभेद भी थे।
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ज्ञात हो कि एनआईए ने अलगाववादी और आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने, घाटी में अशांति फैलाने और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रचने के लिए कथित रूप से धन जुटाने और प्राप्त करने के लिए जमात-उद-दावा, दुख्तरान-ए-मिल्लत, लश्कर-ए-ताइबा, हिजबुल मुजाहिदीन के अलावा जम्मू-कश्मीर के अन्य अलगाववादी समूहों और नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
रिहाई पर गठबंधन सरकार में हो गया था टकराव
वर्ष 2015 में प्रदेश में पीडीपी-भाजपा सरकार गठन के तुरंत बाद मसरत की रिहाई के कारण गठबंधन सरकार के बीच टकराव पैदा गया था। भाजपा के तेवर दिखाने के तुरंत बाद रिहाई के एक दिन के भीतर उसे सलाखों के पीछे डाल दिया गया था। तब से वह जेल में ही है। उस समय पीडीपी के मुफ्ती मोहम्मद सईद मुख्यमंत्री थे।
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मसरत वर्ष 2010 में घाटी में विरोध का नेतृत्व करने वाले के रूप में उभरा था। चार महीने की तलाशी के बाद उसे श्रीनगर शहर के बाहरी इलाके से गिरफ्तार किया गया था। उसके बारे में जानकारी देने के लिए 10 लाख रुपये के पुरस्कार की घोषणा की गई थी। 2010 में प्रदर्शन के दौरान आंसू गैस के गोले से एक युवक की मौत के बाद भड़की हिंसा के दौरान विरोध कैलेंडर जारी कर मसरत आंदोलन का एक प्रमुख चेहरा बन गया था। उसने प्रतिबंधित नक्सली समूहों को कश्मीरी अलगाववादियों से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस कड़ी का संकेत 2010 के दौरान आया जब कई महीनों तक चले आंदोलन में 112 लोगों की जान लेने वाली पथराव की घटनाओं के मास्टरमाइंड मसरत ने अलगाववादियों द्वारा हड़ताल की योजना के बारे में एक पम्फलेट प्रसारित किया। यह पम्फलेट एक ओवरग्राउंड नक्सली कार्यकर्ता द्वारा तैयार किया गया था और कई जगहों पर चस्पा पम्फलेट की भाषा भी वही थी। विस्तृत जांच से पता चला था कि नक्सल नेता किशनजी और मसरत द्वारा प्रसारित पम्फलेट में इस्तेमाल किए गए फ ॉन्ट एक जैसे थे और यहां तक कि प्रिंटर भी एक थे। 50 वर्षीय विज्ञान स्नातक को गिलानी के उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता था।
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आरोपपत्र में एनआईए ने कहा था कि गिरफ्तारी के तुरंत बाद मुस्लिम लीग के अध्यक्ष मसरत आलम ने खुलासा किया था कि पाकिस्तान स्थित एजेंटों ने हवाला ऑपरेटरों के माध्यम से धन भेजा और यह सैयद अली शाह गिलानी सहित अन्य अलगाववादियों को हस्तांतरित किए गए। फं ड को लेकर हुर्रियत में मतभेद भी थे।
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ज्ञात हो कि एनआईए ने अलगाववादी और आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने, घाटी में अशांति फैलाने और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रचने के लिए कथित रूप से धन जुटाने और प्राप्त करने के लिए जमात-उद-दावा, दुख्तरान-ए-मिल्लत, लश्कर-ए-ताइबा, हिजबुल मुजाहिदीन के अलावा जम्मू-कश्मीर के अन्य अलगाववादी समूहों और नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
रिहाई पर गठबंधन सरकार में हो गया था टकराव
वर्ष 2015 में प्रदेश में पीडीपी-भाजपा सरकार गठन के तुरंत बाद मसरत की रिहाई के कारण गठबंधन सरकार के बीच टकराव पैदा गया था। भाजपा के तेवर दिखाने के तुरंत बाद रिहाई के एक दिन के भीतर उसे सलाखों के पीछे डाल दिया गया था। तब से वह जेल में ही है। उस समय पीडीपी के मुफ्ती मोहम्मद सईद मुख्यमंत्री थे।