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दस लाख की हेराफेरी में नाजिर की अग्रिम जमानता याचिका खारिज

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श्रीनगर। पीठासीन अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर कर दस लाख से अधिक रुपये की अधिक की अवैध निकासी के मामले में एक स्थानीय अदालत ने आरोपी नाजिर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
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श्रीनगर के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मसरत रूही ने कहा, नाजिर ने अपने अधिकारियों के साथ विश्वासघात करते हुए अपने ही पीठासीन अधिकारी को धोखा दिया। आरोपों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए, विशेष रूप से धोखाधड़ी के सबूतों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका के चलते यह पाया गया कि वह अग्रिम जमानत के हकदार नहीं हैं। मेरी राय है कि (उसे) उसके खिलाफ कथित अपराधों की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए पूर्व-गिरफ्तारी जमानत रियायत नहीं दी जा सकती।
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आरोपी राशिद ने 19 दिसंबर 2018 से 1 मई 2019 के अपने कार्यकाल के दौरान सब रजिस्ट्रार श्रीनगर की अदालत में नाजिर के रूप में 1024730 रुपये की निकासी अपने पीठासीन अधिकारी मीर सईम कयूम के फर्जी हस्ताक्षर कर अदालत के आधिकारिक खाते से निकाल ली। उसके खिलाफ बटमालू पुलिस स्टेशन बटामालू मामला दर्ज किया गया था।
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पुलवामा के युवक पर पीएसए
की कार्रवाई रद्द, तुरंत रिहा करें
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर व लद्दाख उच्च न्यायालय ने युवाओं के खिलाफ सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत नजरबंदी के आदेश को रद्द करते हुए उन्हें तुरंत हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया है।
पुलवामा के अरिहाल निवासी आदिल यासीन मीर ने अपने पिता मोहम्मद यासीन मीर के माध्यम से एक याचिका दाखिल कर 7 जुलाई 2020 को जिला मजिस्ट्रेट पुलवामा के पीएसए लगाने के आदेश को रद्द करने की मांग की थी। कहा था कि उसे जो कारण बताए गए वह पीएसए की कार्रवाई के लिए उपयुक्त नहीं हैं।

न्यायमूर्ति अली मोहम्मद माग्रे की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति को अधिकार है कि वह अपने खिलाफ की गई कार्रवाई के आधार संबंधी कागजातों को हासिल करे। कोर्ट ने कहा कि बंदी को इस तरह के कागजात दिये नहीं जाते हैं इसे वह अपना पक्ष प्रभावी तरीके से नहीं रख पाता और उसका अधिकार प्रभावित होता है। ऐसे अनेक उदाहरण हमारे अपने हाईकोर्ट समेत विभिन्न हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में मौजूद हैं। इसके साथ ही उन्होंने यासिर को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।
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