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जम्मू-कश्मीर: कोर्ट ने दो पाकिस्तानी आतंकियों को सुनाया 40 साल का कठोर कारावास
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Sat, 01 Dec 2018 08:17 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : PTI
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प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश जम्मू विनोद चटर्जी कौल ने पाकिस्तान के दो लश्कर आतंकियों जमील अहमद और अब्दुल मजीद उर्फ अबु तला को चालीस साल कठोर कारावास और 95 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। दोनों आतंकियों को राजोरी जिले से 2007 में पकड़ा गया था। कोर्ट ने कहा सभी सजाएं एक साथ भुगतनी होगी।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने पब्लिक प्रोसेक्यूटर (पीपी) राकेश बडयाल की दलील के मुताबिक दोनों आतंकी भारत की धरती पर बिना अनुमति के आए। देश में आतंकी वारदात को अंजाम देने के लिए उन्होंने पाकिस्तान के विभिन्न ट्रेनिंग कैंपों में हथियारों का प्रशिक्षण लिया। आतंकी वारदातों को अंजाम देने की मंशा को पीपी साबित कर चुके हैं। कोर्ट दोनों के प्रति कोई रियायत नहीं दे सकती है।
आतंकियों को 14 फारेन एक्ट में आठ साल कैद और पचास हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना नहीं दिए जाने पर दोनों को छह महीने अतिरिक्त कैद में रहना होगा। 3/6 पीपी एक्ट में पांच साल कैद और 20 हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना जमा नहीं कराने पर चार महीने और कैद, आरपीसी की धारा 419 में तीन साल कैद और 10 हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना नहीं देने पर दो महीने की अतिरिक्त कैद, आरपीसी की धारा 467 में दस साल कैद और पांच हजार जुर्माना, जुर्माना नहीं देने पर एक महीने की अतिरिक्त कैद, आरपीसी की धारा 468 में सात साल कैद और पांच हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना नहीं देने पर एक महीने की अतिरिक्त कैद काटनी होगी। आरपीसी की धारा 471 में सात साल कैद और पांच हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना की रकम जमा नहीं कराने पर एक महीने की अतिरिक्त कैद काटनी होगी।
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प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने पब्लिक प्रोसेक्यूटर (पीपी) राकेश बडयाल की दलील के मुताबिक दोनों आतंकी भारत की धरती पर बिना अनुमति के आए। देश में आतंकी वारदात को अंजाम देने के लिए उन्होंने पाकिस्तान के विभिन्न ट्रेनिंग कैंपों में हथियारों का प्रशिक्षण लिया। आतंकी वारदातों को अंजाम देने की मंशा को पीपी साबित कर चुके हैं। कोर्ट दोनों के प्रति कोई रियायत नहीं दे सकती है।
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आतंकियों को 14 फारेन एक्ट में आठ साल कैद और पचास हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना नहीं दिए जाने पर दोनों को छह महीने अतिरिक्त कैद में रहना होगा। 3/6 पीपी एक्ट में पांच साल कैद और 20 हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना जमा नहीं कराने पर चार महीने और कैद, आरपीसी की धारा 419 में तीन साल कैद और 10 हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना नहीं देने पर दो महीने की अतिरिक्त कैद, आरपीसी की धारा 467 में दस साल कैद और पांच हजार जुर्माना, जुर्माना नहीं देने पर एक महीने की अतिरिक्त कैद, आरपीसी की धारा 468 में सात साल कैद और पांच हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना नहीं देने पर एक महीने की अतिरिक्त कैद काटनी होगी। आरपीसी की धारा 471 में सात साल कैद और पांच हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना की रकम जमा नहीं कराने पर एक महीने की अतिरिक्त कैद काटनी होगी।
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क्या था मामला
ज्वाइंट इंटेरोगेशन केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, अब्दुल मजीद और जमील अहमद लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी हैं। सीमा पार से लश्कर के दोनों आतंकी
जमील अहमद उर्फ अबू चरगाम पुत्र मोहम्मद सादिक निवासी बंदा काजी, अलामा इकबाल टाउन, अबटाबाद सूबा सरहद पाकिस्तान और अब्दुल मजीद उर्फ अबु तला पुत्र मोहम्मद अहमद निवासी गोठ तहसील शब्दपुर जिला नवाबशाह सिंध पाकिस्तान, सीमा पार से प्रशिक्षण लेकर साथी आतंकियों के साथ कराची से समुद्र के रास्ते मुंबई पहुंचे थे।
मुंबई में दोनों को समीर और तारिक नाम के व्यक्तियों ने फर्जी पहचान पत्र मुहैया कराए। मजीद कोे चमन लाल और जमील को धीरज के नाम से पहचान पत्र दिए। स्थानीय गाइड राजेंद्र और राकेश ने दोनों को चंडीगढ़ तक पहुुंचाया। चंडीगढ़ से स्थानीय गाइड मोहम्मद ताज और फिरोजदीन ने दोनों को राजोरी के मेंढर में पहुंचाया। दोनों आतंकी 10 मार्च 2007 को पुलिस ने दोनों गाइड समेत आतंकियों को दबोच लिया।
थन्नामंडी से दोनों के बने फर्जी वोटर कार्ड
जांच में यह भी पाया मोहम्मद ताज, फिरोज मोहम्मद, मो. यासीन, मो. शफीक, अल्ताफ हुसैन और मो. अकरम ने जमील अहमद और अब्दुल मजीद के फोटोग्राफ लिए और मोहम्मद खान और महबूब अहमद के नाम से फर्जी वोटर आईकार्ड बनाए। थन्नामंडी कार्यालय से दोनों के वोटर आईकार्ड तैयार हुए।
जमील अहमद उर्फ अबू चरगाम पुत्र मोहम्मद सादिक निवासी बंदा काजी, अलामा इकबाल टाउन, अबटाबाद सूबा सरहद पाकिस्तान और अब्दुल मजीद उर्फ अबु तला पुत्र मोहम्मद अहमद निवासी गोठ तहसील शब्दपुर जिला नवाबशाह सिंध पाकिस्तान, सीमा पार से प्रशिक्षण लेकर साथी आतंकियों के साथ कराची से समुद्र के रास्ते मुंबई पहुंचे थे।
मुंबई में दोनों को समीर और तारिक नाम के व्यक्तियों ने फर्जी पहचान पत्र मुहैया कराए। मजीद कोे चमन लाल और जमील को धीरज के नाम से पहचान पत्र दिए। स्थानीय गाइड राजेंद्र और राकेश ने दोनों को चंडीगढ़ तक पहुुंचाया। चंडीगढ़ से स्थानीय गाइड मोहम्मद ताज और फिरोजदीन ने दोनों को राजोरी के मेंढर में पहुंचाया। दोनों आतंकी 10 मार्च 2007 को पुलिस ने दोनों गाइड समेत आतंकियों को दबोच लिया।
थन्नामंडी से दोनों के बने फर्जी वोटर कार्ड
जांच में यह भी पाया मोहम्मद ताज, फिरोज मोहम्मद, मो. यासीन, मो. शफीक, अल्ताफ हुसैन और मो. अकरम ने जमील अहमद और अब्दुल मजीद के फोटोग्राफ लिए और मोहम्मद खान और महबूब अहमद के नाम से फर्जी वोटर आईकार्ड बनाए। थन्नामंडी कार्यालय से दोनों के वोटर आईकार्ड तैयार हुए।