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Jammu News: हेरोइन बरामदगी के मामले में आरोपी की जमानत अर्जी खारिज
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने 255.39 ग्राम हेरोइन बरामदगी के मामले में आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। यह याचिका राजू कुमार निवासी बिहार की ओर से दायर की गई थी। प्रकरण में पुलिस थाना विजयपुर के माध्यम से दर्ज केस में सह-आरोपी सुकेश कुमार और किशोर ऋषिदेव के कब्जे से 255.39 ग्राम हेरोइन बरामद की गई थी। जांच के दौरान दोनों आरोपियों ने खुलासा किया कि यह नशीला पदार्थ राजू कुमार और धर्मनाथ ऋषिदेव से लिया गया था।
जांच एजेंसी के अनुसार अशोक कुमार के खेत से धान की कटाई के दौरान राजू कुमार और धर्मनाथ ऋषिदेव को यह हेरोइन का पैकेट मिला था जो बाद में सह आरोपियों तक पहुंचा। पुलिस ने मौके का साइट प्लान भी तैयार किया जिससे बरामदगी की कड़ी को जोड़ा गया। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के चर्चित फैसले का हवाला दिया। हालांकि अदालत ने कहा कि मौजूदा मामले के तथ्य उस फैसले से भिन्न हैं क्योंकि यहां खुलासे के साथ मौके की पुष्टि और अन्य साक्ष्य भी मौजूद हैं। इसलिए उक्त निर्णय का लाभ आरोपी को नहीं दिया जा सकता। अदालत ने आदेश में उल्लेख किया कि आरोपी के खिलाफ आरोप तय हो चुके हैं और मामला 29 सितंबर 2025 से विचाराधीन है। अदालत ने कहा कि व्यावसायिक मात्रा की बरामदगी और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए जमानत देने का सामान्य सिद्धांत इस मामले में लागू नहीं होता।
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सांबा। अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने 255.39 ग्राम हेरोइन बरामदगी के मामले में आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। यह याचिका राजू कुमार निवासी बिहार की ओर से दायर की गई थी। प्रकरण में पुलिस थाना विजयपुर के माध्यम से दर्ज केस में सह-आरोपी सुकेश कुमार और किशोर ऋषिदेव के कब्जे से 255.39 ग्राम हेरोइन बरामद की गई थी। जांच के दौरान दोनों आरोपियों ने खुलासा किया कि यह नशीला पदार्थ राजू कुमार और धर्मनाथ ऋषिदेव से लिया गया था।
जांच एजेंसी के अनुसार अशोक कुमार के खेत से धान की कटाई के दौरान राजू कुमार और धर्मनाथ ऋषिदेव को यह हेरोइन का पैकेट मिला था जो बाद में सह आरोपियों तक पहुंचा। पुलिस ने मौके का साइट प्लान भी तैयार किया जिससे बरामदगी की कड़ी को जोड़ा गया। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के चर्चित फैसले का हवाला दिया। हालांकि अदालत ने कहा कि मौजूदा मामले के तथ्य उस फैसले से भिन्न हैं क्योंकि यहां खुलासे के साथ मौके की पुष्टि और अन्य साक्ष्य भी मौजूद हैं। इसलिए उक्त निर्णय का लाभ आरोपी को नहीं दिया जा सकता। अदालत ने आदेश में उल्लेख किया कि आरोपी के खिलाफ आरोप तय हो चुके हैं और मामला 29 सितंबर 2025 से विचाराधीन है। अदालत ने कहा कि व्यावसायिक मात्रा की बरामदगी और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए जमानत देने का सामान्य सिद्धांत इस मामले में लागू नहीं होता।
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