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पटयारी भूमि विवाद : सीमांकन के लिए तहसीलदार को आदेश
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गांव में 135 कनाल 8 मरला भूमि पर अतिक्रमण का है आरोप, कोर्ट ने दिए जांच के लिए कहा
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। पटयारी गांव में भूमि विवाद में अतिरिक्त मुंसिफ सांबा की अदालत ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। अदालत ने भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए स्थानीय आयुक्त (तहसीलदार) नियुक्त करने की अनुमति दी है।
मामला सूरम चंद व अन्य बनाम चिनार सिंह से जुड़ा है। इसमें वादी पक्ष ने आरोप लगाया है कि प्रतिवादी की ओर से 135 कनाल 8 मरला भूमि पर अतिक्रमण कर निर्माण कार्य किया जा रहा है। वादी पक्ष ने भूमि के सीमांकन, पहचान और माप के लिए आयुक्त नियुक्त करने की मांग की थी। अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। प्रतिवादी पक्ष ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उसने वादी की भूमि पर कोई अतिक्रमण नहीं किया है बल्कि वादी ही अन्य भूमि में हस्तक्षेप कर रहा है। यह भी कहा गया कि निर्माण कार्य के आरोप झूठे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने माना कि तहसीलदार की नियुक्ति से किसी भी पक्ष को नुकसान नहीं होगा बल्कि मौके पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अदालत ने क्षेत्र के तहसीलदार को निर्देश दिए कि दोनों पक्षों को नोटिस देकर स्थल निरीक्षण करें और यह जांचें कि क्या वास्तव में अतिक्रमण या निर्माण कार्य हुआ है। तहसीलदार को निर्देश दिए गए हैं कि वे निरीक्षण के बाद विस्तृत रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले अदालत में प्रस्तुत करें। इसके लिए पक्षकारों से आवश्यक दस्तावेज भी प्राप्त किए जा सकेंगे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। पटयारी गांव में भूमि विवाद में अतिरिक्त मुंसिफ सांबा की अदालत ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। अदालत ने भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए स्थानीय आयुक्त (तहसीलदार) नियुक्त करने की अनुमति दी है।
मामला सूरम चंद व अन्य बनाम चिनार सिंह से जुड़ा है। इसमें वादी पक्ष ने आरोप लगाया है कि प्रतिवादी की ओर से 135 कनाल 8 मरला भूमि पर अतिक्रमण कर निर्माण कार्य किया जा रहा है। वादी पक्ष ने भूमि के सीमांकन, पहचान और माप के लिए आयुक्त नियुक्त करने की मांग की थी। अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। प्रतिवादी पक्ष ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उसने वादी की भूमि पर कोई अतिक्रमण नहीं किया है बल्कि वादी ही अन्य भूमि में हस्तक्षेप कर रहा है। यह भी कहा गया कि निर्माण कार्य के आरोप झूठे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने माना कि तहसीलदार की नियुक्ति से किसी भी पक्ष को नुकसान नहीं होगा बल्कि मौके पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अदालत ने क्षेत्र के तहसीलदार को निर्देश दिए कि दोनों पक्षों को नोटिस देकर स्थल निरीक्षण करें और यह जांचें कि क्या वास्तव में अतिक्रमण या निर्माण कार्य हुआ है। तहसीलदार को निर्देश दिए गए हैं कि वे निरीक्षण के बाद विस्तृत रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले अदालत में प्रस्तुत करें। इसके लिए पक्षकारों से आवश्यक दस्तावेज भी प्राप्त किए जा सकेंगे।
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