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Jammu News: हाईकोर्ट ने पीएसए के तहत हिरासत के आदेश को किया रद्द
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-कोर्ट ने पंपोर के गुलाम को तुरंत रिहा करने के आदेश दिए
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को पंपोर पुलवामा के गुलाम मोहिउद्दीन लोन के खिलाफ सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत हिरासत के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही किसी अन्य मामले में जरूरत न होने पर तुरंत रिहाई का आदेश दिया।
न्यायमूर्ति पुनीत गुप्ता की पीठ ने जिला मजिस्ट्रेट पुलवामा के आदेश को रद्द किया। पंपोर के एंड्रोसा ख्रीव निवासी गुलाम मोहिउद्दीन के खिलाफ 20 जून 2022 को केस दर्ज हुआ था। पीठ ने कहा, अदालत याचिकाकर्ता (लोन) के वकील के इस तर्क से भी सहमत है कि हिरासत आदेश में अस्पष्ट आधार याचिकाकर्ता को सलाहकार बोर्ड और सरकार के समक्ष वैधानिक प्रतिनिधित्व करने से वंचित करते हैं। प्रतिनिधित्व का अधिकार वैधानिक अधिकार और मौलिक है, जिससे याचिकाकर्ता को हिरासत आदेश में लगाए गए आरोपों की अस्पष्ट प्रकृति के कारण वंचित किया गया है। इसके बाद, अदालत ने हिरासत आदेश को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि इसे कानून के अनुसार पारित नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता को हिरासत से रिहा करने का निर्देश दिया जाता है, बशर्ते कि किसी अन्य मामले में उसकी आवश्यकता न हो।
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को पंपोर पुलवामा के गुलाम मोहिउद्दीन लोन के खिलाफ सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत हिरासत के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही किसी अन्य मामले में जरूरत न होने पर तुरंत रिहाई का आदेश दिया।
न्यायमूर्ति पुनीत गुप्ता की पीठ ने जिला मजिस्ट्रेट पुलवामा के आदेश को रद्द किया। पंपोर के एंड्रोसा ख्रीव निवासी गुलाम मोहिउद्दीन के खिलाफ 20 जून 2022 को केस दर्ज हुआ था। पीठ ने कहा, अदालत याचिकाकर्ता (लोन) के वकील के इस तर्क से भी सहमत है कि हिरासत आदेश में अस्पष्ट आधार याचिकाकर्ता को सलाहकार बोर्ड और सरकार के समक्ष वैधानिक प्रतिनिधित्व करने से वंचित करते हैं। प्रतिनिधित्व का अधिकार वैधानिक अधिकार और मौलिक है, जिससे याचिकाकर्ता को हिरासत आदेश में लगाए गए आरोपों की अस्पष्ट प्रकृति के कारण वंचित किया गया है। इसके बाद, अदालत ने हिरासत आदेश को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि इसे कानून के अनुसार पारित नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता को हिरासत से रिहा करने का निर्देश दिया जाता है, बशर्ते कि किसी अन्य मामले में उसकी आवश्यकता न हो।
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