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Jammu News: कुछ पूर्व मंत्रियों व विधायकों को सरकारी बंगलों में रुकने का अनुचित लाभ दे रहा संपदा विभाग
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- हाईकोर्ट ने 3 अप्रैल को तत्काल जनहित याचिका को फिर से अधिसूचित करने का दिया निर्देश
जम्मू। सरकारी बंगलों पर पूर्व विधायकों व मंत्रियों के कब्जे को उजागर करने वाली जनहित याचिका में बुधवार को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एन कोटिश्वर सिंह व न्यायमूर्ति एमए चौधरी की खंडपीठ ने सुनवाई की। इसमें याचिकाकर्ता के वकील एसएस अहमद ने कहा कि संपदा विभाग कुछ पूर्व मंत्रियों के लिए दोहरे मानक अपना रहा है। विभाग के इन मानकों के कारण ऐसे लोग सरकारी बंगलों में रह रहे हैं, जबकि वे अपात्र और उनके पास जम्मू व श्रीनगर में अपने घर हैं। खंडपीठ ने 3 अप्रैल, 2024 को तत्काल जनहित याचिका को फिर से अधिसूचित करने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता के वकील ने मामले की सुनवाई कर रहे खंडपीठ का ध्यान 13 सितंबर 2023 के आदेश जिसमें खंडपीठ ने जम्मू-कश्मीर संपदा विभाग (सरकारी आवास का आवंटन) विनियम, 2004 के विनियमन 5 पर ध्यान करवाया, जिसमें स्पष्ट है कि आवास उन व्यक्तियों को आवंटित नहीं किया जाएगा जिनके पास घर है। वकील एसएस अहमद ने तर्क दिया कि 45 से अधिक पूर्व मंत्रियों व विधायकों जिनके पास अपना आवास है, उन्हें सरकारी आवास में रहने दिया जा रहा है। उन्होंने पूर्व उप-मुख्यमंत्री कविंद्र सिंह के गिफ्ट डीड का भी उल्लेख किया। दलीलों पर विचार करने के बाद, मुख्य न्यायाधीश एन कोटिश्वर सिंह की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने महाधिवक्ता डीसी रैना से विनियमन 5 के उल्लंघन के संबंध में पूछा। इस पर महाधिवक्ता डीसी रैना ने यूटी प्रशासन की ओर से पेश होकर कहा कि वरिष्ठ एएजी एसएस नंदा अस्वस्थ हैं और जनहित याचिकाएं उन्हें सौंपी गई हैं। इस पर खंडपीठ ने रजिस्ट्री को 3 अप्रैल 2024 को तत्काल जनहित याचिका को फिर से अधिसूचित करने का निर्देश दिया। जेएनएफ
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जम्मू। सरकारी बंगलों पर पूर्व विधायकों व मंत्रियों के कब्जे को उजागर करने वाली जनहित याचिका में बुधवार को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एन कोटिश्वर सिंह व न्यायमूर्ति एमए चौधरी की खंडपीठ ने सुनवाई की। इसमें याचिकाकर्ता के वकील एसएस अहमद ने कहा कि संपदा विभाग कुछ पूर्व मंत्रियों के लिए दोहरे मानक अपना रहा है। विभाग के इन मानकों के कारण ऐसे लोग सरकारी बंगलों में रह रहे हैं, जबकि वे अपात्र और उनके पास जम्मू व श्रीनगर में अपने घर हैं। खंडपीठ ने 3 अप्रैल, 2024 को तत्काल जनहित याचिका को फिर से अधिसूचित करने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता के वकील ने मामले की सुनवाई कर रहे खंडपीठ का ध्यान 13 सितंबर 2023 के आदेश जिसमें खंडपीठ ने जम्मू-कश्मीर संपदा विभाग (सरकारी आवास का आवंटन) विनियम, 2004 के विनियमन 5 पर ध्यान करवाया, जिसमें स्पष्ट है कि आवास उन व्यक्तियों को आवंटित नहीं किया जाएगा जिनके पास घर है। वकील एसएस अहमद ने तर्क दिया कि 45 से अधिक पूर्व मंत्रियों व विधायकों जिनके पास अपना आवास है, उन्हें सरकारी आवास में रहने दिया जा रहा है। उन्होंने पूर्व उप-मुख्यमंत्री कविंद्र सिंह के गिफ्ट डीड का भी उल्लेख किया। दलीलों पर विचार करने के बाद, मुख्य न्यायाधीश एन कोटिश्वर सिंह की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने महाधिवक्ता डीसी रैना से विनियमन 5 के उल्लंघन के संबंध में पूछा। इस पर महाधिवक्ता डीसी रैना ने यूटी प्रशासन की ओर से पेश होकर कहा कि वरिष्ठ एएजी एसएस नंदा अस्वस्थ हैं और जनहित याचिकाएं उन्हें सौंपी गई हैं। इस पर खंडपीठ ने रजिस्ट्री को 3 अप्रैल 2024 को तत्काल जनहित याचिका को फिर से अधिसूचित करने का निर्देश दिया। जेएनएफ
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