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जम्मू: न्यायाधीशों ने कहा- ऐसे तो अगले सात साल तक पूरा नहीं होगा मुबारक मंडी का काम

Fri, 07 Apr 2023 12:51 PM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Fri, 07 Apr 2023 12:51 PM IST
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Jammu: judges said like this the work of Mubarakh Mandi not be completed for the next seven years
मुबारक मंडी, जम्मू - फोटो : निखिल मेहता

ऐतिहासिक मुबारक मंडी के जीर्णोद्धार की मौजूदा स्थिति देखकर यह लगता है कि अगले पांच से सात साल इसे पूरा होने में लग जाएंगे। काम करने के लिए चंद मजूदरों को लगा रखा है। पुरानी अदालत के हिस्से को लोग अपने वाहन पार्क करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। यहां तक कि मुबारक मंडी की 25 इमारतों में से पांच पूरी तरह से खत्म हो चुकी हैं। जबकि बाकी की इमारतों के लिए छह प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिन्हें 31 मार्च, 2023 को पूरा किया जाना था, जाेकि नहीं हुआ है। यह जानकारी हाईकोर्ट के न्यायाधीश ताछी रबस्टन और राजेश सेकरी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने दी है। 

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हालांकि इस पर सरकारी अफसरों ने आश्वासन दिया कि काम में तेजी लाई जाएगी और साल के अंत तक प्रोजेक्ट पूरा कर लिए जाएंगे। इस आश्वासन पर खंडपीठ ने आदेश दिया कि एक हलफनामा दायर करें और बताएं कि प्रोजेक्ट को जल्द पूरा करने के लिए क्या किया जाएगा। वहीं, खंडपीठ ने मंडलायुक्त को आदेश दिया कि वह पुरानी अदालत की जगह को पार्किंग से खाली कराएं।
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निरीक्षण करने के बाद यह सब कहा

बता दें कि तीन अप्रैल को दोनों न्यायाधीशों ने मंडलायुक्त जम्मू, डीसी जम्मू की मौजूदगी में मुबारक मंडी का दौरा किया था। उन्होंने मौके पर देखा कि काम पूरा होने की समय सीमा समाप्त हो चुकी है। बहुत ही कम संख्या में मजूदरों से काम करवाया जा रहा है। हालांकि मौके पर मौजूद लोगों ने जरूर कहा कि काम में तेजी लाएंगे। यहां 25 इमारतों में से पांच पूरी तरह से खत्म हो चुकी हैं। बाकी की 20 इमारतों के लिए 6 प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इनमें राम सिंह की रानी का महल, दरबार हाॅल, डोगरा म्यूजियम, राजा राम सिंह पैलेस, राजा अमर सिंह पैलेस और केंद्रीय प्रागंण शामिल हैं। सिर्फ सैन्य मुख्यालय और विदेश विभाग का काम पूरा हुआ है, जबकि इस साल के अंत तक हेरिटेज क्लाॅक का काम पूरा होगा।
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समय सीमा और लागत बढ़ रही

हाईकोर्ट ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि इस तरह के ऐतिहासिक स्मारक के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों और कुशल श्रम की भागीदारी से परियोजना को निर्धारित ट्रैक पर रखना मुश्किल हो जाता है। इसके साथ-साथ, भौतिक, वित्तीय और आर्थिक वातावरण में जन्मजात अनिश्चितताएं और परिष्कार हैं, जिनमें ऐसी परियोजनाओं को क्रियान्वित किया जाता है। हालांकि, समय सीमा या समय सीमा का उल्लंघन परियोजना लागत को कई गुना बढ़ा देगा।

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