जम्मू-कश्मीरः कोरोना से बचाव के लिए धार्मिक स्थलों में बनेंगी कोविड-19 सुरक्षा कमेटियां
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प्रदेश में धार्मिक स्थल 16 अगस्त से खुल रहे हैं। इसी को लेकर मंडलायुक्त जम्मू संजीव वर्मा ने गुरुवार को धार्मिक स्थलों के प्रमुखों और प्रबंधकों से बैठक की। उनसे धार्मिक स्थलों में कोरोना से बचाव के लिए तमाम सावधानियां बरतने की अपील की। साथ ही उन्हें एसओपी की कॉपी भी सौंपी।
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अतिरिक्त आयुक्त आरके सरंगल की मौजूदगी में हुई बैठक में मंडलायुक्त ने धार्मिक स्थलों में कोविड 19 सुरक्षा कमेटियों का गठन करने को भी कहा, जिसमें स्वयंसेवी, सेवादार और कर्मचारी शामिल हो सकते हैं। यह समितियां एसओपी पर अमलीजामा पहनाएंगी।
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उन्होंने कहा कि एसओपी के तहत 60 साल से ज्यादा और दस साल से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं को धार्मिक स्थलों पर न जाने और घर पर ही रहने की सलाह दी गई। कोरोना काल में धार्मिक स्थलों के प्रमुखों की तरफ से मिले सहयोग की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि वह लोगों में कोरोना से बचाव के लिए जागरूकता पैदा करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
मास्क लगाकर ही प्रवेश की अनुमति
उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों पर आने वाले सभी लोग छह फीट की दूरी एक दूसरे से बनाए रखेंगे। मास्क लगाकर ही लोगों को आने की अनुमति दी जाएगी। धार्मिक स्थल में प्रवेश से पहले हाथ-पांव को साबुन से धोना होगा। मूर्तियों और पवित्र पुस्तकों को छूने की अनुमति नहीं है। धार्मिक स्थलों के प्रमुखों ने हर सहयोग का आश्वासन दिया।
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भवन के बाहर लगाए ड्रमों में श्रद्धालु डालेंगे प्रसाद
शहर के प्रमुख बावे वाली माता मंदिर के महंत बिट्टा के अनुसार मंडलायुक्त के साथ हुई बैठक में प्रसाद से जुड़े दुकानदारों की रोजी रोटी का मुद्दा भी रखा गया। फैसला लिया गया कि भवन के बाहर दो ड्रम लगाए जाएंगे जिसमें भक्तजन अपने साथ लाने वाले प्रसाद को डालेंगे, ताकि उनकी आस्था के साथ दुकानदारों का कारोबार चलता रहा। इसमें भवन के भीतर किसी तरह का प्रसाद ले जाने की इजाजत नहीं होगी।
इसके अलावा भवन परिसर में स्थापित जंगले में बकरी नहीं रखी जाएगी और न ही बाहर से आने वाली बकरी को लिया जाएगा। श्रद्धालु जंगले के बाहर मोख करके अपनी आस्था जता सकते हैं। इससे पहले सैकड़ों श्रद्धालु प्रतिदिन बकरियों को पूजते थे।
मंदिर में आने वाले सभी श्रदालुओं को सामाजिक दूरी का पालन करते हुए सर्किल के भीतर से ही होकर भवन तक पहुंचना होगा। सीधे किसी को भी आगे जाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। सभी श्रदालु मास्क पहनकर आएंगे और इसमें यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मास्क मुंह पर किसी तरह से ढीला न हो। सरकार की ओर से जारी एसओपी का सख्ती से पालन किया जाएगा।