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Coronavirus Jammu Kashmir: अब संदिग्ध मरीजों से वातावरण में नहीं फैलेगा संक्रमण, जीएमसी ने तैयार की कोविड ट्रॉली

Thu, 16 Apr 2020 11:00 AM IST
प्रशांत कुमार अमित कुमार, जम्मू
अमित कुमार, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Thu, 16 Apr 2020 11:00 AM IST
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Coronavirus in Jammu Kashmir (J&K) news in Hindi, Now coronavirus infection will not spread from suspected patients to environment
कोविड ट्रॉली - फोटो : अमर उजाला

कोरोना के संदिग्ध मरीजों से किसी प्रकार का संक्रमण न फैले इसके लिए जीएमसी(गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज) ने एक विशेष कोविड ट्रॉली तैयार की है। अब संदिग्ध मरीजों को इन विशेष ट्रॉली में स्क्रीनिंग सहित अन्य जांच के लिए लाया जाएगा। इस ट्रॉली का निर्माण जीएमसी ने स्वयं किया है। संभवत: यह पहला मौका है जब ऐसी ट्रॉली किसी मेडिकल कॉलेज ने स्वयं तैयार की है।

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इस ट्रॉली की खासियत यह है कि यह पूरी तरह से प्लास्टिक की शीट से बंद होगी और इसमें मरीज को ऑक्सीजन देने के लिए सिर्फ सुराख छोडे़ गए हैं। जीएमसी में पहुंचने वाले कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीजों को तीसरे फ्लोर पर नए आईसीयू में रखा जा रहा है। लेकिन समस्या यह थी कि संदिग्ध मरीजों को स्क्रीनिंग या अन्य जांच के लिए खुले में ट्रॉली में ले जाना पड़ता था। इससे संक्रमण फैलने की आशंका रहती थी।
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गत दिवस प्रिंसिपल डॉ. सुनंदा रैना की अध्यक्षता में विभिन्न एचओडी ने बैठक कर विशेष कोविड ट्रॉली बनाने का सुझाव दिया। जिसके बाद चौबीस घंटे में एक ट्रॉली तैयार की गई। डॉ. सुनंदा ने बताया कि ट्रॉली को संदिग्ध मरीज की सभी चिकित्सा सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसे कोविड ट्रॉली का नाम दिया गया है।

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ट्रॉली के ऊपर फ्लैब लगाया गया है

अगर मरीज की हालत गंभीर है और वह एंबो बैग पर है तो इस ट्रॉली में मुंह की तरफ दो सुराख रखे गए हैं, जिसमें चिकित्सा कर्मी गलब्स पहनकर उस एंबो बैग को चला सकता है, जिससे मरीज की सांसें चलती रहेंगी। इसी तरह ट्रॉली के ऊपर फ्लैब लगाया गया है जिसे जरूरत पड़ने पर खोला जा सकता है।

अगर मरीज ट्रॉली के भीतर खांसता या छींकता है तो उसके संक्रमण बाहर नहीं आ पाएंगे। गंभीर मरीज को ऑक्सीजन देने के लिए पैरों के पास और अन्य जगहों पर सुराख रखने के साथ उसे ऑक्सीजन सिलिंडर से भी कृत्रिम ऑक्सीजन दी जा सकती है।

उन्होंने कहा कि अगर ट्रॉली का प्रशिक्षण सफल रहता है तो इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी। इस प्रयास को सफल बनाने में मेडिसन विभाग के एचओडी डॉ. अनिल शर्मा, अधीक्षक डॉ. दारा सिंह आदि का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

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