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पहल: सरहदी गांवों में बनेंगी सिविल डिफेंस कमेटियां, कठुआ से लेकर मेंढर तक 50 गांव चिह्नित
Tue, 03 May 2022 02:43 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अजय मीनिया, जम्मू
अजय मीनिया, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Tue, 03 May 2022 02:43 PM IST
सार
कठुआ से लेकर पुंछ के मेंढर तक इन कमेटियों का गठन होने जा रहा है, जो सरहदी गांवों में माहौल खराब होने पर लोगों की मदद करेंगी। इसके लिए जम्मू-कश्मीर के 50 गांव चिह्नित किए गए हैं।
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पर्यटकों को बावलियावाला बॉर्डर पर जाने का मौका मिलेगा।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
सरहद पर पाकिस्तानी गोलाबारी और अन्य संकट में लोगों की मदद के लिए सुरक्षा बलों से पहले सिविल डिफेंस कमेटी पहुंचेगी। देश में पहली बार सीमावर्ती इलाकों में बॉर्डर सिविल डिफेंस कमेटियां बनने जा रही हैं। जून के पहले सप्ताह कुछ कमेटियां गठित कर दी जाएंगी। हथियारों से लैस इन कमेटियों के लिए अलग से वर्दी होगी और मानदेय भी मिलेगा। इन कमेटियों में उन गांवों के लोग शामिल होंगे, जो सबसे पहले गोलाबारी का शिकार होते हैं।
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कठुआ से लेकर पुंछ के मेंढर तक इन कमेटियों का गठन होने जा रहा है, जो सरहदी गांवों में माहौल खराब होने पर न सिर्फ लोगों की मदद करेंगी, बल्कि उनके मवेशियों और संपत्ति तक की रक्षा करेंगी। जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर के 50 गांव चिह्नित किए गए हैं। यह वो गांव हैं, जो गोलाबारी होने पर सबसे पहले प्रभावित होते हैं। इन गांवों के लिए बॉर्डर सिविल डिफेंस कमेटी बनेगी। इस कमेटी में 20 से 22 लोग शामिल होंगे। इनमें भी 15 लोग युवा लड़के लड़कियां होंगी, बाकी के लोग वरिष्ठ नागरिक होंगे।
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यह होगा इन कमेटियों का काम
कभी गोलाबारी होने पर लोगों को सुरक्षित बंकरों तक पहुंचाने, बंकरों का रखरखाव, लोगों के मवेशियों को गोलाबारी के बीच सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना, गोलाबारी में फंसे लोगों को घरों से बाहर निकालना आदि काम ये कमेटियां करेंगी।
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एक महीने का मिलेगा प्रशिक्षण
इन कमेटियों में शामिल लोगों को एक महीने का प्रशिक्षण मिलेगा। इसमें इनको तमाम तरह की जानकारियां दी जाएंगी। बताया जाएगा कि गोलाबारी की स्थिति में उनको कैसे काम करना है। कैसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल कर बंकर तक पहुंचाना है, कैसे बंकर को आपात स्थिति में साफ सुथरा बनाना है, लोगों के मवेशियों को बाहर कैसे निकालना है। किसी घायल को प्राथमिक उपचार कैसे देना है। इस तरह की स्थिति में सड़कों को यातायात फ्री बनाना आदि की जानकारी दी जाएगी।
जून के पहले सप्ताह तक करेंगे गठन
मंडलायुक्त जम्मू को भी इसके बारे जानकारी दी जा चुकी है। राजस्व विभाग की मदद से इनका गठन करेंगे। जून के पहले सप्ताह तक कुछ कमेटियां बन जाएंगी। इनमें शामिल लोगों को कुछ मानदेय भी मिलेगा। फिलहाल बॉडॅर के 50 गांव चुने गए हैं। इन कमेटियों में शामिल लोगों को सिविल डिफेंस की वर्दी और उपकरण भी दिए जाएंगे। सरहदी इलाकों में लोगों की मदद करने के लिए यह कमेटियां अहम भूमिका निभाएंगी। हमने अकसर देखा है कि अचानक गोलाबारी होने पर लोगों को कितना दरबदर होना पड़ता है।
-एचके लोहिया, कमांडेंट जनरल, सिविल डिफेंस होमगार्ड, जेएंडके
देश के अन्य सीमावर्ती इलाकों में भी बनेंगी
कमांडेंट जनरल एच के लोहिया का कहना है कि यदि हमारी यह योजना जम्मू में कामयाब होगी तो हम इसकी सिफारिश देश के अन्य सीमावर्ती इलाकों में भी करेंगे। बांग्लादेश और नेपाल बॉर्डर पर भी इस तरह की कमेटियां बनाने के लिए केंद्र से सिफारिश करेंगे, क्योंकि देश में हम इन कमेटियों को बनाने जा रहे हैं। जिसका काफी हद तक लोगों को लाभ मिलेगा।
गोलाबारी ही नहीं, अन्य आपदा से भी राहत
यह कमेटियां सिर्फ गोलाबारी ही नहीं, बल्कि सीमांत इलाकों में आने वाली किसी भी विपदा या आपदा में लोगों की मदद करेंगी, क्योंकि सीमांत गांव तक राहत पहुंचाने में काफी वक्त लगता है। ऐसे में यह कमेटियां लोगों की मदद और बचाव कार्य में सबसे पहले पहुंचेंगी।