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कान्हा के जन्मोत्सव के लिए सजा जम्मू, मंदिरों में साज सज्जा पूरी, आज जमेगा रंग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Mon, 03 Sep 2018 02:16 AM IST
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जन्माष्टमी का जम्मू में जश्न
- फोटो : संजय गुप्ता
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श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाने के लिए मंदिरों की नगरी जम्मू सज धज का तैयार हो गई है। जम्मू के मंदिरों के अलावा बाजार रविवार को दिन भर सजे रहे। सोमवार को पर्व के अवसर पर जम्मू में कहीं शोभा यात्रा निकलेगी तो कहीं कान्हा के जन्म दिवस की खुशी में लोग मंदिर में जुटेंगे। रात बारह बजे तक मंदिरों में श्री कृष्ण जन्मोत्सव को लेकर विशेष कार्यक्रम होंगे।
श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर गांधीनगर, बंसी मंदिर गोल मार्केट, श्री रघुनाथ मंदिर, इस्कान मंदिर के अलावा अन्य सभी मंदिरों में भी श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष कार्यक्रम होंगे। जन्माष्टमी के दिन पूजा के लिए भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति को भी स्थापित किया जाता है। इस दिन उनके बाल रूप के चित्र को स्थापित करने की मान्यता है, पूजा में देवीकी, वासुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा, लक्ष्मी का नाम लेना न भूले। बाल गोपाल को झूला झुलाया जाता है और बहुत से मंदिरों में रास लीला का आयोजन भी किया जाता है। जन्माष्टमी पर मंदिर रात बारह बजे तक खुले रहते है। बारह बजे कान्हा का जन्म होता हैं और इसकेे के साथ सब भक्त चरणामृत लेकर अपना व्रत खोलते है।
जन्माष्टमी के दिन व्रत रखने का भी विधान है। इस दिन व्रत रखने का काफी महत्त्व है। बताया जाता हैं कि इस दिन व्रत रखने से घर में सुख, शांति और स्मृद्धि आती है। स्कंध पुराण के मुताबिक जो मनुष्य जानते हुए भी इस दिन व्रत नहीं रखता वह जंगल में सृप होता हैं लेकिन जो व्यक्ति विधि के अनुसार पूरी आस्था के साथ इस दिन व्रत रखते है उनके पास हमेशा लक्ष्मी स्थिर रहती है और बिगड़ते काम बन जाते है।
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श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर गांधीनगर, बंसी मंदिर गोल मार्केट, श्री रघुनाथ मंदिर, इस्कान मंदिर के अलावा अन्य सभी मंदिरों में भी श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष कार्यक्रम होंगे। जन्माष्टमी के दिन पूजा के लिए भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति को भी स्थापित किया जाता है। इस दिन उनके बाल रूप के चित्र को स्थापित करने की मान्यता है, पूजा में देवीकी, वासुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा, लक्ष्मी का नाम लेना न भूले। बाल गोपाल को झूला झुलाया जाता है और बहुत से मंदिरों में रास लीला का आयोजन भी किया जाता है। जन्माष्टमी पर मंदिर रात बारह बजे तक खुले रहते है। बारह बजे कान्हा का जन्म होता हैं और इसकेे के साथ सब भक्त चरणामृत लेकर अपना व्रत खोलते है।
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जन्माष्टमी के दिन व्रत रखने का भी विधान है। इस दिन व्रत रखने का काफी महत्त्व है। बताया जाता हैं कि इस दिन व्रत रखने से घर में सुख, शांति और स्मृद्धि आती है। स्कंध पुराण के मुताबिक जो मनुष्य जानते हुए भी इस दिन व्रत नहीं रखता वह जंगल में सृप होता हैं लेकिन जो व्यक्ति विधि के अनुसार पूरी आस्था के साथ इस दिन व्रत रखते है उनके पास हमेशा लक्ष्मी स्थिर रहती है और बिगड़ते काम बन जाते है।
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शोभा यात्रा में कृष्ण की लीलाओं को दर्शाया
जन्माष्टमी का जम्मू में जश्न
- फोटो : संजय गुप्ता
न्यू प्लाट स्थित श्री राधा कृष्ण मंदिर से रविवार को सायं पांच बजे श्री कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य पर शोभा यात्रा निकाली गई। इस अवसर बड़ी संख्या में लोगों ने झांकी में हिस्सा लेकर भगवान श्री कृष्ण का गुणगान किया। शोभा यात्रा विभिन्न बाजारों से होते हुए वापिस श्री राधा कृष्ण मंदिर में आकर संपन्न हुई।
बाजारों में खरीददारों की रौनक
बाल गोपाल भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव को धूमधाम से मनाने के लिए लोगों ने रविवार को बाजारों में जमकर खरीददारी की। व्रत के सामान से लेकर कान्हा के सुंदर कपड़े व बच्चों को कान्हा बनाने के लिए वेश भूषा से लेकर बांसुरी और लड़कियों को राधा बनाने के लिए कपड़ों की भी खूब खरीददारी हुई।