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J&K: महबूबा मंत्रिमंडल की रूपरेखा लगभग तय
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Sun, 03 Apr 2016 12:23 PM IST
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महबूबा मुफ्ती और निर्मल सिंह
- फोटो : फाइल
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महबूबा मुफ्ती के मंत्रिमंडल की रूपरेखा लगभग तय है। दोनों दलों की ओर से संभावित मंत्रियों के नामों पर सहमति बना ली गई है। हालांकि, महबूबा के रविवार को श्रीनगर पहुंचने के बाद भाजपा विधायक दल के नेता डा. निर्मल सिंह से मुलाकात के बाद मंत्रियों को विभागों का बंटवारा किए जाने की उम्मीद है।
महबूबा मंत्रिमंडल में मंत्रियों की संख्या 24 रहने की संभावना है। इसमें भाजपा के कोटे में आठ कैबिनेट और तीन राज्य मंत्री आएंगे। पीडीपी के पास 10 कैबिनेट और तीन राज्यमंत्री होंगे। सूत्रों का कहना है कि मंत्रिमंडल में एक-दो को छोड़कर भाजपा कोटे के सभी पुराने चेहरों को मौका दिया जाएगा।
एक पूर्व कैबिनेट मंत्री पर पार्टी की रीति-नीतियों की अनदेखी करने, कार्यकर्ताओं की उपेक्षा करने, पार्टी कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखने का आरोप है। इसका उन्हें खामियाजा चुकाना पड़ सकता है। इसके साथ ही एक पूर्व राज्य मंत्री पर भी पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप है।
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कहा जा रहा है कि मुफ्ती साहब के निधन के बाद गैर भाजपा सरकार बनाने के प्रयासों में उनका नाम सामने आया था। उधर, पीडीपी भी लगभग अपने सभी पुराने चेहरे पर दांव लगाएगी।
महबूबा के मुख्यमंत्री बनने के बाद संगठन में उनके उत्तराधिकारी के पद पर एक पूर्व मंत्री तथा पार्टी के वरिष्ठ नेता का नाम चल रहा है। ऐसी स्थिति में उन्हें ड्राप किया जा सकता है। मंत्रिमंडल में दोनों ही दलों की ओर से महिलाओं का भी प्रतिनिधित्व रहेगा।
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महबूबा मंत्रिमंडल में मंत्रियों की संख्या 24 रहने की संभावना है। इसमें भाजपा के कोटे में आठ कैबिनेट और तीन राज्य मंत्री आएंगे। पीडीपी के पास 10 कैबिनेट और तीन राज्यमंत्री होंगे। सूत्रों का कहना है कि मंत्रिमंडल में एक-दो को छोड़कर भाजपा कोटे के सभी पुराने चेहरों को मौका दिया जाएगा।
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एक पूर्व कैबिनेट मंत्री पर पार्टी की रीति-नीतियों की अनदेखी करने, कार्यकर्ताओं की उपेक्षा करने, पार्टी कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखने का आरोप है। इसका उन्हें खामियाजा चुकाना पड़ सकता है। इसके साथ ही एक पूर्व राज्य मंत्री पर भी पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप है।
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कहा जा रहा है कि मुफ्ती साहब के निधन के बाद गैर भाजपा सरकार बनाने के प्रयासों में उनका नाम सामने आया था। उधर, पीडीपी भी लगभग अपने सभी पुराने चेहरे पर दांव लगाएगी।
महबूबा के मुख्यमंत्री बनने के बाद संगठन में उनके उत्तराधिकारी के पद पर एक पूर्व मंत्री तथा पार्टी के वरिष्ठ नेता का नाम चल रहा है। ऐसी स्थिति में उन्हें ड्राप किया जा सकता है। मंत्रिमंडल में दोनों ही दलों की ओर से महिलाओं का भी प्रतिनिधित्व रहेगा।