नये अधिवास नियम पर रारः बुखारी ने कहा- जम्मू-कश्मीर के लोगों की आंख में धूल झोंकने की कवायद
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जम्मू कश्मीर अपनी पार्टी (जेकेएपी) के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी ने आरोप लगाया है कि केंद्र शासित प्रदेश में डोमिसाइल कानून पर जारी केंद्र का आदेश पूर्ववर्ती राज्य के लोगों की आंखों में धूल झोंकने की कवायद के अलावा और कुछ नहीं है। यह संसद द्वारा बनाया गया कानून नहीं है बल्कि सरकार द्वारा जारी किया गया आदेश है। इसलिए जम्मू कश्मीर के लिए डोमिसाइल कानून को न्यायिक समीक्षा से छूट नहीं है।
उन्होंने कहा एक ओर जहां जेकेएपी जम्मू कश्मीर के लोगों को जमीन और नौकरी के अधिकार के लिए मांग करती रही है वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार द्वारा जारी आदेश इस बात का परिचायक है कि यह राज्य के लोगों की महत्वाकांक्षाओं को ध्यान में रखे बिना नौकरशाही के स्तर पर किया गया आकस्मिक फैसला है। जो आदेश जारी किया गया है वह जेकेएपी को पूरी तरह अस्वीकार्य है।
रोजगार के मामले में, पेशेवर कालेजों में प्रवेश और सेवाओं में गैर राजपत्रित, राजपत्रित पद के संदर्भ में कानूनी और सांविधानिक व्यवस्था की जानी चाहिए थी ताकि जम्मू और कश्मीर के उन लोगों के अधिकारों की रक्षा होती जो यहां के स्थायी निवासी हैं। यह भी मांग की कि जब तक देश कोरोना वायरस के खतरे से उबर नहीं जाता तब तक इस आदेश पर अमल न किया जाए।
पिछले साल पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 व 35ए हटने के लगभग साढ़े सात महीने बाद जम्मू-कश्मीर के बाशिंदों को नौकरी और जमीन का हक मिल गया है। केंद्र सरकार ने प्रदेश के लिए डोमिसाइल कानून लागू कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (राज्य कानूनों का अनुकूलन) आदेश 2020 जारी किया। सरकार की ओर सेे जारी गजट के अनुसार 15 साल तक राज्य में रहने वाले लोगों को यहां का स्थायी अधिवासी माना जाएगा। अचल संपत्तियां तथा जमीन भी यही लोग खरीद सकेंगे।
इसके साथ ही नौकरी के हक के तहत चतुर्थ श्रेणी तक के पद केवल यहां के बाशिंदों के लिए आरक्षित होंगे। अन्य पदों पर राष्ट्रीय स्तर पर भर्ती होगी। अनुच्छेद 370 व 35ए हटने के बाद जमीन तथा नौकरी को लेकर प्रदेशवासियों की चिंताओं को देखते हुए केंद्र ने घोषणा की थी कि जल्द ही डोमिसाइल कानून लागू किया जाएगा।
भाजपा समेत लगभग सभी राजनीतिक दलों तथा सामाजिक संगठनों ने भी इसके लिए आवाज बुलंद की थी। ज्ञात हो कि राज्य के विशेष दर्जे के तहत नौकरी में केवल यहीं के लोगों का हक था। साथ ही यहां कोई भी जमीन की खरीद-फरोख्त नहीं कर सकता था। अनुच्छेद 370 हटने के बाद यहां के बाशिंदों से यह हक छिन गया था।
सरकारी गजट के अनुसार 138 कानूनों में संशोधन किया गया है। जम्मू-कश्मीर सिविल सर्विसेस एक्ट में भी संशोधन किया गया है। इसमें डोमिसाइल कैटेगरी का भी समावेश किया गया है, जिसके अनुसार यहां 15 साल तक रहने वालों को इस श्रेणी में माना जाएगा।
ऑल इंडिया सर्विस के तहत 10 साल तक की सेवा करने वालों के बच्चों को भी इस श्रेणी में रखा गया है। साथ ही जिस किसी ने यहां सात साल तक पढ़ाई की हो या फिर 10वीं या 12वीं की परीक्षा यहां से दी हो, वह भी डोमिसाइल की श्रेणी में आएगा। राहत एवं पुनर्वास आयुक्त (माइग्रेंट) के यहां पंजीकृत सभी लोग भी इसी श्रेणी में होंगे।