फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   budget 2020 Know dinanath nadim a famous kashmiri poet

लोकसभा में कश्मीरी साहित्य की गूंज, वो कवि जिनकी पंक्तियों से शुरू हुआ 2020 का बजट

Sat, 01 Feb 2020 01:35 PM IST
प्रशांत कुमार प्रशांत कुमार द्विवेदी, अमर उजाला, जम्मू-कश्मीर
प्रशांत कुमार द्विवेदी, अमर उजाला, जम्मू-कश्मीर Published by: प्रशांत कुमार Updated Sat, 01 Feb 2020 01:35 PM IST
विज्ञापन
budget 2020 Know dinanath nadim a famous kashmiri poet
लोकसभा में कश्मीरी साहित्य की गूंज - फोटो : अमर उजाला, ग्राफिक्स

बजट पेश करने के दौरान आज देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने कश्मीरी भाषा में एक कविता पढ़ी। इसके बाद उन्होंने उस कविता का अनुवाद भी बताया। कविता का हिंदी अनुवाद कुछ इस तरह है...

विज्ञापन

हमारा वतन खिलते हुए शालीमार बाग जैसा
हमारा वतन डल लेक में खिलते हुए कमल जैसा
हमारा वतन नौजवानों के गरम खून जैसा
मेरा वतन, तेरा वतन, हमारा वतन
दुनिया का सबसे प्यारा वतन


इसके बाद वित्त मंत्री ने बताया कि इस कविता को कश्मीरी कवि दीनानाथ नादिम ने लिखा है जिन्हें साहित्य अकादमी से सम्मानित भी किया जा चुका है। जानिए कौन हैं दीनानाथ नादिम जिनकी कविता से लोकसभा गूंज उठी।
विज्ञापन


दीनानाथ नादिम आधुनिक कश्मीरी काव्य के वट वृक्ष के समान हैं। कश्मीरी साहित्य के आधुनिक काल में उनका अत्यधिक प्रभाव है। साहित्य को नई दिशा और दशा देने वाले कवियों में उनका नाम शुमार है। इतना ही नहीं उनको कश्मीरी साहित्य की अग्रिम पंक्ति में रखा जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मशहूर कवि महजूर से एक मुशायरे के दौरान एक प्रश्न किया गया कि जनाब आपका उत्तराधिकारी कौन है। उन्होंने मंच से ही उंगली उठाकर श्रोताओं के बीच बंद गले का कोट पहने बैठे नौजवान की ओर इशारा किया...वह नौजवान है। वो कोई और नहीं बल्कि दीनानाथ नादिम ही थे।

 

नादिम जैसा युग पुरुष अनेक वर्षों तक पैदा नहीं होगा

दीनानाथ नादिम के 70वें जन्म दिवस के अवसर पर जम्मू कश्मीर राष्ट्रभाषा प्रचार समिति द्वारा प्रकाशित अभिनंदन ग्रंत में जम्मू कश्मीर कला, संस्कृति भाषा के प्रख्यात आलोचक मोहम्मद यूसुफ ठेंग ने अपने संदेश में लिखा था कि दीनानाथ बहुत ही बड़े कश्मीरी कवि हैं।

इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि बीसवीं शताब्दी में सांस्कृतिक क्षेत्र में उनका रुतबा राजनैतिक क्षेत्र के शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के समान है। उन्होंने नादिम को कश्मीरी भाषा को पतनोन्मुख परंपराओं से मुक्त कराने का भी श्रेय दिया। साथ ही कहा कि नादिम जैसा युग पुरुष अनेक वर्षों तक पैदा नहीं होगा।

दीनानाथ नादिम का जन्म 18 मार्च 1916 को श्रीनगर के एक निम्न मध्यवर्गीय परिवार में हुआ था। 1922 में उनके पिता का देहांत हो गया। इसके बाद उनकी मां ने ही उन्हें काव्य रचना के संस्कार दिए। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि मेरी मां बचपन में मुझे ललद्यद के 'वाख' और नुंद ऋषि के 'श्रुख' सुनाया करती थीं। परमानंद और कृष्ण राजदान की कविताएं सुनाकर उन्होंने मुझे सांस्कृतिक परंपरा का बोध कराया।

युवावस्था तक पहुंचते-पहुंचते नादिम को अंग्रेजी के जाने-माने कवि वर्डसवर्थ की कविताओं ने प्रभावित किया। इसके बाद उर्दू के कवि पंडित ब्रजनारायण चकबस्त की सुबह-ए-वतन कविता ने उन्हें आंदोलित किया। बता दें कि नादिम प्रारंभ में उर्दू में कविताएं लिखते थे। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के निधन पर उन्होंने 'कलिंग से राजघाट तक' शीर्षक से कविता लिखी। उनके कविता संग्र शिहिल कुल के लिए 1986 में साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed