फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   BJP will not accept talks with separatists

अलगाववादियों से वार्ता की सलाह भाजपा को मंजूर नहीं

Mon, 18 Jan 2016 11:05 PM IST
Updated Mon, 18 Jan 2016 11:05 PM IST
विज्ञापन
BJP will not accept talks with separatists

जम्मू-कश्मीर में नई सरकार के गठन पर पीडीपी के लिए चुप्पी तोड़ना मजबूरी बन गई थी। मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भले ही खामोशी ओढ़ रखी हो लेकिन परदे के पीछे भाजपा और पीडीपी के वार्ताकारों में बातचीत जारी रही।

विज्ञापन


पीडीपी गठबंधन एजेंडा के कुछ बिंदुओं पर केंद्र से ठोस आश्वासन पर अड़ा था लेकिन नेशनल कांफ्रेंस के मुखिया फारूक अब्दुल्ला के दांव ने पीडीपी को बैकफुट पर आने को मजबूर कर दिया।
विज्ञापन


अब दिलों को जोड़ने के मुफ्ती के विजन को पीडीपी ने नए समझौते का आधार बनाया है। इस बीच, केंद्र के दूत वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने महबूबा को कश्मीर के पैकेज के तहत उदार मदद का भरोसा भी दिया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

मोदी की लाहौर यात्रा का हवाला देकर पीडीपी को खामोश कर दिया

BJP will not accept talks with separatists

हालांकि फारूक ने बाद में यूटर्न लेते हुए भाजपा से गठबंधन की संभावना से इनकार कर दिया लेकिन उनके पूर्व के बयान ने भाजपा को बड़ी राहत दी।

भाजपा ने अब साफ कर दिया है कि वर्तमान हालात में अलगाववादियों से बातचीत तो दूर इस मुद्दे पर आश्वासन भी देना उसके लिए संभव नहीं है। यह अलग बात है कि यह मुद्दा गठबंधन एजेंडे में शुमार है।

पाकिस्तान से वार्ता के मुद्दे पर भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लाहौर यात्रा का हवाला देकर पीडीपी को खामोश कर दिया। बाद में पीडीपी की कोर कमेटी की बैठक ने भी मोदी की पहल की सराहना करते हुए नए सिरे से समझौते के लिए मजबूत आधार खोज लिया।

दोनों पार्ट‌ियों में कई मुद्दों पर गत‌िरोध

BJP will not accept talks with separatists

यह पहला मौका नहीं है जब नेशनल कांफ्रेंस और भाजपा ने मिलकर सरकार बनाने की कोशिश की हो। चुनाव के तुरंत बाद भाजपा ने पहले नेकां से ही गठबंधन की कोशिश की थी। तब उमर अब्दुल्ला को केंद्र में मंत्री बनाकर जम्मू कश्मीर में भाजपा के मुख्यमंत्री के फार्मूले को उमर ने नकार दिया था।

बाद में दो माह के मंथन से पीडीपी के साथ सरकार बनाने का एजेंडा बना। इस बार पहले भाजपा ने देर की और बाद में पीडीपी ने चुप्पी साधी। मुफ्ती के निधन के दिन ही पीडीपी की ओर से राज्यपाल को पत्र सौंप दिया गया था लेकिन भाजपा ने अपना रुख साफ करने में देर लगाई।

इससे सियासी अनिश्चितता का माहौल पैदा हुआ। इसके बाद परदे के पीछे भाजपा और पीडीपी के बातचीत शुरू हुई जिसमें पीडीपी अलगाववादियों से बातचीत के मुद्दे पर केंद्र की ओर से कोई संकेत चाहती थी। एनएचपीसी के दो प्रोजेक्टों डुलहस्ती और उड़ी की वापसी पर भी केंद्र फिलहाल सहमत नहीं है। इसलिए गतिरोध जारी रहा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed