{"_id":"fa3e7b51c21c151072421bd4e68150b0","slug":"bjp-uncomfortable-conditions-hindi-news","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"महबूबा की शर्तें बनी भाजपा के गले की फांस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महबूबा की शर्तें बनी भाजपा के गले की फांस
Updated Sun, 07 Feb 2016 12:24 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू-कश्मीर में नई सरकार के गठन में कई सियासी पेंच फंसे हैं। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती गठबंधन एजेंडे से अलग भी कुछ चाहती हैं जिसे मंजूर करना भाजपा के लिए मुश्किल हो रहा है।
पीडीपी अब विश्वास बहाली के नाम पर उन शर्तों को आगे कर रही है जो कभी पीडीपी-कांग्रेस के न्यूनतम साझा कार्यक्रम में शुमार थीं। वोट बैंक को साधने का पीडीपी का यह नुस्खा भाजपा के गले में अटक गया है। लिहाजा, रियासत में अभी राज्यपाल शासन के बने रहने के आसार हैं।
मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद महबूबा को अपने जनाधार का किला ढहता नजर आ रहा है। अनंतनाग और बिजबिहेड़ा जैसे दुर्ग में अवाम भाजपा से गठबंधन के खिलाफ रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पीडीपी अब विश्वास बहाली के नाम पर उन शर्तों को आगे कर रही है जो कभी पीडीपी-कांग्रेस के न्यूनतम साझा कार्यक्रम में शुमार थीं। वोट बैंक को साधने का पीडीपी का यह नुस्खा भाजपा के गले में अटक गया है। लिहाजा, रियासत में अभी राज्यपाल शासन के बने रहने के आसार हैं।
विज्ञापन
मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद महबूबा को अपने जनाधार का किला ढहता नजर आ रहा है। अनंतनाग और बिजबिहेड़ा जैसे दुर्ग में अवाम भाजपा से गठबंधन के खिलाफ रही है।
विज्ञापन
अपना वोट बैंक मजबूत करना चाहती हैं महबूबा
पीडीपी मानती है कि 10 महीने के शासनकाल में गठबंधन एजेंडे के तमाम बिन्दुओं पर कुछ काम नहीं हो पाया। इसलिए अब नए सिरे से कुछ हासिल करने की कोशिश हो रही है।
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती चाहती हैं कि वह अपने वोट बैंक को कुछ ठोस दिखा सकें और उसके आधार पर नई सरकार के गठन के लिए तर्क पेश करना आसान हो जाए।
पीडीपी ने जब कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई थी तब बिना ट्रायल लंबे समय से जेलों में बंद लोगों की रिहाई न्यूनतम साझा कार्यक्रम के तीसरे बिन्दु के रूप में दर्ज थी। भाजपा के साथ गठबंधन एजेंडे में इसे स्थान नहीं मिल पाया था।
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती चाहती हैं कि वह अपने वोट बैंक को कुछ ठोस दिखा सकें और उसके आधार पर नई सरकार के गठन के लिए तर्क पेश करना आसान हो जाए।
पीडीपी ने जब कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई थी तब बिना ट्रायल लंबे समय से जेलों में बंद लोगों की रिहाई न्यूनतम साझा कार्यक्रम के तीसरे बिन्दु के रूप में दर्ज थी। भाजपा के साथ गठबंधन एजेंडे में इसे स्थान नहीं मिल पाया था।
पत्थरबाजी के आरोप में गिरफ्तार लोगों की रिहाई चाहती है पीडीपी
सुरक्षा बलों के खिलाफ प्रदर्शनों में पत्थरबाजी के आरोप में गिरफ्तार लोगों की रिहाई, मानवाधिकार आयोग को मजबूत करने और अफस्पा को अपेक्षाकृत शांत क्षेत्र से हटाए जाने जैसे मुद्दे अब फिर से पीडीपी के एजेंडे पर हैं। इसे गले से उतार पाना भाजपा के लिए मुश्किल है।
भाजपा के सूत्रों के मुताबिक पीडीपी शर्तें थोपकर मामले को उलझा रही है। गठबंधन एजेंडा पहले से तय है और उस पर कायम रहने के लिए भाजपा प्रतिबद्ध है लेकिन नई शर्तें कबूल करना संभव नहीं होगा। अफस्पा को आंशिक तौर पर कुछ क्षेत्रों से हटाए जाने का मुद्दा एजेंडे में है लेकिन इसका फैसला स्थिति के अध्ययन के बाद सेना को करना है।
एनएचपीसी के दो प्रोजेक्टों को जम्मू-कश्मीर को वापस करने में कई तकनीकी दिक्कतें हैं। इसलिए इस पर जिद ठीक नहीं होगी। सेना और सुरक्षा बलों से कब्जे वाले भवनों और जमीन को खाली कराए जाने की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है।
भाजपा के सूत्रों के मुताबिक पीडीपी शर्तें थोपकर मामले को उलझा रही है। गठबंधन एजेंडा पहले से तय है और उस पर कायम रहने के लिए भाजपा प्रतिबद्ध है लेकिन नई शर्तें कबूल करना संभव नहीं होगा। अफस्पा को आंशिक तौर पर कुछ क्षेत्रों से हटाए जाने का मुद्दा एजेंडे में है लेकिन इसका फैसला स्थिति के अध्ययन के बाद सेना को करना है।
एनएचपीसी के दो प्रोजेक्टों को जम्मू-कश्मीर को वापस करने में कई तकनीकी दिक्कतें हैं। इसलिए इस पर जिद ठीक नहीं होगी। सेना और सुरक्षा बलों से कब्जे वाले भवनों और जमीन को खाली कराए जाने की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है।