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सोनिया के मास्टर स्ट्रोक से फेल हुई भाजपा की रणनीति

Sun, 08 Feb 2015 01:54 AM IST
Updated Sun, 08 Feb 2015 01:54 AM IST
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BJP's strategy failed to master stroke of Sonia Gandhi

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद की जीत से रियासत की सियासत की तस्वीर बदलने के संकेत मिले हैं। विधानसभा चुनाव में एक दूसरे के खिलाफ तलवार भांजने वाली कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस फिर से एकजुट हो गईं हैं। तीन अन्य विधायकों के इस पाले में आने से विपक्ष मजबूत होकर उभरा है।

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भाजपा और पीडीपी ने एक-दूसरे का तो सहयोग किया, लेकिन, अन्य श्रेणी के तीन विधायकों का समर्थन हासिल करने में विफल रहे। राज्यसभा चुनाव में दो सीटें हासिल कर पीडीपी ने बढ़त बनाई है।
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भाजपा के खाते में सिर्फ एक ही सीट आ पाई। चुनाव नतीजों के बाद नई सरकार के गठन की कोशिशें तेज हो गईं हैं। लेकिन, भाजपा-पीडीपी के विधिवत गठजोड़ से पहले ही नई चुनौतियां भी सामने आ गईं हैं।
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सोन‌िया ने बनाई थी आजाद को ज‌िताने की रणनीत‌ि

BJP's strategy failed to master stroke of Sonia Gandhi

पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद के बीच छत्तीस के रिश्ते की बुनियाद पर भाजपा-पीडीपी उत्साहित थी। भाजपा-पीडीपी ने सभी चार सीटों पर कब्जे के लिए अघोषित तालमेल किया तो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया सक्रिय हुईं।

उन्होंने उमर को बुलावा भेजा और आजाद के नाम पर सहमत कर लिया। कांग्रेस के साथ फिर से गठबंधन होने के बाद उत्साहित उमर ने उन सीटों पर दो उम्मीदवार खड़े कर दिए जहां भाजपा-पीडीपी की जीत निश्चित थी। यह सिर्फ प्रतीकात्मक विरोध था जिसने भाजपा-पीडीपी प्रत्याशियों की निर्विरोध जीत को असंभव बना दिया।

पहली और दूसरी सीट पर नेकां के प्रत्याशी पूर्व गृह राज्य मंत्री सज्जाद अहमद किचलू और नासिर असलम वानी हारे। तीसरी सीट पीडीपी ने निर्दलीय बकीर रिजवी के सहयोग से जीत ली, लेकिन, चौथी सीट पर भाजपा के चंद्र मोहन शर्मा आजाद से पिछड़ गए।

निर्दलीय इंजीनियर रशीद ने अंत तक बनाए रखा सस्पेंस

BJP's strategy failed to master stroke of Sonia Gandhi

भाजपा किसी भी तरह आजाद की राह रोकना चाहती थी, लेकिन, इसमें विफल हो गई। निर्दलीय इंजीनियर रशीद ने अंत तक सस्पेंस बनाए रखा और दोपहर बाद सार्वजनिक रूप से घोषणा करते हुए आजाद के पक्ष में मतदान किया। पीडीएफ के हकीन यासीन ने दो दिन पहले ही आजाद को वोट देने का ऐलान कर दिया था।

सीपीएम के एमवाई तारिगामी का स्टैंड भाजपा विरोधी होने के कारण पहले से जगजाहिर था। इस तिकड़ी ने आजाद की जीत को आसान बना दिया। पीपुल्स कांफ्रेंस के सज्जाद अहमद लोन और बशीर अहमद डार भाजपा के पक्ष में खड़े रहे और निर्दलीय पवन गुप्ता ने भी अपनी पुरानी पार्टी भाजपा का साथ दिया।

अब भाजपा-पीडीपी की गठबंधन सरकार बनने के बाद विधानसभा में नेकां, कांग्रेस और तीन अन्य विधायकों का 30 सदस्यीय विपक्ष आक्रामक भूमिका में नजर आ सकता है।

गुलाम नबी आजाद राज्यसभा में विपक्ष के नेता बने रहेंगे। विधानसभा चुनाव में सिर्फ 12 सीटें मिलने के बाद कांग्रेस के लिए आजाद को जिताना मुश्किल लग रहा था, लेकिन, नेकां के ईमानदार समर्थन और तीन अन्य विधायकों के सहयोग ने आजाद को विजयश्री दिला दी।

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