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बिना पाठ्यक्रम के चल रहा है साक्षर मिशन
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Sat, 28 Feb 2015 09:24 PM IST
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साक्षर भारत मिशन के लिए डाइट को अलग से पाठ्यक्रम तैयार करके ग्रामीणों का पढ़ाना था और फिर इसी पाठ्यक्रम के जरिये परीक्षाएं भी लेनी थीं, लेकिन जम्मू संभाग में साक्षर भारत मिशन के तहत बिना पाठ्यक्रम के ही ग्रामीणों को पढ़ाया जा रहा है और अब परीक्षाएं लेने की भी तैयारी की जा रही है। कई जिलों में तो अभी तक प्रेरक भी नियुक्त नहीं किए हैं।
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राज्य के दूरदराज ग्रामीण इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को अक्षर ज्ञान देने के लिए 2012 में केंद्र सरकार की तरफ से साक्षर भारत मिशन नाम की योजना को लागू करने की योजना तैयार की थी। इस पर काम शुरू करते दो वर्ष का समय लग गया।
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साक्षर भारत मिशन के तहत इसके लिए अलग से पाठ्यक्रम तैयार किया जाता है और इसी पाठ्यक्रम के जरिए ही ग्रामीणों को पढ़ाना था और परीक्षाएं भी ली जानी थी। जम्मू संभाग में दो वर्ष से लगातार इस पर काम किया जा रहा है, लेकिन अभी तक इसके लिए पाठ्यक्रम तैयार नहीं हो पाया है।
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15 मार्च से इनकी परीक्षाएं आरंभ करने की तैयारी चल रही है। जिस प्रकार साक्षर भारत मिशन पर काम किया जा रहा है, उससे तो यही लगता है कि इसको लेकर सिर्फ औपचारिकता पूरी की जा रही है।
केंद्र सरकार के निर्देश के अनुसार राज्य में साक्षर भारत मिशन को 2012-13 में पूरी तरह से लागू करके ग्रामीणों को अक्षरों का ज्ञान करवाना था। जबकि इसमें राज्य सरकार को कामयाबी नहीं मिल सकी।
अब केंद्र सरकार की तरफ से इसकी अवधि को 2017 तक बढ़ा दिया है। साक्षर भारत मिशन के तहत जम्मू संभाग के प्रत्येक जिले में शिक्षा विभाग को 60 लाख रुपये से ज्यादा राशि खर्च करके कामयाबी हासिल करने का लक्ष्य है।