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Jammu News: मंदी में भल्ला कारोबार, मजदूरी के लिए मजबूर कारोबारी

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Bhalla business in recession,
-दशकों से लोगों की पसंद थे सांबा के भल्ले, फास्ट फूड के प्रचलन और फ्लाईओवर बनने से कारोबार पर मंडराने लगा संकट
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विशाल जसरोटिया
सांबा। एक जमाना था जब सांबा के भल्ले (दाल वड़े) की पूरे प्रदेश और देश में अपने स्वाद और जायके के लिए मशहूर थे। जम्मू संभाग के अलावा अन्य राज्यों से आने वाले पर्यटक इनका स्वाद चखकर ही यहां से जाते थे। अब यह कारोबार मंदी से गुजर रहा है। कारोबारी व कारीगर मजदूरी के लिए मजबूर हो रहे हैं।
फास्ट फूड के प्रचलन के चलते दशकों पुराने इस कारोबार पर संकट मंडराने लगा है। फ्लाईओवर के निर्माण से शहर का संपर्क कटने के कारण भी पर्यटक शहर में न आते हैं, जिससे भी कारोबार प्रभावित हुआ है। इससे कारोबार से जुड़े कई लोग मजदूरी या फैक्टरियों में काम के लिए मजबूर हो गए हैं। भल्लों के कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि सांबा में पहले लगभग 100 से अधिक लोग इस व्यवसाय से जुड़े थे। अब 15 से 20 लोग ही इस कारोबार को कर रहे हैं।
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परिवार का गुजारा करना हो गया है मुश्किल
सुरिंदर कुमार ने बताया कि सांबा के भल्ले पूरे जम्मू-कश्मीर और अन्य राज्यों में मशहूर थे। उनके परिवार की तीन पीढ़ियां इस कारोबार को करती आई हैं। पहले दादा और पिता यह कारोबार करते थे। अब 20 वर्ष से वह कर रहे हैं। कुछ वर्षों से फ्लाईओवर निर्माण के बाद पर्यटकों के शहर से न गुजरने के कारण व्यापार ठप हो गया है। इससे परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो गया है।
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सरकार से व्यवसाय को नहीं मिला प्रोत्साहन
25 वर्षों से भल्लों का व्यवसाय कर रहे अनिल कुमार ने बताया कि पहले तीन दुकानें खोली थीं। फास्ट फूड के प्रचलन और पर्यटकों का फ्लाईओवर से गुजर जाने के कारोबार पर बुरा असर पड़ा है। पहले सांबा में करीब 100 भल्लों की दुकानें थीं। अब 15-20 रह गई हैं। लोग यह व्यवसाय छोड़ मजदूरी और फैक्टरियों में काम करने को मजबूर हैं। सरकार से भी स्थानीय व्यवसाय को प्रोत्साहन नहीं मिला है।

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ऐसे बनाए जाते हैं भल्ले
भल्ले बनाने के लिए रातभर चने की दाल को भिगोकर रखा जाता है। सुबह उसे सिलबट्टे में पीसकर देशी मसाले मिलाकर उसके पेड़े बनाए जाते हैं। फिर फ्राई कर मूली, अनारदाना और इमली की चटनी के साथ परोसा जाता है।

फोटो-सांबा में भल्लों की दुकान सजाकर ग्राहकों का इंतजार करता दुकानदार।
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