चोरी के बच्चों से चल रहा है भीख मांगने का धंधा!
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बच्चों से भीख मंगवाने का धंधा शहर में खूब फलफूल रहा है। भीख मांगने वाले इन बच्चों में अधिकतर बाहरी राज्यों के हैं, जिन्हें न तो अपने मां-बाप के नाम का पता है और न ही गांव-कसबे का। यहां तक कि इनसे मजदूरी भी कराई जा रही है। इन बच्चों को दूर के राज्यों से चुराकर लाए जाने की बात कही जा रही है।
शहर के किसी चौक-चौराहे, बस अड्डे या रेलवे स्टेशन पर नजर दौड़ाएं तो बड़ी संख्या में चार से दस साल तक के इन बच्चों को भीख मांगते आसानी से देखा जा सकता है। चार साल से कम उम्र के बच्चों को गोद में लिए कई महिलाएं भी भीख मांगती देखी जा सकती हैं।
अचंभे की बात तो यह भी है कि ट्रैफिक कर्मचारियों और पुलिस की नाक के नीचे भीख मंगवाने का धंधा जोरों पर चल रहा है। पुलिस या यातायात कर्मी भीख मांगते किसी बच्चे से उसकी पहचान या अन्य पूछताछ करने की कोशिश भी नहीं करते। इनके सरगना कौन हैं इन पर पुलिस नहीं पहुंच पा रही है।
कई बच्चों को अपने मां-बाप का नाम भी नहीं मालूम
अपने मां-बाप तक का नाम नहीं जानने वाले इन बच्चों को सिर्फ इतना ही पता है कि उन्हें भीख मांगनी है और शाम को कोई उनके पास आएगा और दिन भर में जुटाए गए सारे पैसे उसको दे देने हैं। सवाल उठ रहा है कि यह बच्चे कहां से लाए गए हैं, इन्हें कौन लाया है और इन्हें क्यों लाया है।
सूत्रों के अनुसार भीख मंगवाने के लिए बच्चों को बाहरी राज्यों से चुरा कर लाया जा रहा है। जम्मू में आने वाली बाहरी राज्यों की ट्रेनों से यह बच्चे जम्मू पहुंच रहे हैं। यहां लाने के बाद उनको भीख मांगने की जगह बता जाती हैं।
शहर के किसी भी चौराहे पर जैसे ही रेड सिगनल होता है, भीख मांगने वाले ये बच्चे वाहनों को घेर लेते हैं। चार पहिया वाहन इनकी नजर में सबसे पहले होते हैं, इस उम्मीद में कि वहां से अधिक पैसे मिल सकेंगे। चार पहिया वाहन चालकों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए ये बच्चे पायदान पर चढ़ जाते हैं और जब तक पैसे नहीं मिलते तब तक वह पीछे हटने की नहीं सोचते।