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पर्यावरण में घुलते जहर पर रोक के लिए न चलाएं पटाखे
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प्रदूषण की बढ़ती समस्या को देखते हुए युवा स्कॉलर्स ने भी प्रदेशवासियों को इको फ्रेंडली दिवाली मनाने का संदेश दिया। प्रदूषण कोविड मरीजों के साथ स्वस्थ मनुष्य के लिए बड़ा खतरा है। मेट्रो शहर प्रदूषण का दंश झेल रहे हैं। इस पर नियंत्रण के लिए समय रहते जागरूक होने की जरूरत है।
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हमें इको फ्रेंडली दिवाली को बढ़ावा देने की जरूरत है। दिवाली पर अब हमें पटाखों की जगह एक दीप अधिक जलाने की परंपरा को शुरू करना होगा, ताकि पर्यावरण में घुल रहे जहर को कम किया जा सके। दीप हमारी संस्कृति की पहचान हैं। दिवाली पर्व को पटाखों के साथ जोड़ना उचित नहीं। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की शिक्षा हमें प्रकृति से प्रेम करने का संदेश देती है।
- लक्ष्मी, स्कॉलर, जम्मू यूनिवर्सिटी।
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बढ़ते प्रदूषण से बच्चों में जागरूकता लाने की जरूरत है। उन्हें बचपन से ही पटाखे नहीं चलाने के लिए प्रेरित करने और इससे होने वाले नुकसान के बारे में बताना होगा। प्रदूषण बड़ी समस्या बनता जा रहा है, जिसके खिलाफ अब सबको सहयोग देना होगा। दिवाली प्रेम का पर्व है और प्रकृति हमें प्रेम करना सिखाती है। ऐसे में हमें प्रकृति को क्षति पहुंचाने वाले पटाखों नहीं चलाने चाहिए।
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सीमा देवी, स्कॉलर, जम्मू यूनिवर्सिटी
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दिवाली खुशियां बांटने का त्योहार है और खुशियां पर्यावरण को प्रदूषित करने नहीं मनाई जाती हैं। दिवाली पर हमें दीए जलाने की संस्कृति को अपनाना होगा। पटाखों से प्रदूषण बढ़ता है, जो सभी के लिए हानिकारक है। हमें एक जागरूक और शिक्षित समाज की तरह सोचना होगा कि हम पर्यावरण संरक्षण के लिए क्या कर रहे हैं। दिवाली को इको फ्रेंडली मनाकर हमें पर्यावरण संरक्षण में सहयोग देना होगा।
संतोष, स्कॉलर, जम्मू यूनिवर्सिटी
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इको फ्रेंडली हमारे व्यवहार में शामिल होना चाहिए। पर्यावरण के प्रति हमें सोच में बदलाव लाने की जरूरत है। दिवाली पर हम जरूरत से ज्यादा पटाखे चलाते हैं, जिसे हमें बदलना होगा। प्रदूषण के प्रमुख कारणों में पटाखों से निकालने वाला धुआं भी शामिल है। पटाखे तो वायु प्रदूषण के साथ ध्वनि प्रदूषण का भी कारण हैं। स्वच्छ पर्यावरण के लिए हमें जागरूक होना होगा।
सपना वर्मा, स्कॉलर, जम्मू यूनिवर्सिटी
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हमें इको फ्रेंडली दिवाली को बढ़ावा देने की जरूरत है। दिवाली पर अब हमें पटाखों की जगह एक दीप अधिक जलाने की परंपरा को शुरू करना होगा, ताकि पर्यावरण में घुल रहे जहर को कम किया जा सके। दीप हमारी संस्कृति की पहचान हैं। दिवाली पर्व को पटाखों के साथ जोड़ना उचित नहीं। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की शिक्षा हमें प्रकृति से प्रेम करने का संदेश देती है।
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- लक्ष्मी, स्कॉलर, जम्मू यूनिवर्सिटी।
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बढ़ते प्रदूषण से बच्चों में जागरूकता लाने की जरूरत है। उन्हें बचपन से ही पटाखे नहीं चलाने के लिए प्रेरित करने और इससे होने वाले नुकसान के बारे में बताना होगा। प्रदूषण बड़ी समस्या बनता जा रहा है, जिसके खिलाफ अब सबको सहयोग देना होगा। दिवाली प्रेम का पर्व है और प्रकृति हमें प्रेम करना सिखाती है। ऐसे में हमें प्रकृति को क्षति पहुंचाने वाले पटाखों नहीं चलाने चाहिए।
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सीमा देवी, स्कॉलर, जम्मू यूनिवर्सिटी
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दिवाली खुशियां बांटने का त्योहार है और खुशियां पर्यावरण को प्रदूषित करने नहीं मनाई जाती हैं। दिवाली पर हमें दीए जलाने की संस्कृति को अपनाना होगा। पटाखों से प्रदूषण बढ़ता है, जो सभी के लिए हानिकारक है। हमें एक जागरूक और शिक्षित समाज की तरह सोचना होगा कि हम पर्यावरण संरक्षण के लिए क्या कर रहे हैं। दिवाली को इको फ्रेंडली मनाकर हमें पर्यावरण संरक्षण में सहयोग देना होगा।
संतोष, स्कॉलर, जम्मू यूनिवर्सिटी
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इको फ्रेंडली हमारे व्यवहार में शामिल होना चाहिए। पर्यावरण के प्रति हमें सोच में बदलाव लाने की जरूरत है। दिवाली पर हम जरूरत से ज्यादा पटाखे चलाते हैं, जिसे हमें बदलना होगा। प्रदूषण के प्रमुख कारणों में पटाखों से निकालने वाला धुआं भी शामिल है। पटाखे तो वायु प्रदूषण के साथ ध्वनि प्रदूषण का भी कारण हैं। स्वच्छ पर्यावरण के लिए हमें जागरूक होना होगा।
सपना वर्मा, स्कॉलर, जम्मू यूनिवर्सिटी