पांपोर हमले में सेना ने बचाया था हिजबुल प्रमुख के बेटे को
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पिछले सप्ताह पांपोर में हुए आतंकी हमले में ईडीआई की बिल्डिंग में फंसे 100 लोगों में हिजबुल प्रमुख सलाहुद्दीन का बेटा भी शामिल था। जिसे सेना के जवानों ने सुरक्षित बाहर निकाला था।
पंपोर के इंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (ईडीआई) परिसर में हुए हमले में जहां पांच जवान शहीद हुए थे। तीन दिन तक चली मुठभेड़ में सेना ने तीन आतंकियों को मार गिराया था। हमले के बाद हिजबुल प्रमुख सलाहुद्दीन ने आतंकियों की वाहवाही की थी और इस तरह के हमलों की चेतावनी भी दी थी।
एक अंग्रेजी वेबसाइट की खबर के मुताबिक सलाहुद्दीन का पुत्र सैयद मुईन ईडीआई ऑफिस में फंस गया था। वह यहां आईटी मैनेजर के तौर पर काम करता है। मुईन, सलाहुद्दीन के तीन बेटों में से एक है। पुलिस के मुताबिक, उसका किसी आतंकी संगठन से संबंध नहीं है।
हालांकि खबर आ रही है कि हमले के बाद उससे पूछताछ की गई है। श्रीनगर में छह साल में किया गया यह सबसे बड़ा फिदायीन हमला है। पुलिस का मानना है कि सुरक्षा बलों के काफिले पर हमला करने के बाद परिसर में दाखिल हुए आतंकी, पाकिस्तान स्थित संगठन लश्कर-ए-तैयबा से संबंधित थे।
हमले के वक्त नमाज पढ़ रहा था सैयद मुईन
सैयद सलाहुद्दीन पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में रहता है और जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों के खिलाफ अधिकतर आतंकी हमले करवाने का आरोपी है। फिलहाल वह यूनाईटेड जिहाद कौंसिल नाम के संगठन के नाम से भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है।
जिस समय सरकारी भवन पर आतंकी हमला हुआ था उस वक्त सैयद मुईन पहली मंजिल पर मौजूद था और नवाज पढ़ था। जैसे ही आतंकी इमारत में घुसे अंदर अफरा-तफरी मच गई। सैयद मुईन ने भी बीच में नवाज छोड़ दी और लोगों के साथ बिल्डिंग से भाग निकला।
तीनों बेटों ने पिता की गतिविधियों से खुद को दूर रहा है। सलाहुद्दीन का एक बेटा डॉक्टर और एक मेडिकल असिस्टेंट है।