जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नगरोटा स्थित व्हाइट नाइट कोर के परिसर में शहीद दिवस की सुबह से ही चहल-पहल थी। अफसरों की गाड़ियां अश्वमेध शौर्य स्थल की ओर दौड़ती नजर आईं।
मौका था कारगिल दिवस की 15वीं वर्षगांठ के मौके पर उन जांबाज अफसरों, जेसीओ और जवानों को श्रद्धांजलि देने का, जिन्होंने 15 साल पहले अपनी जान की कुर्बानी देकर दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए थे।
खासकर बैंड की धुन के साथ जब शौर्य स्थल पर जांबाजों को पुष्प अर्पित किए गए तो वहां उपस्थित हर जवान के चेहरे पर गर्व नजर आया।
...कारगिल पर फतह पाई
इस मौके पर व्हाइट नाइट कोर के जनरल आफिसर कमांडिंग (जीओसी) लेफ्टिनेंट जनरल केएच सिंह विशेष तौर पर पहुंचे।
जनरल सिंह ने कारगिल के जांबाज हीरो की कुर्बानियों को याद करते हुए कहा कि पाकिस्तान के खिलाफ मिली जीत में उनका योगदान अतुलनीय है।
उन्होंने जिन कठिन परिस्थितियों में अपनी जान की परवाह न करते हुए दुश्मनों को वापस भेज कारगिल पर फतह पाई, उन्हें देश हमेशा सम्मान के साथ याद करता रहेगा। जवानों से अपील की कि वतन के प्रति अपनी ड्यूटी का पूरी निष्ठा के साथ निर्वाह करें।
1900 किमी सफर कर किया शहीदों को नमन
जम्मू से पांच युवाओं ने कारगिल के शहीदों को नमन करने के लिए 1900 किलोमीटर का सफर सड़क मार्ग से तय किया। इसमें दो मोटरसाइकिल और एक स्कूटर से यह सफर तय किया गया।
वेंडर यूनियन के प्रधान आनंद शर्मा के अनुसार दल ने गत 17-22 जुलाई तक जम्मू से मनाली, सरचू (लेह के बीच), लेह, कारगिल, द्रास, बालटाल और वापस जम्मू में सड़क मार्ग से सफर किया।
इसमें बाबा बर्फानी के दर्शन करके शहीदों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना भी की गई। इससे पूर्व वर्ष 2004 में भी दल ने कई सौ किलोमीटर का सफर सड़क मार्ग से तय किया था।
शहीदों की याद में द्रास में कार्यक्रम
15 साल पहले 1999 में आज ही के दिन भारतीय सेना ने 73 दिन लंबी लड़ी लड़ाई में पाकिस्तान की सेना को धूल चटाते हुए उनको कारगिल से खदेड़ दिया था और इस जीत को याद करने के लिए भारत में यह दिन विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है।
इस मौके द्रास सेक्टर में शहीदों के स्मारक पर उत्तरी कमान के सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा ने श्रद्धासुमल अर्पित किए, जबकि शुक्रवार को सेना अध्यक्ष जनरल बिक्रम सिंह ने यहां आकर शहीदों का श्रद्धांजलि पेश की थी।
'कभी नहीं भूलना सैनिकों की शहादत'
जनरल हुड्डा ने शहीदों का श्रद्धांजलि देने के बाद वहां उपस्थित उनके संबधियों से बातचीत की।
उन्होंने कारगिल युद्ध में भाग लेने पर वाले सैनिकों से भी बातचीत की। इस अवसर पर वहां मौजूद पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने देश के लिए कुर्बान हुए सैनिकों की शहादत को कभी नहीं भूलने वाला बताया।
उन्होंने कार्यक्रम में भाग लेने वालों के साथ-साथ पत्रकारों द्वारा इस कार्यक्रम को कवर करने के लिए उनका धन्ववाद किया।