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जम्मू-कश्मीर: अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाईवे पर गश्त कर रही सेना, अत्याधुनिक उपकरणों से लैस हैं जवान
Sat, 08 Jul 2023 01:47 PM IST
विमल शर्मा
एजेंसी, जम्मू
एजेंसी, जम्मू
Published by: विमल शर्मा
Updated Sat, 08 Jul 2023 01:47 PM IST
सार
सेना तीर्थयात्रियों को बेहतर सुरक्षा देने के लिए जम्मू से पवित्र गुफा तक के मार्ग की नियमित जांच करती है। इसका मकसद आतंकवादियों के तीर्थयात्रियों के काफिले को निशाना बनाने से पहले ही उसे नाकाम करना है।
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बालटाल बैंस कैंप की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाबल
- फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
सेना ने अमरनाथ यात्रियों को बेहतर सुरक्षा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। यात्रा वाहनों को सुरक्षित पहुंचाने के लिए सेना जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर ड्रोन समेत खोजी कुत्तों के साथ रोजाना गश्त कर रही है। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि एक जुलाई से 62 दिनों तक चलने वाली तीर्थयात्रा को सुविधाजनक और किसी भी घटना से निपटने के लिए मल्टी लेयर सिक्योरिटी उपलब्ध करवाई जा रही है।
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वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी के अनुसार सेना तीर्थयात्रियों को बेहतर सुरक्षा प्रदान करते हुए जम्मू से बनिहाल और उससे आगे पूरे मार्ग की गहनता से जांच करते हुए नियमित गश्त करती है। इसका मकसद आतंकवादियों के राष्ट्रीय राजमार्ग पर तीर्थयात्रियों के काफिले को निशाना बनाने से पहले ही उसे नाकाम करना है।
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अधिकारियों ने कहा कि ड्रोन, मेटल डिटेक्टर और निगरानी उपकरणों और खोजी कुत्तों जैसे अत्याधुनिक उपकरणों से लैस जवान राजमार्ग और उससे लगे इलाकों की सावधानीपूर्वक जांच करते हैं। इसके अलावा उत्तरी सेना के कमांडर और कोर कमांडर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए नियमित रूप से जमीनी स्थिति का आकलन करते हैं।
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अक्सर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में इस प्रकार के प्रयास तीर्थयात्रियों को बेहतर सुरक्षा देने में महत्वपूर्ण होते हैं। दक्षिण कश्मीर के 3888 मीटर ऊंचे पवित्र अमरनाथ गुफा की 62 दिवसीय वार्षिक तीर्थयात्रा एक जुलाई को अनंतनाग जिले के पहलगाम और गांदरबल जिले के बालटाल से शुरू हुई।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। अब तक सात जत्थों में कुल 43833 तीर्थयात्री जम्मू बेस कैंप से घाटी की ओर प्रस्थान कर चुके हैं। 86000 से अधिक श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं और यात्रा 31 अगस्त को समाप्त होने वाली है।
अधिकारियों ने कहा कि अमरनाथ यात्रा दुनिया भर से आए भक्तों को आकर्षित करने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती है। इससे यात्रा स्थल में पकड़ने वाले गांवों के साथ जम्मू-कश्मीर के बड़े शहरों को भी लाभ होता है।