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जम्मू-कश्मीर में शाह का दौरा: पहाड़ों पर सियासत की नई तस्वीर उकेर गए गृह मंत्री

Wed, 05 Oct 2022 12:36 PM IST
kumar गुलशन कुमार ओमपाल संब्याल, जम्मू
ओमपाल संब्याल, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Wed, 05 Oct 2022 12:36 PM IST
सार

केंद्रीय गृह मंत्री के बयान से गुज्जर-बक्करवाल बनाम पहाड़ी भाषियों में तनाव की लहर थमी है। अब एसटी दर्जा हासिल समुदायों के हक छेड़े बिना आरक्षण के फार्मूले पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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amit Shah visit to Jammu and Kashmir engraved a new picture of politics in valley
Amit Shah in Rajouri - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे से जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी बाशिंदे सियासत का नया केंद्र बन गए हैं। जस्टिस जीडी शर्मा कमीशन की रिपोर्ट का हवाला देकर गृह मंत्री ने न सिर्फ पहाड़ी भाषी आबादी को आरक्षण देने का एलान किया, बल्कि अनुसूचित जनजाति श्रेणी में 10 फीसदी आरक्षण का लाभ ले रहे गुज्जर-बक्करवाल समुदायों की शंकाओं को भी दूर कर दिया। 

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एसटी वर्ग के समुदायों का हक छीने बिना पहाड़ियों को आरक्षण देने की घोषणा से गुज्जर-बक्करवाल बनाम पहाड़ी समुदाय के बीच तनाव और अंतर्विरोध की लहर पर विराम लग गया है। अब सबकी नजरें कमीशन की सिफारिशों और उसके अमल पर है।
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दरअसल, गुज्जर-बक्करवाल समुदाय को वर्ष 1991 में अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया गया था। पहाड़ी भाषियों के लिए की गई एसटी दर्जे की सिफारिश खारिज कर दी गई। पहाड़ी भाषी 1972 से यह मांग उठाने का दावा करते हैं, लेकिन 1991 के बाद इस मांग ने जोर पकड़ा। वर्ष 2000 और वर्ष 2002 में भेजे गए प्रस्ताव केंद्र ने खारिज कर दिए थे। मुफ्ती सरकार ने पहाड़ियों को पक्ष में करने के लिए 2004 में प्रस्ताव भेजा, जिसे मंजूरी नहीं मिली। इस तरह से दर्जनों प्रस्ताव भेजे गए जो सिरे नहीं चढ़े। अनुच्छेद 370 हटने के बाद इस मुद्दे को भाजपा ने लपका और इसके लिए माहौल बनाना शुरू कर दिया। 
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सर्वे में 8.16 फीसदी आबादी

पहाड़ी भाषी विकास सलाहकार बोर्ड की फरवरी 2018 में प्रकाशित सर्वे रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 8.16 फीसदी आबादी पहाड़ी बोलते हैं। इस सर्वे में पहाड़ियों की आबादी 10,22,982 पाई गई। हालांकि पहाड़ी भाषी समुदाय की सबसे पुरानी पंजीकृत संस्था जम्मू-कश्मीर पहाड़ी पीपल मूवमेंट का दावा है कि जम्मू-कश्मीर में पहाड़ियों की आबादी का सही आंकड़ा 14 लाख से अधिक है।

पहाड़ी भाषियों को गुज्जर-बक्करवाल समुदाय के एसटी दर्र्जे में शामिल करने की मांग और आश्वासन से कई तरह की शंकाएं थीं। गृह मंत्री का बयान बेहद संतुलित और दोनों पक्षों को आश्वस्त करने वाला है। प्रदेश की आबादी में 12.9 फीसदी हिस्सा रखने वाले गुज्जर-बक्करवाल को गृह मंत्री के बयान से एक तरह की राहत मिली है। - डॉ. जावेद राही, शोधकर्ता, गुज्जर-बक्करवाल मामले।

उम्मीद के अनुरूप घोषणा हुई है। प्रदेश में पहाड़ी भाषियों की वास्तविक आबादी 14 लाख से अधिक है। एसटी दर्जे की मांग 1972 से उठाई जा रही है। यह घोषणा आने वाले दिनों में सियासत को भी बड़े स्तर पर प्रभावित करेगी। - शहबाज खान, चेयरमैन, जम्मू-कश्मीर पहाड़ी पीपल मूवमेंट।

गृह मंत्री की रैली में उमडे़ जनसैलाब में भाजपा का पारंपरिक कैडर मुश्किल से 10 फीसदी भी नहीं होगा। पहाड़ी कबीला हिंदू-मुस्लिम से लेकर तमाम समुदायों को इस मुद्दे एकजुट कर चुका है। यकीन है कि पहाड़ियों को इंसाफ मिलेगा। - एहसान मिर्जा, कार्यकारी सदस्य, पहाड़ी ट्राइब एसटी फोरम।


बड़ा असर डालेगी पहचान की सियासत

पहले जम्मू संभाग में डोगरा और फिर पहाड़ी भाषी आबादी को लेकर पहचान की राजनीति का आने वाले दिनों व्यापक असर पड़ेगा। हालांकि अभी यह कहना मुश्किल होगा कि पहाड़ी भाषियों को चिह्नित करने का पैमाना और उन्हें आरक्षण के दायरे में लाने का आधार क्या होगा। क्योंकि अभी तक मामला कमीशन की रिपोर्ट तक सीमित है। क्या सिफारिशें होंगी और किस आधार पर होंगी, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। - प्रो. एलोरा पुरी, विशेषज्ञ आइडेंटिटी पॉलिटिक्स, जम्मू विश्वविद्यालय।

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