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अमरनाथ यात्रा 2023: सुगम, सुरक्षित ट्रैक देख भक्त बोले- पहली बार यात्रा का हो रहा अलग अहसास
Fri, 07 Jul 2023 03:59 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Fri, 07 Jul 2023 03:59 PM IST
सार
बालटाल से अमरनाथ गुफा तक का पारंपरिक 14 किलोमीटर लंबा ट्रैक, जो काफी तंग और खतरनाक था, खराब मौसम के कारण और भी खराब हो गया था। बीकन और बीआरओ ने बालटाल बेस कैंप से अमरनाथ जी की पवित्र गुफा तक रास्ते को सुगम बनाकर तीर्थयात्रियों का दिल जीत लिया है।
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Amarnath Yatra 2023
- फोटो : एजेंसी
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विस्तार
अमरनाथ यात्रा शुरू होने से पहले प्रदेश के अधिकारियों ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को पवित्र गुफा के ऊपरी हिस्से से बर्फ हटाने और यात्रियों की आवाजाही के लिए इसके आसपास के इलाकों को साफ करने का निर्देश दिया था। मार्ग की देखभाल की जिम्मेदारी भी बीआरओ को सौंपी गई है। प्रोजेक्ट बीकन के तहत 32 बीआरटीएफ के अनुभवी इंजीनियरों ने मजबूत हैंडल और सुरक्षा कार्यों के साथ ट्रैक को चौड़ा और सुरक्षित बनाने के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत की है।
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बालटाल से अमरनाथ गुफा तक का पारंपरिक 14 किलोमीटर लंबा ट्रैक, जो काफी तंग और खतरनाक था, खराब मौसम के कारण और भी खराब हो गया था। बीकन और बीआरओ ने बालटाल बेस कैंप से अमरनाथ जी की पवित्र गुफा तक रास्ते को सुगम बनाकर तीर्थयात्रियों का दिल जीत लिया है। यह पहली बार है कि आरएंडबी कश्मीर विभाग के बजाय अब सारा काम सीमा सड़क संगठन प्रोजेक्ट बीकन के नियंत्रण में है।
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हालांकि पिछले साल हुई बादल फटने की घटना को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने इस बार महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए यह कार्य बीआरओ को सौंप दिया। दिल्ली से आए सुभाष गोयल ने कहा कि वह सात वर्षों से यात्रा पर आ रहे हैं। इस बार का ट्रैक काफी सुगम है। ट्रैक की चौड़ाई बढ़ने और साइड में रेलिंग लगने से यात्रा सुरक्षित हो गई है। इसका सारा श्रेय बीआरओ को जाता है। इस बीच एक अन्य यात्री प्रतीक ने कहा कि पहले दोमेल की चढ़ाई पर काफी पत्थर होते थे।
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छोटे ट्रैक की वजह से दुर्घटना की आशंका बनी रहती थी। इस बार ट्रैक काफी अच्छा है। प्रशासन के साथ-साथ जवानों ने बेहतर कार्य किया है।
सीआरपीएफ की मोबाइल मेडिकल टीम ने बचाई महिला यात्री की जान
रामबन के चंद्रकोट क्षेत्र में एक अमरनाथ यात्री की सीआरपीएफ ने जान बचाई। गुजरात के सूरत की रहने वाली विमला अपने पति के साथ अमरनाथ यात्री बस में सवार थी। अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई। इस दौरान सीआरपीएफ की 84 बटालियन की मोबाइल मेडिकल टीम डाॅ. अनु गोर्के के नेतृत्व में उक्त बस में पहुंची। उन्होंने महिला की जांच की। पता चला कि बीपी और शूगर दोनों काफी बढ़ चुका है। इसके बाद प्राथमिक उपचार दिया गया। बाद में महिला को रामबन के जिला अस्पताल में सीआरपीएफ एंबुलेंस की मदद से शिफ्ट किया गया। महिला की हालत अब स्थिर है। यह भी जांच में आया कि महिला को हार्ट अटैक आया था। संवाद
पंजीकरण के इंतजार में बिगड़ रहा भक्तों का बजट
अमरनाथ यात्रा के लिए जम्मू पहुंच रहे यात्री टोकन और पंजीकरण की तिथि के बीच के अंतराल को लेकर परेशान हैं। एक तरफ जहां लंबी कतार में लगने के बाद टोकन मिल रहा है, तो वहीं उसके बाद पंजीकरण के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इससे भक्तों का बजट बिगड़ रहा हे। रेलवे स्टेशन स्थित सरस्वती धाम से टोकन लेने के बाद यात्रियों को छह से सात दिन बाद पंजीकरण की तिथि मिल रही है। इससे यात्री परेशान हो रहे हैं। उनका है कि यात्रा के लिए घर से जो बजट बनाकर आए थे, वह बिगड़ रहा है। यूपी के मैनपुरी से जम्मू पहुंचे लक्ष्मी नारायण वर्मा ने वीरवार को टोकन लिया।
उन्होंने बताया कि उन्हें पंजीकरण के लिए 11 जुलाई का समय दिया गया है। उन्होंने कहा कि पहले भी छह बार यात्रा की है, लेकिन ऐसी समस्या पहली बार आ रही है। टोकन कटाने के बाद पंजीकरण के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। अब यहां रूकने की वजह से बजट बिगड़ रहा है। वहीं, राजवीर सक्सेना ने कहा कि टोकन लेने के बाद पंजीकरण के लिए छह से सात दिन इंतजार करना पड़ रहा है। सही जानकारी भी नहीं मिल पा रही है। कोई जानकारी देने वाला दिखाई नहीं देता है। घर से दस हजार रुपये लेकर यात्रा के लिए निकले थे। एक अन्य श्रद्धालु रोहित कुमार कहते हैं कि हम घर से यह सोचकर चले थे कि यहां आने के बाद जल्दी पंजीकरण हो जाएगा। पहले कभी ऐसी असुविधा नहीं हुई।