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#हिंदीहैंहमः लेखक और छात्र बोले- राजभाषा का दर्जा मिलने से हिंदी से जुड़ेगी युवा पीढ़ी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Sat, 05 Sep 2020 12:54 PM IST
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हिंदी हैं हम - फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश में हिंदी भाषा बोली जा रही है। अब आधिकारिक भाषा का दर्जा मिलने से इसे और प्रोत्साहन मिलेगा। शहर के लेखक और छात्र वर्ग ने हिंदी के प्रचार और प्रसार के लिए स्कूलों के साथ घरों में भी माहौल बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधिकारिक भाषा बनने से हिंदी रोजगार से जुड़ेगी। इससे युवाओं का रुझान बढ़ेगा। सरकारी कार्यालयों में हिंदी में काम होने से आम जन को भी लाभ होगा। प्रदेश के साहित्य का स्तर और भी बेहतर होगा।

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प्रदेश में हिंदी के प्रचार और प्रसार के लिए बहुत सी साहित्यक संस्थाएं काम कर रही हैं। लोग भी आम बोलचाल में हिंदी का इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन हिंदी भाषी प्रदेशों की तुलना में यहां के साहित्य में शब्दावली आकर्षक नहीं है। शुद्ध हिंदी के शब्दों की कमी दिखती है। अब हिंदी को आधिकारिक भाषा का दर्जा मिल गया है। इससे साहित्य का स्तर और भी बेहतर होने ही उम्मीद है। शिक्षण संस्थानों में भी हिंदी के प्रति माहौल बनाना होगा। भाषा के उच्चारण और व्याकरण पर ध्यान देना होगा। - अनिला सिंह चाढ़क, लेखिका


आधिकारिक भाषा का दर्जा मिलने के बाद युवा पीढ़ी भी हिंदी से जुड़ेगी। सरकारी कार्यालयों में किए जाने वाले कार्य भी हिंदी में हो सकेंगे, जिससे आम लोगों को लाभ होगा। स्कूल और विश्वविद्यालय स्तर पर हिंदी भाषा पर अधिक ध्यान दिया जाएगा। हिंदी को लेकर बनी धारणा में भी बदलाव होने से प्रदेश में उर्दू और अंग्रेजी का वर्चस्व कम होगा। हिंदी भाषा के प्रचार और प्रसार के लिए लोगों को भी जिम्मेवारी निभानी होगी। इसकी शुरूआत अपने घर से करनी होगी। - अमिता मेहता, लेखिका

हिंदी को प्रदेश की आधिकारिक भाषा का दर्जा देना स्वागत योग्य है। इस फैसले से प्रदेश में अब हिंदी भाषा को उचित स्थान मिल सकेगा। हिंदी हमारी मातृ भाषा है। इसे बोलने और लिखने में हमें गर्व महसूस होना चाहिए। हिंदी के साहित्य के प्रति बच्चों को जागरूक करने की जरूरत है। वर्तमान में हम विदेशी भाषा को सीखने की होड़ में अपनी राष्ट्र भाषा से दूर होते जा रहे हैं। आधिकारिक भाषा का दर्जा मिलने से हिंदी के शोधार्थी और छात्रों में रोजगार मिलने की उम्मीद भी बढ़ी है। - सपना वर्मा, शोधार्थी, जम्मू यूनिवर्सिटी
 

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