{"_id":"623f6213aec95552e67ef938","slug":"agriculture-rspura-news-jmu2565318160","type":"story","status":"publish","title_hn":"अरनिया में अभी भी कई नहरों में शुरू नही हो सकी सफाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अरनिया में अभी भी कई नहरों में शुरू नही हो सकी सफाई
विज्ञापन
अरनिया में नहर के आसपास उगी झाड़ियां।
अरनिया। भले ही राज्य प्रशासन की तरफ से इस बार एक अप्रैल से नहरों में जलापूर्ति बहाल करने का दावा किया गया है। मगर जमीनी हकीकत को देखते हुए एक अप्रैल तो दूर 30 अप्रैल तक भी क्षेत्र के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाना लगभग असंभव दिख रहा है। इसका कारण अभी तक आधी से भी अधिक क्षेत्र की नहरों में सफाई कार्य शुरू न होना माना जा रहा है।
किसान यशपाल, गोपाल दास, चैन सिंह, बबली चाढ़क, रघुवीर सिंह, बाबू राम व शमशेर सिंह आदि क्षेत्र के किसानों का कहना है कि इसी 23 मार्च को डिवकॉम डॉक्टर राघव लंगर ने नहर व बाढ़ नियंत्रण विभाग के मुख्य अभियंता हिमेश मनचंदा सहित पूरे अमले के साथ दौरा कर क्षेत्र की नहरों का निरीक्षण किया था। दावा किया गया था कि 31 मार्च तक रण्वीर नहर सहित अन्य सभी माइनर नहरों की डीसिल्टिंग को संपन्न करके एक अप्रैल को नहरों में जलापूर्ति बहाल कर दी जाएगी। मगर अभी क्षेत्र की खासतौर से सीमावर्ती नहरों को छुआ भी नहीं गया है। यहां तक कि रणबीर नहर में भी कई स्थानों में मिट्टी भरी है।
इसके अलावा डी-17 जो सीमावर्ती गांव पिंडी चाढ़का से शरन होकर क्षेत्र के पूरे सीमावर्ती गांवों में जलापूर्ति करती है, उसे भी अभी साफ नहीं किया गया। इसी नहर की आरडी क्रमांक 3300 के पास स्थित धमाला नाले पर बनाया गया डोलों वाले पुल पर नहर के अंतिम छोर तक जलापूर्ति बहाल रखने के लिए डाली गई, लोहे की पाइपों से भी रिसाव होता है, जिसे अभी तक वेल्डिंग नहीं किया गया है।
विज्ञापन
बता दें कि धमाला नाले पर नहर की जलपूर्ति के लिए पुल न होने से लोहे की मोटी पाइपों से ही वहां लगाई गई लिफ्ट से नहर के छोर में पानी पहुंचाया जाता है।
विज्ञापन
किसान यशपाल, गोपाल दास, चैन सिंह, बबली चाढ़क, रघुवीर सिंह, बाबू राम व शमशेर सिंह आदि क्षेत्र के किसानों का कहना है कि इसी 23 मार्च को डिवकॉम डॉक्टर राघव लंगर ने नहर व बाढ़ नियंत्रण विभाग के मुख्य अभियंता हिमेश मनचंदा सहित पूरे अमले के साथ दौरा कर क्षेत्र की नहरों का निरीक्षण किया था। दावा किया गया था कि 31 मार्च तक रण्वीर नहर सहित अन्य सभी माइनर नहरों की डीसिल्टिंग को संपन्न करके एक अप्रैल को नहरों में जलापूर्ति बहाल कर दी जाएगी। मगर अभी क्षेत्र की खासतौर से सीमावर्ती नहरों को छुआ भी नहीं गया है। यहां तक कि रणबीर नहर में भी कई स्थानों में मिट्टी भरी है।
विज्ञापन
इसके अलावा डी-17 जो सीमावर्ती गांव पिंडी चाढ़का से शरन होकर क्षेत्र के पूरे सीमावर्ती गांवों में जलापूर्ति करती है, उसे भी अभी साफ नहीं किया गया। इसी नहर की आरडी क्रमांक 3300 के पास स्थित धमाला नाले पर बनाया गया डोलों वाले पुल पर नहर के अंतिम छोर तक जलापूर्ति बहाल रखने के लिए डाली गई, लोहे की पाइपों से भी रिसाव होता है, जिसे अभी तक वेल्डिंग नहीं किया गया है।
विज्ञापन
बता दें कि धमाला नाले पर नहर की जलपूर्ति के लिए पुल न होने से लोहे की मोटी पाइपों से ही वहां लगाई गई लिफ्ट से नहर के छोर में पानी पहुंचाया जाता है।