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Jammu News: खेत में ही बिक गया गेहूं, मंडियां खाली
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सतीश वालिया
जम्मू। गेहूं की फसल तैयार होते ही किसानों ने मंडियों का रुख करने के बजाय खेतों में ही व्यापारियों को उपज बेच दी है। सरकारी खरीद की धीमी प्रक्रिया और उचित सुविधाओं के अभाव से इस बार मंडियां खाली हैं। प्रदेश में ऐसा पहली बार ही हुआ है कि 21 दिन से मंडियां किसानों का इंतजार कर रही हैं।
कृषि विभाग ने जम्मू संभाग के चार जिलों जम्मू, सांबा, कठुआ व उधमपुर में 21 मंडियां खोलीं हैं। हर बार किसान मंडियों के माध्यम से गेहूं बेचकर कमाई करते थे। इस बार समीकरण ही बदल गए हैं। पंजाब के मिल्स और बड़े ठेकेदारों ने खेतों से ही सरकारी समर्थन मूल्य 2528 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से अनाज खरीद लिया है। मंडी तक अनाज पहुंचाने के लिए किसानों को ट्रैक्टर-ट्रॉली का इंतजाम करना पड़ता है। इससे जेब खर्च बढ़ जाता है। मंडियों में समर्थन मूल्य भी बाद में मिलता है।
फूड काॅरपोरेशन ऑफ इंडिया और कृषि विभाग ने मंडियां स्थापित करने के लिए योजना तैयार की थी। गेहूं की कटान 100 फीसदी पूरी हो चुकी है। अब किसान धान बीजने की तैयारी कर रहे हैं।
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n अब धान केंद्रों की संख्या हो सकती है कम : अक्तूबर में धान की कटान के दौरान खरीद केंद्रों की संख्या कम हो सकती है। इस बार खरीद केंद्रों में गेहूं नहीं आया है। अब इसका असर धान की फसल बेचने के दाैरान पड़ेगा। इस बार कृषि विभाग और एफअसीआई को काफी नुकसान हुआ है। हर केंद्र पर दो से तीन लाख रुपये खर्च किए गए हैं।
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जम्मू। गेहूं की फसल तैयार होते ही किसानों ने मंडियों का रुख करने के बजाय खेतों में ही व्यापारियों को उपज बेच दी है। सरकारी खरीद की धीमी प्रक्रिया और उचित सुविधाओं के अभाव से इस बार मंडियां खाली हैं। प्रदेश में ऐसा पहली बार ही हुआ है कि 21 दिन से मंडियां किसानों का इंतजार कर रही हैं।
कृषि विभाग ने जम्मू संभाग के चार जिलों जम्मू, सांबा, कठुआ व उधमपुर में 21 मंडियां खोलीं हैं। हर बार किसान मंडियों के माध्यम से गेहूं बेचकर कमाई करते थे। इस बार समीकरण ही बदल गए हैं। पंजाब के मिल्स और बड़े ठेकेदारों ने खेतों से ही सरकारी समर्थन मूल्य 2528 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से अनाज खरीद लिया है। मंडी तक अनाज पहुंचाने के लिए किसानों को ट्रैक्टर-ट्रॉली का इंतजाम करना पड़ता है। इससे जेब खर्च बढ़ जाता है। मंडियों में समर्थन मूल्य भी बाद में मिलता है।
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फूड काॅरपोरेशन ऑफ इंडिया और कृषि विभाग ने मंडियां स्थापित करने के लिए योजना तैयार की थी। गेहूं की कटान 100 फीसदी पूरी हो चुकी है। अब किसान धान बीजने की तैयारी कर रहे हैं।
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n अब धान केंद्रों की संख्या हो सकती है कम : अक्तूबर में धान की कटान के दौरान खरीद केंद्रों की संख्या कम हो सकती है। इस बार खरीद केंद्रों में गेहूं नहीं आया है। अब इसका असर धान की फसल बेचने के दाैरान पड़ेगा। इस बार कृषि विभाग और एफअसीआई को काफी नुकसान हुआ है। हर केंद्र पर दो से तीन लाख रुपये खर्च किए गए हैं।