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उपलब्धि : स्कॉस्ट ने तैयार की देश की पहली जीन एडिटेड भेड़
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श्रीनगर। शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एसकेयूएएसटी) के शोधकर्ताओं ने देश की पहली जीन-एडिटेड भेड़ तैयार की है। यह पशु जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सफलता मानी जा रही है।
शोधकर्ताओं ने बताया कि चार साल के मेहनत के बाद भेड़ के जीन की एडिटिंग (संवर्धन) संभव हो पाई। इससे भेड़ की मांसपेशियों का वजन 30% तक बढ़ जाएगा। यह सफलता हाल ही में भारत की पहली जीन-एडिटेड चावल किस्म के जारी होने के बाद मिली है। उधर, विश्वविद्यालय ने इसे अभूतपूर्व वैज्ञानिक उपलब्धि करार दिया।
जीन एडिटिंग का काम सीआरआईएसपीआर-सीएएस9 तकनीक का उपयोग करके किया गया। इसमें अंतरराष्ट्रीय जैव सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया है।
शोधकर्ताओं ने बताया कि नई भेड़ में कोई विदेशी डीएनए नहीं है, जो इसे ट्रांसजैनिक जीवों से अलग करता है। उन्होंने इसके (भेड़ के) मायोस्टैटिन जीन को संशोधित किया है। यह जीन मांसपेशियों की वृद्धि के लिए जिम्मेदार होता है।
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शोधकर्ताओं ने बताया कि चार साल के मेहनत के बाद भेड़ के जीन की एडिटिंग (संवर्धन) संभव हो पाई। इससे भेड़ की मांसपेशियों का वजन 30% तक बढ़ जाएगा। यह सफलता हाल ही में भारत की पहली जीन-एडिटेड चावल किस्म के जारी होने के बाद मिली है। उधर, विश्वविद्यालय ने इसे अभूतपूर्व वैज्ञानिक उपलब्धि करार दिया।
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जीन एडिटिंग का काम सीआरआईएसपीआर-सीएएस9 तकनीक का उपयोग करके किया गया। इसमें अंतरराष्ट्रीय जैव सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया है।
शोधकर्ताओं ने बताया कि नई भेड़ में कोई विदेशी डीएनए नहीं है, जो इसे ट्रांसजैनिक जीवों से अलग करता है। उन्होंने इसके (भेड़ के) मायोस्टैटिन जीन को संशोधित किया है। यह जीन मांसपेशियों की वृद्धि के लिए जिम्मेदार होता है।
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