मेडिकल PG में एडमिशन के लिए कोर्ट का अहम फैसला, जानिए क्या
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मेडिकल कोर्सों के पीजी डिप्लोमा के दाखिले के लिए काउंसिलिंग के कार्यक्रम को खारिज करने के लिए दायर तमाम एलपीए को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एनपी वसंथाकुमार और जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर की खंडपीठ ने आदेश में कहा कि एसएसी, एसटी और ओडब्ल्यूसी के प्रतिभागियों को छोड़ अन्य सभी को पीजी डिग्री और डिप्लोमा कोर्स की दाखिला परीक्षा में कम से कम 50 फीसदी अंक हासिल करने होंगे।
एलपीए में डाक्टरों के समूह ने इन कोर्सों के प्रोविजनल एडमीशन के लिए पांच अप्रैल 2015 को हुई काउंसिलिंग खारिज करने की अपील की थी। साथ ही ग्रामीण सेवा वर्ग को आरक्षित वर्ग में शामिल कर 40 फीसदी अंकों पर प्रवेश देने का आग्रह किया गया था।
जेएंडके बोर्ड आफ प्रोफेशनल एंट्रेंस एग्जाम की ओर से इन कोर्सों के लिए आठ जनवरी 2015 को अधिसूचना जारी की गई थी।
40 फीसदी करने की थी मांग
डाक्टरों का कहना था कि ग्रामीण क्षेत्रों में पांच साल मेडिकल अफसर के रूप में तैनात रहने वालों को ग्रामीण क्षेत्र वर्ग का आरक्षण मिलना चाहिए।
ओपन मेरिट के 50 फीसदी अंकों की बजाय उन्हें 40 फीसदी अंकों पर ही दाखिल मिले। खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पूछा कि क्या यह उचित होगा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले एमओ को लिखित परीक्षा में 40 फीसदी अंक में दाखिला की अनुमति दी जाए।
सीटों के घोषित नियमों के अनुसार 65 फीसदी (177 सीट) ओपन मेरिट की और शेष 35 फीसदी (94 सीट) आरक्षित वर्ग के लिए रखी गई हैं।
तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए खंडपीठ ने सिंगल बैंच के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें एससी, एसटी और ओडब्ल्यूसी के आरक्षित वर्ग के अलावा अन्य प्रतिभागियों को 50 फीसदी अंक हासिल करने होंगे।
जेएनएफ