जम्मू-कश्मीर: जम्मू नगर निगम में 23 वर्षों में बढ़ गए 43 वार्ड, कई इलाकों में सुविधाएं गांव से बदतर
जम्मू में वर्ष 1995 में नगर निगम की स्थापना हुई। उस समय करीब 32 वार्ड थे। इसके बाद लगातार इन्हें बढ़ाया गया। प्रदेश में कई सरकारें बनी और चली गई लेकिन कई वार्डों में अब तक आम लोगों को सुविधाएं नहीं मिल पाई है।
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अंग्रेजों के जमाने में बनी नगर कमेटी का दायरा बढ़कर 190 वर्ग किलोमीटर पहुंच गया है, लेकिन अभी भी मूलभूत सुविधाएं नाकाफी हैं। कमेटी के नगर निगम बनने के बाद वार्डों को बढ़ाने की कवायद 1995 से निरंतर जारी है। उस समय जम्मू में 32 के करीब वार्ड थे। 2000 में बढ़कर 67 हुए, 2005 में 71 वार्ड और 2018 में इनकी संख्या 75 पहुंच गई।
जम्मू में 23 साल के भीतर ग्रामीण इलाकों को मिलाकर 43 नए वार्ड बने। अभी तक 700 से ज्यादा गांव नगर निगम के दायरे में आ चुके हैं। 2005 में नगर निगम का क्षेत्र 240 वर्ग किलोमीटर था, जबकि 2018 में बढ़कर 290 वर्ग किलोमीटर हो गया। 72, 73, 74 और 75 नए वार्ड बने। इसमें 150 गांव नए जुड़े। जरूरत के हिसाब से नगर निगम का क्षेत्र बढ़ा, लेकिन सुविधाएं उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ पाईं।
2005 के बाद 2018 तक नगर निगम के चुनाव नहीं हुए। इससे शहर में विकास थम गया। लोग 1995 से 2000 के बीच बने पत्थर के रास्तों में चलने को मजबूर हुए। लंबे समय तक चुनाव न होने से विकास ग्रांट इन एड के सहारे रहा। 100 करोड़ के आसपास ग्रांट मिली।
इसमें दस फीसदी बजट ही विकास पर खर्च किया गया। इससे शहर में नाले, नालियों और रास्तों की हालत में सुधार नहीं हो पाया। 2018 में चुनाव होने के बाद आय के स्रोत बढ़ाए गए। इससे नगर निगम की अपनी आय 19 करोड़ रुपये के आसपास पहुंची।
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से जगी विकास की उम्मीद
अब स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से शहरवासियों को विकास की उम्मीद जगी है। इसके तहत वार्डों में स्ट्रीट लाइटें लगाने, नाले, नालियों और अन्य प्रोजेक्टों पर काम शुरू हुआ है। शहर में सात लाख के करीब आबादी है, लेकिन सुविधाएं 2005 की तर्ज पर ही मिल रही हैं। यहां पर स्कूलों, कालेजों, अस्पतालों, पुलिस स्टेशनों का विस्तारीकरण नहीं हो पाया है।
हालांकि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में इसके लिए प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। शहर में प्राइवेट स्कूलों का दायरा बढ़ा है। सौ के करीब सरकारी स्कूल चल रहे हैं। हालांकि 2005 में स्कूल सिर्फ 50 थे। इसी तरह होटलों की संख्या 200 से ऊपर पहुंच गई है। 2005 में 90 के करीब होटल चल रहे थे। 90 के करीब रेस्तरां चल रहे हैं, जो पहले नगर निगम के रिकॉर्ड में 40 ही थे।
डाक बाक्स कहीं ईंटों के सहारे तो कहीं पर गायब
गुम्मट के पास डाक विभाग के डाक बॉक्स को ईंटों के सहारे टिकाकर रखा गया है। लोगों के अनुसार बॉक्स यहां पर कई सालों से ऐसी ही हालत में हैं। लोग यहां अपनी चिट्ठियां पोस्ट करने आते हैं। सुबह के वक्त डाकिया भी पत्र एकत्रित करने आता है, लेकिन डाक विभाग ने अभी तक बॉक्स के लिए स्थायी जगह चिह्नित नहीं की है। इसी तरह शालामार रोड के पास डाक बॉक्स किसी को दिखता ही नहीं, बाक्स के आगे फड़ी वाले सामान रख देते हैं।
नगर निगम के 2005 में चुनाव हुए थे। इसके बाद 13 साल तक चुनाव नहीं करवाए गए। निगम का दायरा बढ़ा है। अब स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में लोगों को सुविधाएं दी जा रही हैं। पहले ग्रांट इन एड पर विकास निर्भर था। 100 करोड़ में से सिर्फ दस फीसदी बजट विकास पर खर्च होता रहा है। 2018 में नगर निगम चुनाव के बाद शहर का विकास तेजी से करवाया जा रहा है।
- संदीप कुमार, उपनिदेशक, प्लानिंग विभाग, नगर निगम
विकास कार्य तेज गति से करवाए जा रहे हैं। हालांकि आबादी काफी बढ़ी है। पहले विकास की गति तेज नहीं थी। अब स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से शहर में विकास हो रहा है।
- पूर्णिमा शर्मा, डिप्टी मेयर
लोग सुविधाएं चाहते हैं, मगर यूजर चार्ज देने में पीछे हैं। इस कारण भी नगर निगम की आय कम है। ऐसे में सुविधाएं लोगों को पूरी नहीं मिल रही हैं।
- सुच्चा सिंह, पार्षद, वार्ड 31
2018 के बाद से विकास तेज हुआ। इससे पहले 14वें वित्त आयोग की राशि ही नगर निगम से खर्च नहीं हो पाई है। ऐसे में विकास कार्य थम गए थे। लोगों को 2000 की तर्ज पर ही सुविधाएं मिलीं, जबकि वार्ड जुड़ने से आबादी में इजाफा हुआ था।
- राजेंद्र शर्मा, पार्षद, वार्ड 16
आबादी बढ़ती गई है मगर सुविधाएं अभी कम मिल रही हैं। आबादी के हिसाब से सफाई कर्मचारी नहीं है। इसके अलावा विकास के लिए ज्यादा फंड नहीं मिल पाते। अब नई योजना पर काम होना चाहिए।
- प्रीतम सिंह, पार्षद, वार्ड 55