{"_id":"86ae4d5b5a87ed846a00e3de1f886028","slug":"400-crore-for-jhelum-flood-channel-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"झेलम में फ्लड चैनल के लिए 400 करोड़ मंजूर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
झेलम में फ्लड चैनल के लिए 400 करोड़ मंजूर
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Fri, 12 Jun 2015 01:05 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सेंट्रल वाटर कमीशन (सीडब्लूसी) ने झेलम दरिया में फ्लड चैनल सृजित करने के काम के लिए रियासती सरकार के 400 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। इस राशि में 281 करोड़ की राशि केंद्रीय सरकार मुहैया करवाएगी। शेष राशि रियासत सरकार को मुहैया करवानी होगी।
विज्ञापन
पीएचई, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री चौधरी सुखनंदन कुमार ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि सितंबर 2014 में झेलम में आई विनाशकारी बाढ़ से सबक लेते हुए रियासत सरकार ने झेलम नदी में बाढ़ बचाव कार्य के लिए काम शुरू किया है। हालांकि इसमें अभी काफी समय लगेगा।
विज्ञापन
कुल 22000 करोड़ रुपये की योजना में से प्रथम चरण में 400 करोड़ का प्रस्ताव मंजूरी के लिए केंद्रीय सेंट्रल वाटर कमीशन के पास भेजा गया था। इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। जल्द ही राशि जारी होने के बाद झेलम में फ्लड चैनल सृजित करने के काम में तेजी आएगी।
विज्ञापन
पीएचई, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग के सचिव परवेज मलिक का कहना है कि जहां तक झेलम दरिया में बाढ़ बचाव कार्य का सवाल है तो बाइस हजार करोड़ की योजना पर काम होना है। इसी कड़ी में पहले चरण के तहत 400 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को सीडब्ल्यूसी की मंजूरी मिली है। जैसे-जैसे काम चलता जाएगा, वैसे अगले प्रस्तावों को भी मंजूरी के लिए केंद्र के पास भेजा जाएगा।
नदियों, दरियाओं के करीब अतिक्रमण हटाना चुनौती
नदियों और दरियाओं के करीब अतिक्रमण से बाढ़ का खतरा बढ़ा है। सितंबर, 2014 में कश्मीर के अलावा जम्मू में नदियों, दरियाओं और नालों में आई बाढ़ के प्रमुख कारणों में से अतिक्रमण सबसे प्रमुख समस्या रही है। बाढ़ के बाद भी अतिक्रमण हटाने की दिशा में फिलहाल कोई पुख्ता कदम नहीं उठाया जा सकाहै।
पीएचई, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण मंत्री का कहना है कि लोगों को स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाना चाहिए, ताकि बाढ़ जैसे प्राकृतिक आपदाओं से बचा जा सके। ऐसा न होने पर सरकार को ठोस कदम उठाने को मजबूर होना पड़ेगा।