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विस्थापन के 32 साल: कश्मीरी पंडितों की घर वापसी के लिए प्रयास शुरू होते ही टारगेट किलिंग, मंदिरों पर हमलों की साजिश
Wed, 19 Jan 2022 05:17 PM IST
विमल शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: विमल शर्मा
Updated Wed, 19 Jan 2022 05:17 PM IST
सार
कश्मीर पंडितों की जमीन से कब्जे हटाने की प्रक्रिया शुरू होते ही घाटी में मंदिरों को बनाया जाने लगा निशाना। अनंतनाग के भार्गशिखा मंदिर में आगजनी व त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में तोड़फोड़ दहशत फैलाने की साजिश।
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Herath festival of Kashmiri Pandits is called Mahashivratri in Shankaracharya Temple Srinagar (file)
- फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
कश्मीरी विस्थापितों की वापसी के लिए सरकारी तंत्र सक्रिय हुआ तो घाटी में टारगेट किलिंग होने लगी। मंदिरों पर हमले भी किए गए। दरअसल, कश्मीरी पंडितों की घाटी वापसी को रोकने के लिए आतंकियों को सीमा पार से माहौल बिगाड़ने के आदेश मिलने की बात सामने आई है। ऐसे में टारगेट किलिंग को इसी साजिश का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, टारगेट किलिंग को अंजाम देने वाले आतंकियों में से कई को बाद में सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में मार गिराया।
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सरकार की ओर से विस्थापितों के लिए अचल संपत्तियों संबंधी शिकायतों के लिए सात सितंबर 2021 को ऑनलाइन पोर्टल का शुभारंभ किया गया। इस महीने के आखिर तक एक हजार से अधिक शिकायतें दर्ज कराई गईं। अकेले श्रीनगर में 644 और अनंतनाग में 153 मामले दर्ज हुए। इसी प्रकार अन्य जिलों की भी शिकायतें दर्ज कराई गईं।
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पोर्टल पर आ रही शिकायतों की घटनाओं से बौखलाए सीमा पार के निर्देश पर आतंकियों ने अनंतनाग जिले के मट्टन में पहाड़ी पर स्थित भार्गशिखा मंदिर पर हमला बोल दिया। नवरात्र के लिए मंदिर को सजाया गया था, लेकिन नवरात्र से पहले दो अक्तूबर को देवी भार्गशिखा मंदिर में तोड़फोड़ के साथ आगजनी की गई।
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यह मंदिर कश्मीरी पंडितों की आराध्य देवी हैं। देवी की शिला और मूर्ति तोड़ दी गई। दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम जिले में देवसर स्थित त्रिपुर सुंदरी मंदिर में 14 जनवरी को आग लग गई। हालांकि, पुलिस ने प्रारंभिक जांच में घटना के पीछे किसी साजिश से इनकार किया है। उसका कहना था कि आग गलती से मंदिर में दीपक जलाए जाने के कारण लगी।
वहीं, घटना के विरोध में जम्मू के जगती में कश्मीरी पंडितों ने प्रदर्शन किया। जगती टेनमेंट सोसायटी और सोन कश्मीर फ्रंट के अध्यक्ष शादीलाल पंडिता का कहना था कि ये हमला कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी की संभावनाओं पर हमला है। कुछ लोग घाटी में आपसी सौहार्द खराब करने की कोशिश में लगे हैं, जिनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने उपायुक्त और एसएसपी कुलगाम से ऐसे शरारती तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह घाटी में कश्मीरी पंडितों के धार्मिक स्थलों के सरंक्षण के साथ सुरक्षा करे।
सरकारी तंत्र की सक्रियता के बीच ही आतंकवाद के दौर में भी घाटी न छोड़ने वाले कश्मीरी पंडित दवा कारोबारी मक्खनलाल बिंदरू की आतंकियों ने दुकान में घुसकर हत्या कर दी। इसके बाद सिख शिक्षक सुपिंदर कौर व हिंदू शिक्षक की स्कूल में घुसकर परिचय पत्र जांचने के बाद हत्या कर दी।
आठ नवंबर को श्रीनगर के बोहरी कदल में कश्मीरी पंडित कारोबारी डॉ. संदीप मावा की दुकान पर काम करने वाले कर्मचारी मोहम्मद इब्राहिम की गोली मारकर हत्या कर दी। डॉ. संदीप का दावा था कि आतंकियों का निशाना वे थे, लेकिन धोखे में इब्राहिम निशाने पर आ गया। अक्तूबर-नवंबर में आतंकियों ने 11 हिंदुओं व गैर कश्मीरियों की हत्या कर दी।
बदलाव आया है तो होटलों में क्यों ठहरा रही सरकार
कश्मीरी पंडित नेता सतीश महलदार का कहना है कि पोर्टल का शुभारंभ होने के बाद भूमाफिया भी सक्रिय हो गए। लेकिन सरकारी स्तर पर मंदिरों की जमीन को बेचने के मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई। कश्मीरी हिंदुओं व गैर कश्मीरियों की हत्याएं भी कहीं न कहीं दहशत फैलाने के लिए ही की गई।
ताकि सब कुछ रुक जाए। सरकार को चाहिए कि पुनर्वास योजना पर गंभीरता पूर्वक विचार करे। वह दावे तो करती है कि बदलाव आया है, लेकिन बदलाव आया है तो कश्मीर के 150 होटलों में साढ़े छह हजार से अधिक लोगों को क्यों ठहराया जा रहा है। सरकार क्यों किराये का भुगतान कर रही है।