{"_id":"5a663ece4f1c1ba0268b5e6e","slug":"181516650190-jammu-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आर्गेनिक फार्मिंग से बढ़ाएं खेती की उपज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आर्गेनिक फार्मिंग से बढ़ाएं खेती की उपज
Updated Tue, 23 Jan 2018 01:13 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फोटो-
ऑर्गेनिक फार्मिंग से बढ़ाएं फसल की उपज
कठुआ। कृृषि विभाग द्वारा पल्ली मोड़ में सोमवार को किसानों की जागरूकता के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें किसानों को ऑर्गेनिक फार्मिंग के बारे में जागरूक किया गया। किसानों को बताया गया कि वे ऑर्गेनिक फार्मिंग से फसल की उपज बढ़ा सकते हैं। वर्तमान में आर्गेनिक फार्मिंग अपना चुके किसानों की फसल के नमूने पेश करने के लिए स्टाल भी लगाए गए।
कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञों में सायल केमिस्ट सृष्टा देवी व डीएओ देवेंद्र ने कहा कि जैविक खेती की विधि रासायनिक खेती की विधि की तुलना में बराबर या अधिक उत्पादन देती है। अर्थात जैविक खेती मिट्टी की उर्वरता एवं फसल की उत्पादकता बढ़ाने में सहायक है। वर्षा आधारित क्षेत्र में जैविक खेती की विधि और भी अधिक लाभदायक है। इससे उत्पादन की लागत तो कम होती ही है, साथ ही कृषकों को आय अधिक प्राप्त होती है तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्पर्धा में जैविक उत्पाद अधिक खरे उतरते हैं। इसके फलस्वरूप सामान्य उत्पादन की अपेक्षा में कृषक अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
कार्यक्रम में विभिन्न इलाकों से आए किसानों ने अपनी-अपनी सब्जियों की प्रदर्शनी भी लगाई और विभाग की ओर से उन्हें आत्मा योजना के तहत सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम के दौरान एडीओ सोमनाथ शर्मा, एसडीएओ संजीव राय विशेष तौर पर उपस्थित हुए।
विज्ञापन
विज्ञापन
ऑर्गेनिक फार्मिंग से बढ़ाएं फसल की उपज
कठुआ। कृृषि विभाग द्वारा पल्ली मोड़ में सोमवार को किसानों की जागरूकता के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें किसानों को ऑर्गेनिक फार्मिंग के बारे में जागरूक किया गया। किसानों को बताया गया कि वे ऑर्गेनिक फार्मिंग से फसल की उपज बढ़ा सकते हैं। वर्तमान में आर्गेनिक फार्मिंग अपना चुके किसानों की फसल के नमूने पेश करने के लिए स्टाल भी लगाए गए।
कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञों में सायल केमिस्ट सृष्टा देवी व डीएओ देवेंद्र ने कहा कि जैविक खेती की विधि रासायनिक खेती की विधि की तुलना में बराबर या अधिक उत्पादन देती है। अर्थात जैविक खेती मिट्टी की उर्वरता एवं फसल की उत्पादकता बढ़ाने में सहायक है। वर्षा आधारित क्षेत्र में जैविक खेती की विधि और भी अधिक लाभदायक है। इससे उत्पादन की लागत तो कम होती ही है, साथ ही कृषकों को आय अधिक प्राप्त होती है तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्पर्धा में जैविक उत्पाद अधिक खरे उतरते हैं। इसके फलस्वरूप सामान्य उत्पादन की अपेक्षा में कृषक अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
विज्ञापन
कार्यक्रम में विभिन्न इलाकों से आए किसानों ने अपनी-अपनी सब्जियों की प्रदर्शनी भी लगाई और विभाग की ओर से उन्हें आत्मा योजना के तहत सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम के दौरान एडीओ सोमनाथ शर्मा, एसडीएओ संजीव राय विशेष तौर पर उपस्थित हुए।
विज्ञापन