फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   16 thousands per hectare loss in agriculture due to rain

प्रति हेक्टेयर पैदावार पर 16 हजार की चपत

Wed, 29 Apr 2015 02:23 AM IST
Updated Wed, 29 Apr 2015 02:23 AM IST
विज्ञापन
16 thousands per hectare loss in agriculture due to rain

जिस फसल पर हजारों रुपये खर्च कर उसका छह महीने तक पकने का इंतजार किया, उसकी बर्बादी देखकर किसान सदमे में हैं। आलम यह है कि तबाह हुई फसलों को हटाने के लिए किसानों को अतिरिक्त पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। जिस फसल को किसान आग से बचाने का प्रयास करता है, उसमें अब खुद आग लगाकर खेत खाली कर रहा है।

विज्ञापन


किसानों के लिए पिछला एक साल मुसीबतों में गुजरा। किसानों को प्रति हेक्टेयर पर 14,400 रुपये की चपत लगी है। इसमें गेहूं बोने से लेकर काटने और हटाने तक का खर्च शामिल हैं। पूरे खर्च को बची फसल से जोड़ कर देखा जाए तो किसानों को प्रति हेक्टेयर तीन से चार हजार रुपये की पैदावार मिल रही है।
विज्ञापन


पूरी तरह नष्ट हो चुकी फसल का अगर थ्रैशिंग और कटाई का खर्च अलग कर दिया जाए, तो प्रति हेक्टेयर पर आठ हजार रुपये का खर्च झेलना पड़ा है। बची फसल की कटाई शुरू हो चुकी है। प्रति हेक्टेयर पर औसतन गेहूं की 15 क्विंटल पैदावार होती है। अच्छी फसल हो तो आंकड़ा 20 क्विंटल तक भी पहुंच जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस समय प्रति हेक्टेयर पर दो से तीन क्विंटल पैदावार ही निकल रही है। जिसका किसानों को 2500 से 3000 रुपये ही मिल रहा है।

200 करोड़ का लग चुका चूना

16 thousands per hectare loss in agriculture due to rain

जम्मू संभाग में ढाई लाख हेक्टेयर पर गेहूं की फसल लगाई गई थी। इसमें से डेढ़ लाख हेक्टेयर की फसल पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। प्रति हेक्टेयर पर 14,400 रुपये के नुकसान को इस आंकड़े के साथ जोड़ कर देखा जाए तो 216 करोड़ रुपये की फसल तबाह हो चुकी है। सरकार ने अब तक कोई आंकड़ा नहीं बताया है।

परिवार की मेहनत पर फिरा पानी
हर किसान परिवार के औसत पांच सदस्यों ने गेहूं की फसल की छह महीने तक देखभाल की है। दो-चार दिन की बारिश ने ही छह महीने की मेहनत पर पानी फेर दिया। ऐसे ही एक किसान हैं चौधरी देवराज। आरएस पुरा राइस ग्रोअर्स एसोसिएशन के प्रधान देवराज का कहना है कि परिवार के छह सदस्य यदि कहीं और काम करते तो हजारों रुपये कमा सकते थे। गेहूं के पीछे मेहनत करने से सब कुछ लुट गया।

साफ कराने को 1600 रुपये अतिरिक्त खर्च
जिन किसानों की फसल खेतों में ही सड़ चुकी है। उन्हें अब प्रति हेक्टेयर 1600 रुपये देकर साफ करवाना पड़ रहा है ताकि अगली फसल के लिए भूमि तैयार की जा सके। इस 1600 रुपये को 14,400 रुपये खर्च जोड़ा जाए तो प्रति हेक्टेयर 16000 रुपये की चपत लगी है। पैसा नहीं होने से कई किसान फसल को आग लगा दे रहे हैं।

प्रति हेक्टेयर पर पर इतना होता खर्च

16 thousands per hectare loss in agriculture due to rain

500 रुपये- एरो बुआई
1500 रुपये- ट्रैक्टर हल बुआई (दो बार)
1500 रुपये- डीएपी खाद
1000 रुपये- यूरिया खाद
300 रुपये- पोटाश
100 रुपये- चूहों से बचाने की दवाई
1000 रुपये- सिंचाई
1000 रुपये- बीज (56 किलो)
500 रुपये- लोडिंग अनलोडिंग
3500 रुपये- कटाई
3000 रुपये- थ्रैशिंग
500 रुपये- बीमारियों से बचाने को कीटनाशक
कुल 14400 रुपये- नतीजा सिफर

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed