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साहब... हमें हमारा गांव लौटा दो
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ज्यौड़ियां। खौड़ उपजिले के गांव सामोआ-चपरेयाल के लोगों ने विस्थापित कॉलोनी कोढेवाला से वापस घरों में आना चाहते हैं। बैक टू विलेज कार्यक्रम में ग्रामीणों ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया ताकि यह मसला राज्यपाल तक पहुंचे और उन्हें घर वापसी कराने की पहल शुरू हो।
छंब विधानसभा क्षेत्र के ब्लाक चपरेयाल की पंचायत सामोआ के लोगों ने बताया कि हमारी पंचायत के दो गांव सामोआ और चपरेयाल ऐसे हैं, जहां के लोगों को कारगिल युद्ध के दौरान 1999 में खाली करवा कर सौहल रोड पर सुरक्षित स्थान पर कोढेवाला कॉलोनी में बसाया गया था। उनके एलओसी पर भारत-पाकिस्तान सीमा के जीरो लाइन पर स्थित है। लेकिन ग्रामीणों ने अब अपने गांव के घरों में सामोआ तथा चपरेयाल में लौटना चाहते हैं। क्योंकि गांव से बाहर रहकर खेतीबाड़ी नहीं कर पा रहे हैं। जमीन बंजर हो गई है। सरकार ने हमारी जमीनों पर सिंचाई करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर जो लिफ्ट इरिगेशन प्लांट लगाई थी, उसको भी जंग लग गई है।
सनद रहे की कारगिल युद्ध के दौरान एलओसी पर स्थित पलांवाला क्षेत्र के सीमावर्ती 21 गांवों के लोगों को सरकार की तरफ से सुरक्षित स्थान पर बसाया गया था। सीमा पर शांति बहाली के पश्चात अन्य सभी गांवों के लोगों को प्रशासन ने अपने-अपने गांव में बसा दिया, लेकिन गांव सामोआ तथा चपरेयाल के लोग आज भी सौहल रोड पर बनाई गई विस्थापित कालोनी में जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इन गांवों के लोगों ने बैक टू विलेज कार्यक्रम के तहत गांव में पहुंचे अधिकारी चौधरी तरसेम सिंह पप्पी को भी इस समस्या को विस्तार से बताया था ताकि उनकी बात राज्यपाल तक पहुंच सके। पंचायत की सरपंच अनुराधा शर्मा, समाजसेवी डॉक्टर परषोत्तम लाल, शाम लाल आदि ने बताया कि हमारे गांव इस समय सीमा पर सेना की तरफ से लगाई गई फेसिंग के अंदर है। उनको फेसिंग से बाहर निकाला जाए ताकि हम अपने गांवों में बिना रोक टोक आ-जा सकें।
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छंब विधानसभा क्षेत्र के ब्लाक चपरेयाल की पंचायत सामोआ के लोगों ने बताया कि हमारी पंचायत के दो गांव सामोआ और चपरेयाल ऐसे हैं, जहां के लोगों को कारगिल युद्ध के दौरान 1999 में खाली करवा कर सौहल रोड पर सुरक्षित स्थान पर कोढेवाला कॉलोनी में बसाया गया था। उनके एलओसी पर भारत-पाकिस्तान सीमा के जीरो लाइन पर स्थित है। लेकिन ग्रामीणों ने अब अपने गांव के घरों में सामोआ तथा चपरेयाल में लौटना चाहते हैं। क्योंकि गांव से बाहर रहकर खेतीबाड़ी नहीं कर पा रहे हैं। जमीन बंजर हो गई है। सरकार ने हमारी जमीनों पर सिंचाई करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर जो लिफ्ट इरिगेशन प्लांट लगाई थी, उसको भी जंग लग गई है।
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सनद रहे की कारगिल युद्ध के दौरान एलओसी पर स्थित पलांवाला क्षेत्र के सीमावर्ती 21 गांवों के लोगों को सरकार की तरफ से सुरक्षित स्थान पर बसाया गया था। सीमा पर शांति बहाली के पश्चात अन्य सभी गांवों के लोगों को प्रशासन ने अपने-अपने गांव में बसा दिया, लेकिन गांव सामोआ तथा चपरेयाल के लोग आज भी सौहल रोड पर बनाई गई विस्थापित कालोनी में जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इन गांवों के लोगों ने बैक टू विलेज कार्यक्रम के तहत गांव में पहुंचे अधिकारी चौधरी तरसेम सिंह पप्पी को भी इस समस्या को विस्तार से बताया था ताकि उनकी बात राज्यपाल तक पहुंच सके। पंचायत की सरपंच अनुराधा शर्मा, समाजसेवी डॉक्टर परषोत्तम लाल, शाम लाल आदि ने बताया कि हमारे गांव इस समय सीमा पर सेना की तरफ से लगाई गई फेसिंग के अंदर है। उनको फेसिंग से बाहर निकाला जाए ताकि हम अपने गांवों में बिना रोक टोक आ-जा सकें।
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