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प्रशासन ने रामनगर और उधमपुर में नाबालिगों की शादी रुकवाई
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उधमपुर। डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट (डीसीपीयू) और स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट (एसजेपीयू) ने सोमवार को शिकायत मिलने के बाद रामनगर और उधमपुर में दो नाबालिग लड़कियों के विवाह को रोक दिया। एक उम्र 15 वर्ष थी और दूसरी की उम्र 14 वर्ष थी। दोनों की जबरन शादी करवाई जा रही थी। पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी अनुसार दोनों यूनिटों को सूचना मिली थी कि उधमपुर के सिउना रांग और रामनगर तहसील के बरमीन मलाल गांव में दो नाबालिग लड़कियों की जबदस्ती शादी करवाई जा रही है। सूचना मिलने के बाद टीमें दोनों लड़कियों के घर पहुंची। टीमों ने दोनों के परिवार से लड़कियों का जन्म प्रमाणपत्र मांगा। जब जन्म प्रमाणपत्र देखा तो साबित हो गया कि दोनों ही अभी नाबालिग हैं। दोनों टीमों ने उसी समय कार्रवाई करते हुए लड़कियों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के पास ले गए और दोनों की देखभाल की जिम्मेदारी सौंप दी। दोनों ही मामलों की जांच की जा रही है। इसमें दोषी पाए जाने पर आरपीसी के तहत सात वर्ष तक कैद की सजा हो सकती है। जिला विकास आयुक्त डा. पीयूष सिंगला ने आम जनता से अपील की है कि कोई भी अपनी नाबालिग लड़की की शादी न करें। छोटी उम्र में लड़की की शादी करना किसी तरह से भी सही नहीं है। इसका समाज पर बुरा असर पड़ता है। अगर कोई नाबलिग की शादी करता हुआ पाया जाएगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि नाबालिग बेटियों की सुरक्षा के लिए ग्रामीण स्तर पर चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटियों का गठन किया जाएगा। यह कमेटियां बाल विवाह व बाल मजदूरी को रोकने का काम करेंगी। ऐसे मामलों की पहचान के लिए सरपंच को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। बालिकाओं के हित में बाल विवाह के कदाचार से दूर रहें।
जानकारी अनुसार दोनों यूनिटों को सूचना मिली थी कि उधमपुर के सिउना रांग और रामनगर तहसील के बरमीन मलाल गांव में दो नाबालिग लड़कियों की जबदस्ती शादी करवाई जा रही है। सूचना मिलने के बाद टीमें दोनों लड़कियों के घर पहुंची। टीमों ने दोनों के परिवार से लड़कियों का जन्म प्रमाणपत्र मांगा। जब जन्म प्रमाणपत्र देखा तो साबित हो गया कि दोनों ही अभी नाबालिग हैं। दोनों टीमों ने उसी समय कार्रवाई करते हुए लड़कियों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के पास ले गए और दोनों की देखभाल की जिम्मेदारी सौंप दी। दोनों ही मामलों की जांच की जा रही है। इसमें दोषी पाए जाने पर आरपीसी के तहत सात वर्ष तक कैद की सजा हो सकती है। जिला विकास आयुक्त डा. पीयूष सिंगला ने आम जनता से अपील की है कि कोई भी अपनी नाबालिग लड़की की शादी न करें। छोटी उम्र में लड़की की शादी करना किसी तरह से भी सही नहीं है। इसका समाज पर बुरा असर पड़ता है। अगर कोई नाबलिग की शादी करता हुआ पाया जाएगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि नाबालिग बेटियों की सुरक्षा के लिए ग्रामीण स्तर पर चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटियों का गठन किया जाएगा। यह कमेटियां बाल विवाह व बाल मजदूरी को रोकने का काम करेंगी। ऐसे मामलों की पहचान के लिए सरपंच को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। बालिकाओं के हित में बाल विवाह के कदाचार से दूर रहें।
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