{"_id":"5d0e8ef98ebc3e0a3936f151","slug":"15612351775-rspura-news182","type":"story","status":"publish","title_hn":"हर दो महीने में हो बैक का टू विलेज कार्यक्रम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हर दो महीने में हो बैक का टू विलेज कार्यक्रम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आरएस पुरा। जिस प्रकार राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की दिक्कतों का समाधान करने के लिए बैक टू विलेज कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, ऐसे कार्यक्रम हर दो महीने पर कराने की जरूरत है। ग्रामीणों का मनना है कि इससे अधिकारियों में भी सक्रियता बनी रहेगी और विकास कार्यों में पारदर्शिता भी आएगी।
मरालिया के सरपंच अंजूरानी, चकरोइ के सरपंच शामलाल भगत, खौड़ के सरपंच परमजीत सिंह पम्मा आदि का कहना है कि गांव में दो दिन तक रुके अधिकारियों ने गांव की भौगोलिक स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त की है। इसी के मुताबिक काम होना चाहिए। बैक टू विलेज कार्यक्रम काफी सफल रहा। इससे पंच व सरपंचों द्वारा अधिकारियों को विस्तार से जानकारी मुहैया कराई गई। इससे पंचायत प्रतिनिधियों में आत्मविश्वास और हौसला बढ़ा है। ग्रामीणों में विकास की आस जगी है।
सेक्यूलर पीपुल्स फोरम के प्रधान कुंदन लाल शर्मा ने कहा कि सबसे बड़ी दिक्कत विभागों में जरूरत के मुताबिक कर्मचारियों का न होना है। दूसरी दिक्कत पंचयात में सरपंच के पास फंड उपलब्ध नहीं होना है। उन्होंने कहा कि पंचायतों को फंड मुुहैया करवाया जाना चाहिए तभी विकास कार्य संभव है। सेवा निवृत्त सुबेदार मदन लाल शर्मा का कहना है कि कई गांव में पंचायत भवन तक नहीं है। ऐसे में पंच और सरपंच कैसे काम करेंगे। ग्रामीणों के साथ मीटिंग करने तक की जगह नहीं मिल पाती है। उन्होंने कहा कि बैक टू विलेज कार्यक्रम काफी सफल रहा है। ऐसे में राज्य सरकार को चाहिए कि उन्हीं अधिकारियों को दो माह बाद इसी प्रकार गांव में भेजें ताकि ग्रामीण क्षेत्र में चल रहे कार्यों के बारे में जानकारी करें। इससे काम में पारदर्शिता भी आएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
मरालिया के सरपंच अंजूरानी, चकरोइ के सरपंच शामलाल भगत, खौड़ के सरपंच परमजीत सिंह पम्मा आदि का कहना है कि गांव में दो दिन तक रुके अधिकारियों ने गांव की भौगोलिक स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त की है। इसी के मुताबिक काम होना चाहिए। बैक टू विलेज कार्यक्रम काफी सफल रहा। इससे पंच व सरपंचों द्वारा अधिकारियों को विस्तार से जानकारी मुहैया कराई गई। इससे पंचायत प्रतिनिधियों में आत्मविश्वास और हौसला बढ़ा है। ग्रामीणों में विकास की आस जगी है।
विज्ञापन
सेक्यूलर पीपुल्स फोरम के प्रधान कुंदन लाल शर्मा ने कहा कि सबसे बड़ी दिक्कत विभागों में जरूरत के मुताबिक कर्मचारियों का न होना है। दूसरी दिक्कत पंचयात में सरपंच के पास फंड उपलब्ध नहीं होना है। उन्होंने कहा कि पंचायतों को फंड मुुहैया करवाया जाना चाहिए तभी विकास कार्य संभव है। सेवा निवृत्त सुबेदार मदन लाल शर्मा का कहना है कि कई गांव में पंचायत भवन तक नहीं है। ऐसे में पंच और सरपंच कैसे काम करेंगे। ग्रामीणों के साथ मीटिंग करने तक की जगह नहीं मिल पाती है। उन्होंने कहा कि बैक टू विलेज कार्यक्रम काफी सफल रहा है। ऐसे में राज्य सरकार को चाहिए कि उन्हीं अधिकारियों को दो माह बाद इसी प्रकार गांव में भेजें ताकि ग्रामीण क्षेत्र में चल रहे कार्यों के बारे में जानकारी करें। इससे काम में पारदर्शिता भी आएगी।
विज्ञापन