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शहर का कचरा एकत्रित करना चुनौती से कम नहीं
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जम्मू। शहर के तमाम वार्डों से नगर निगम को कचरा एकत्रित करना किसी चुनौती से कम नहीं है। हर रोज शहर से लगभग 600 मीट्रिक टन कचरा एकत्रित होता है। सफाई कर्मचारियों के पद खाली होने के कारण वार्डों में सही तरीके से सफाई नहीं हो पाती है। वहीं, दूसरी ओर नगर निगम के पास पर्याप्त वाहन भी नहीं हैं। इससे कचरे को डंपिंग साइट (कूड़ा निस्तारण केंद्र) तक ले जाने में परेशानी आती है।
वार्डों में हाल यह है कि लोग घरों का कचरा कूड़ेदानों में डालने के बजाये रास्तों और नालियों पर ही फेंक देते हैं। इससे सफाई कर्मचारियों को कचरा एकत्रित कर कूड़ेदान तक पहुंचाने में समय बीत जाता है। पहले कुछ वार्डों में घरों से कचरा एकत्रित करने की योजना शुरू हुई, मगर लोगों ने पैसे ही नहीं दिए। इस कारण कुछ वार्डों में योजना को बंद करना पड़ा। मौजूदा समय में कुछ ही वार्डों में यह योजना चल रही है। अधिकांश वार्डों में आधा किलोमीटर दूर कूड़ेदान रखे गए हैं। इस कारण भी कचरा सीधा गलियों और नालियों में जाता है।
होटलों, रेस्टोरेंट और सब्जी मंडियों से आने वाले कचरा से दिक्कतें और बढ़ रही हैं। नगर निगम ने कंपोस्ट मशीनें लगाने केनिर्देश दिए थे। नगर निगम के अनुसार एक घंटे के बाद कूड़ेदानों में कामर्शियल कचरा फेंका जाता है। इससे भी गंदगी काफी बढ़ जाती है।
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एमसी के पास वाहन कम
नगर निगम के पास कचरा उठाने के लिए महज 96 वाहन हैं। जबकि मौजूदा समय में जरूरत 300 वाहनों की है। इसमें जेसीबी, टिप्पर, ट्रक, आटो शामिल हैं। वाहन कम होने के कारण कचरा कूड़ा कलेक्शन केंद्रों के बाहर ही बिखरा रहता है। कचरा निस्तारण केंद्र तक समय पर नहीं पहुंच पाता।
स्वीकृत पद 2500, पर तैनात सिर्फ 1800 सफाई कर्मी
नगर निगम के पास सफाई कर्मचारियों के 2500 पद स्वीकृत है। इनमें नियमित और अस्थाई कर्मचारियों के 1800 पद ही भरे गए हैं। वार्र्डों में जरूरत से कम संख्या में कर्मचारी सफाई के लिए भेजे जाते हैैं।
कहां से कितना कचरा आजा है
गलियों की सफाई से - 50 मीट्रिक टन
होटल-रेस्टोरेंट से - 50 मीट्रिक टन
बाजारों से - 50 मीट्रिक टन
व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से - 20 मीट्रिक टन
घरों से - 130 मीट्रिक टन
अन्य से - 300 मीट्रिक टन
कुल - 600 मीट्रिक टन
वार्डों से कचरे को हर रोज ठिकाने लगाया जाता है। सफाई कर्मचारियों के पदों को भरने के लिए औपचारिकताएं पूरी की जा रही है। वाहनों की संख्या बढ़ाई जा रही है। रूटीन से कूड़ा कचरा निस्तारण केंद्र में फेंका जा रहा है।
- प्रदीप कुमार, संयुक्त आयुक्त, नगर निगम
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वार्डों में हाल यह है कि लोग घरों का कचरा कूड़ेदानों में डालने के बजाये रास्तों और नालियों पर ही फेंक देते हैं। इससे सफाई कर्मचारियों को कचरा एकत्रित कर कूड़ेदान तक पहुंचाने में समय बीत जाता है। पहले कुछ वार्डों में घरों से कचरा एकत्रित करने की योजना शुरू हुई, मगर लोगों ने पैसे ही नहीं दिए। इस कारण कुछ वार्डों में योजना को बंद करना पड़ा। मौजूदा समय में कुछ ही वार्डों में यह योजना चल रही है। अधिकांश वार्डों में आधा किलोमीटर दूर कूड़ेदान रखे गए हैं। इस कारण भी कचरा सीधा गलियों और नालियों में जाता है।
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होटलों, रेस्टोरेंट और सब्जी मंडियों से आने वाले कचरा से दिक्कतें और बढ़ रही हैं। नगर निगम ने कंपोस्ट मशीनें लगाने केनिर्देश दिए थे। नगर निगम के अनुसार एक घंटे के बाद कूड़ेदानों में कामर्शियल कचरा फेंका जाता है। इससे भी गंदगी काफी बढ़ जाती है।
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एमसी के पास वाहन कम
नगर निगम के पास कचरा उठाने के लिए महज 96 वाहन हैं। जबकि मौजूदा समय में जरूरत 300 वाहनों की है। इसमें जेसीबी, टिप्पर, ट्रक, आटो शामिल हैं। वाहन कम होने के कारण कचरा कूड़ा कलेक्शन केंद्रों के बाहर ही बिखरा रहता है। कचरा निस्तारण केंद्र तक समय पर नहीं पहुंच पाता।
स्वीकृत पद 2500, पर तैनात सिर्फ 1800 सफाई कर्मी
नगर निगम के पास सफाई कर्मचारियों के 2500 पद स्वीकृत है। इनमें नियमित और अस्थाई कर्मचारियों के 1800 पद ही भरे गए हैं। वार्र्डों में जरूरत से कम संख्या में कर्मचारी सफाई के लिए भेजे जाते हैैं।
कहां से कितना कचरा आजा है
गलियों की सफाई से - 50 मीट्रिक टन
होटल-रेस्टोरेंट से - 50 मीट्रिक टन
बाजारों से - 50 मीट्रिक टन
व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से - 20 मीट्रिक टन
घरों से - 130 मीट्रिक टन
अन्य से - 300 मीट्रिक टन
कुल - 600 मीट्रिक टन
वार्डों से कचरे को हर रोज ठिकाने लगाया जाता है। सफाई कर्मचारियों के पदों को भरने के लिए औपचारिकताएं पूरी की जा रही है। वाहनों की संख्या बढ़ाई जा रही है। रूटीन से कूड़ा कचरा निस्तारण केंद्र में फेंका जा रहा है।
- प्रदीप कुमार, संयुक्त आयुक्त, नगर निगम