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डेरा संतपुरा नंगाली साहब में धूमधाम से मनाया गया बैसाखी का त्योहार
Updated Sun, 15 Apr 2018 01:36 AM IST
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पुंछ। शनिवार को सदियों से चली आ रही परंपरा को निभाते हुए जिला मुख्यालय से पांच किलोमीटर दूर राज्य के सबसे बड़े सिख धाम गुरुद्वारा डेरा संतपुरा नंगाली साहब में खालसा पंथ सृजन दिवस एवं बैसाखी का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। गुरुद्वारे में धार्मिक कार्यक्रम के अलावा प्रांगण में मेले एवं लंगर का भी आयोजन किया गया। इसमें राज्य के अलावा पंजाब, हरियाणा और दिल्ली से आए सभी समुदायों के हजारों लोगों ने भाग लिया।
डेरे के वर्तमान महंत संत भाई मंजीत सिंह की अगुवाई में देश में एकता, भाईचारे एवं शांति के लिए सामूहिक अरदास भी की गई। शनिवार को डेरा संतपुरा नंगाली साहब में तड़के ही खालसा सृजन दिवस और बैसाखी की धूम दिखाई देने लगी थी। वहां सर्वप्रथम सुबह 4बजे गुरुद्वारा के दोरंगली नदी किनारे स्थित देहरी साहब में रखी डेरे के पूर्व मंहत संत भाई मंगल सिंह जी की अस्थियों के श्रद्धालुओं को दर्शन कराए जाने लगे। इसके बाद सुबह आठ बजे गुरुद्वारा में पिछले तीन दिनों से चल रहे गुरु ग्रंथ साहब के सामूहिक अखंड पाठ का भोग डाला गया। डेरे के मंहत मंजीत सिंह की अगुवाई में गुरुद्वारे में धार्मिक प्रवचन एवं कीर्तन दरबार सजाया गया। इसमें रागी जत्थों और सिख विद्वानों ने बैसाखी और खालसा पंथ सृजन पर अपने विचार रखे। डेरे के प्रांगण में मेला भी लगाया गया, जहां लोगों ने खरीदारी की। इस मौके पर एमएलसी प्रदीप शर्मा, अतिरिक्त जिला विकास आयुक्त पुंछ बिशारत हुसैन, एसएसपी राजीव पांडे, पुंछ ब्रिगेड के कमांडर ब्रिगेडियर एएस पिंडारकर आदि ने गुरुद्वारा में पहुंच कर माथा टेका और संगत को संबोधित किया। नंगाली साहब में भी लंगर का आयोजन किया गया। गौरतलब है कि दशमेश गुरु गोबिंद सिंह द्वारा खालसा पंथ का सृजन करने के बाद जब देश भर में सिख का प्रचार करने के लिए अपने अनुयाइयों को भेजा था, तो उस समय संत भाई फेरू सिंह जी ने पहाड़ी देश में प्रचार का बीड़ा उठाते हुए पीओके स्थित रावलाकोट और उसके बाद पुंछ के नंगाली गांव मेें डेरे की स्थापना की थी। तब से आज तक यहां बैसाखी पर धार्मिक कार्यक्रम एवं मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें सभी समुदायों के लोेग भाग लेते हैं।
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डेरे के वर्तमान महंत संत भाई मंजीत सिंह की अगुवाई में देश में एकता, भाईचारे एवं शांति के लिए सामूहिक अरदास भी की गई। शनिवार को डेरा संतपुरा नंगाली साहब में तड़के ही खालसा सृजन दिवस और बैसाखी की धूम दिखाई देने लगी थी। वहां सर्वप्रथम सुबह 4बजे गुरुद्वारा के दोरंगली नदी किनारे स्थित देहरी साहब में रखी डेरे के पूर्व मंहत संत भाई मंगल सिंह जी की अस्थियों के श्रद्धालुओं को दर्शन कराए जाने लगे। इसके बाद सुबह आठ बजे गुरुद्वारा में पिछले तीन दिनों से चल रहे गुरु ग्रंथ साहब के सामूहिक अखंड पाठ का भोग डाला गया। डेरे के मंहत मंजीत सिंह की अगुवाई में गुरुद्वारे में धार्मिक प्रवचन एवं कीर्तन दरबार सजाया गया। इसमें रागी जत्थों और सिख विद्वानों ने बैसाखी और खालसा पंथ सृजन पर अपने विचार रखे। डेरे के प्रांगण में मेला भी लगाया गया, जहां लोगों ने खरीदारी की। इस मौके पर एमएलसी प्रदीप शर्मा, अतिरिक्त जिला विकास आयुक्त पुंछ बिशारत हुसैन, एसएसपी राजीव पांडे, पुंछ ब्रिगेड के कमांडर ब्रिगेडियर एएस पिंडारकर आदि ने गुरुद्वारा में पहुंच कर माथा टेका और संगत को संबोधित किया। नंगाली साहब में भी लंगर का आयोजन किया गया। गौरतलब है कि दशमेश गुरु गोबिंद सिंह द्वारा खालसा पंथ का सृजन करने के बाद जब देश भर में सिख का प्रचार करने के लिए अपने अनुयाइयों को भेजा था, तो उस समय संत भाई फेरू सिंह जी ने पहाड़ी देश में प्रचार का बीड़ा उठाते हुए पीओके स्थित रावलाकोट और उसके बाद पुंछ के नंगाली गांव मेें डेरे की स्थापना की थी। तब से आज तक यहां बैसाखी पर धार्मिक कार्यक्रम एवं मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें सभी समुदायों के लोेग भाग लेते हैं।
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