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14 वरिष्ठ अफसरों के हक में आया कोर्ट का फैसला

Sat, 20 Jun 2015 01:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू Updated Sat, 20 Jun 2015 01:18 AM IST
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14 KAS now in cadder

रियासत के 14 वरिष्ठ केएएस अफसरों को आईएएस कैडर में शामिल करने की प्रक्रिया में शामिल करने की हाईकोर्ट ने अनुमति दे दी। हाईकोर्ट के जस्टिस हसनैन मसूदी और जस्टिस जनक राज कोतवाल ने जीएडी द्वारा 24 जून 2011 को जारी वरिष्ठता सूची के आधार पर शीर्ष 14 अफसरों को आईएएस बनाने पर सहमति जताई।

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सरकारी की ओर से जारी एक एलपीए पर अदालत ने उक्त आदेश पारित किया, जिसमें कहा गया कि एक जनवरी 2004 से एक दिसंबर 2008 के दौरान जेएंडके प्रशासनिक सेवा में टाइम स्केल में नियुक्त अफसरों की वरिष्ठता सूची पिछले चार साल से परस्पर विवाद के कारण रुकी है। वर्ष 2011 में अलग-अलग समय पर दायर विभिन्न याचिकाओं से विवाद बढ़ा।
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आठ नवंबर 2013 को सिंगल जज ने तमाम याचिकाओं को समाप्त कर दिया। कोर्ट के निर्णय पर स्टेट और कुछ याचिकाकर्ताओं व प्रतिवादियों की ओर से रिट कोर्ट में एलपीए दायर की गई। इन पर फैसला एक साल से लंबित है। अपील पर अंतिम सुनवाई के लिए तीन जून 2014 की तिथि मुकर्रर की गई थी। खंडपीठ ने जांच में पाया कि अपीलों पर सुनवाई में देरी से रियासत की प्रशासनिक मशीनरी की क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ा है।
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इसमें सरकार की भी विफलता है, जिन्होेंने एक जनवरी 2013 से 31 दिसंबर 2013 तक केएएस से आईएएस पर भरने के आठ रिक्त पदों को भरने का प्रयास नहीं किया। 19 मई 2015 को व्यक्तिगत, जन शिकायत और पेंशन मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी ने मुख्य सचिव को पत्र लिख इस मामले में आवश्यक कदम उठाने को कहा, ताकि पात्र केएएस अफसरों को आईएएस कैडर में शामिल किया जा सके।

सरकार को एक पैनल जमा करना था, जो उसने नहीं किया। पैनल में शामिल अफसरों का मूल्यांकन उनके वार्षिक प्रदर्शन रिपोर्ट (एपीआर) के आधार पर किया जाना था। सरकार को इस मामले में 24 अफसरों का पैनल बनाना था। उनके आधार पर आठ का चयन होना था। अदालत ने पाया कि सूची के आठ वरिष्ठ अफसरों पर कोई विवाद ही नहीं है। वर्तमान लिटिगेशन में वह पार्टी भी नहीं हैं।

लेकिन अन्य अफसरों के कारण उन्हें नुकसान हो रहा है। जबकि उनके 14 जूनियर अफसर विवादों में फंसे हैं। एलपीए के रूप में दायर आवेदन में वरिष्ठता सूची को उपयोग करने की अनुमति मांगी गई। खंडपीठ ने 14 अफसरों की सूची केंद्रीय मंत्रालय को भेजने को कहा, ताकि 2013 से रिक्त आठ पदों को भरा जा सके।


कोर्ट ने सुझाव दिया कि विवादोें के कारण 14 से ज्यादा अफसरों को अनुमति नहीं दी जा सकती, लेकिन विवाद को हल करने के लिए सभी एलपीए पर एकबार विचार किया जाए। खासकर दस शीर्ष अफसर, जिन पर कोई विवाद नहीं है, उन्हें इस सूची में शामिल करने में कोई आपत्ति नहीं है। जेएनएफ

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