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खैर घोटाले में कई फै क्ट्रियां निशाने पर
Updated Mon, 23 Apr 2018 01:16 AM IST
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जम्मू। खैर की लकड़ी की तस्करी को लेकर जम्मू, सांबा और कठुआ की कई फैक्ट्रियां निशाने पर हैं। वन विभाग के चीफ कंजरवेटर और पुलिस ने तीन जिलों से खैर की लकड़ी का उपयोग करने वाली फैक्ट्रियों की इंडस्ट्री विभाग से रिपोर्ट मांगी है।
आईजीपी जम्मू डॉ. एसडी सिंह के अनुसार इस मामले में दो कमेटियों का गठन किया गया है। वन विभाग की टीम और अधिकारियों के आग्रह पर ही टीम कार्रवाई करेगी। पुलिस पूरी तरह से सहयोग कर रही है। सांबा और कठुआ में ही सबसे अधिक खैर होता है।
उधर, सूत्रों के अनुसार मढ़ क्षेत्र में कत्था तैयार करने की दो निर्मित फैक्ट्रियों के मालिकों से भी पूछताछ की गई है। इन मालिकों ने बताया कि उनकी फैक्ट्री अभी तैयार होनी है। जमीन की केवल चारदीवारी की है। खैर का उपयोग कत्था और दवाइयां तैयार करने के लिए किया जाता है। खैर को अवैध तरीके से काटा जा रहा है। बिलावर और जसरोटा बेल्ट में इसके पेड़ अधिक हैं। इसी क्षेत्र से खैर की तस्करी कर मोटे दामों पर इसे बेचा जाता है। मोटे दामों पर इसे बेचा जाता है। मामला सांबा से खुला जब किसानों ने कहा कि खैर की लकड़ी के दाम उन्हें कम दिए जा रहे हैं और उसे दोगुने रेट पर बेचा जा रहा है। आईजी के अनुसार रविवार फिलहाल कोई छापा मारा नहीं गया है और पुलिस लगातार वन विभाग के संपर्क में है।
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आईजीपी जम्मू डॉ. एसडी सिंह के अनुसार इस मामले में दो कमेटियों का गठन किया गया है। वन विभाग की टीम और अधिकारियों के आग्रह पर ही टीम कार्रवाई करेगी। पुलिस पूरी तरह से सहयोग कर रही है। सांबा और कठुआ में ही सबसे अधिक खैर होता है।
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उधर, सूत्रों के अनुसार मढ़ क्षेत्र में कत्था तैयार करने की दो निर्मित फैक्ट्रियों के मालिकों से भी पूछताछ की गई है। इन मालिकों ने बताया कि उनकी फैक्ट्री अभी तैयार होनी है। जमीन की केवल चारदीवारी की है। खैर का उपयोग कत्था और दवाइयां तैयार करने के लिए किया जाता है। खैर को अवैध तरीके से काटा जा रहा है। बिलावर और जसरोटा बेल्ट में इसके पेड़ अधिक हैं। इसी क्षेत्र से खैर की तस्करी कर मोटे दामों पर इसे बेचा जाता है। मोटे दामों पर इसे बेचा जाता है। मामला सांबा से खुला जब किसानों ने कहा कि खैर की लकड़ी के दाम उन्हें कम दिए जा रहे हैं और उसे दोगुने रेट पर बेचा जा रहा है। आईजी के अनुसार रविवार फिलहाल कोई छापा मारा नहीं गया है और पुलिस लगातार वन विभाग के संपर्क में है।
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