अरनिया ब्लाक के तेरह गांवों में बनने हैं 13 बंकर
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पाकिस्तानी गोलाबारी से बचने के लिए अरनिया ब्लाक के सीमावर्ती गांवों में बनाए जाने वाले सामूहिक बंकरों से ग्रामीण खफा हैं। ग्रामीणों ने केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
सीमावर्ती ग्रामीण पाकिस्तानी गोलाबारी से बचने के लिए लंबे समय से सुरक्षित स्थानों पर पांच-पांच मरले के प्लाट की मांग कर रहे हैं। उनकी यह आवाज केंद्र सरकार तक पहुंची थी।
लेकिन केंद्र सरकार ने सुरक्षित स्थानों पर बंकर दिए जाने के बजाय अरनिया ब्लाक में गोलाबारी से प्रभावित सिर्फ तेरह गांवों में सामूहिक बंकर बनाने का आदेश दे दिया। कुछ पंचायतों में दो तो कुछ में सिर्फ एक ही सामूहिक बंकर बनाने का काम होना है। कुछ गांवों में बंकर बनाने का काम शुरू भी कर दिया गया है।
खंड विकास अधिकारी अरनिया चमन लाल गांधी के अनुसार पाकिस्तानी गोलाबारी से प्रभावित गांवों के लोगों की सुरक्षा के लिए 13 सामूहिक बंकर बनाकर दिए जाने हैं। चंगिया, चानना, जव्वोआल, पिंडी चारका, पिंडी कैंप, कोटली काजिया, करेयाल खुर्द और कठार समेत 13 गांवों में प्रत्येक में एक-एक बंकर बनाया जाना है।
इनमें से जव्वोआल और चंगिया में बंकर बनाने का काम शुरू भी हो चुका है। पांच लाख प्रति बंकर की लागत से बनने वाले समूह बंकरों की गहराई 29 फीट होगी। तैयार होने के बाद इनमें 28 गुणित 20 फीट की जगह मिलेगी।
बंकर को दो हिस्सों में अंदर ही बांटा जाएगा
महिला और पुरुष के लिए प्रत्येक बंकर को दो हिस्सों में अंदर ही बांटा जाएगा। बंकर के अंदर ही बिजली और पानी की सुविधा मुहैया कराने का प्रावधान रखा गया है।
सीमावर्ती ग्रामीण रामलाल, पूर्ण चंद, अतर सिंह, सरपंच डाक्टर रघुवीर सिंह और सरपंच जगदीश राज आदि का कहना है कि बेहतर होता कि 50 फीसदी का भुगतान कर सरकार हर घर में बंकर बनाने का प्रावधान करती।
उन्होंने यह भी बताया कि जो सामूहिक बंकर फिलहाल बनाए जा रहे हैं, वह सीमा की ओर गांव के अंतिम छोर पर हैं। गोलाबारी होने के दौरान बंकर तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को उल्टा पाकिस्तान की ओर भागना होगा। यह मौत के मुंह की ओर जाने जैसा होगा।
समूह बंकर मामले में नेकां विधायक डाक्टर कमल अरोड़ा का कहना है कि केंद्र सरकार सीमावर्ती ग्रामीणों को बेवकूफ बना रही है। सुरक्षित स्थानों पर पांच-पांच मरले के प्लाट की मांग जारी रहेगी।
एक गांव में सिर्फ एक ही समूह बंकर बनाकर देना काफी नहीं होगा। गोलाबारी के दौरान पूरे गांव के लोग उस बंकर तक कैसे भागकर पहुंच सकेंगे।