{"_id":"5b806e9642c792465e1e9182","slug":"121535143574-jammu-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मामूली नोक झोक, सोशल साइट पर चैटिंग बना रहा घरेलू हिंसा का कारण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मामूली नोक झोक, सोशल साइट पर चैटिंग बना रहा घरेलू हिंसा का कारण
Updated Sat, 25 Aug 2018 02:16 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
जम्मू। शहर में महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। महिला पुलिस थाना गांधीनगर में प्रति दिन 10 से 15 घरेलू हिंसा के मामले आ रहे है। वहीं जुलाई माह 60 से 70 घरेलू हिंसा के मामले लेकर महिलाएं पुलिस थाने पहुंचीं। इनमें अधिकांश मामले मामूली घरेलू हिंसा, सोशल साइट के इस्तेमाल व चैटिंग और आपसी असहमति के होते हैं।
गांधीनगर महिला पुलिस थाना में घरेलू हिंसा के मामले सबसे ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों से आ रहे हैं। इसमें आरएस पुरा और अन्य बार्डर इलाके के हैं। इन इलाकाें की महिलाएं अपनी शिकायत लेकर थाने आ रही हैं। थाना में जुलाई माह में अधिकांश मामले, घर में मामूली नोक झोंक, सोशल साइट पर चैटिंग के हैं। थाने में एसएचओ कीर्ति शर्मा ने बताया कि मामूली हिंसा के मामले में भी महिलाएं थाने पहुंच जाती हैं। इसमें से पति-पत्नी में नोकझाेंक, आपसी असहमति के केस होते हैं। ज्यादातर मामले को थाना में काउंसलिंग द्वारा निपटाया जाता है। महिला के पति को थाने बुलाकर समझाया जाता है। उन्होंने कहा कि मारपीट के संगीन मामले में मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर जांच प्रक्रिया शुरू की जाती है। जरूरत पड़ने पर एफआईआर दर्ज करने को कहा जाता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकाें की नव विवाहित महिलाओं में सोशल साइट को लेकर काफी विवाद हो रहे हैं।
प्रति दिन आते हैं मामले
महिला पुलिस थाना गांधीनगर में वर्ष 2016 में 1359 मामले दर्ज हुए। इसमें से 1239 केस का निपटान थाना में काउंसलिंग से करवाया गया। वहीं 2017 में 1073 मामले दर्ज हुए इसमें से 746 केस का निपटान किया गया जबकि 67 केस को कोर्ट में भेजा गया।
विज्ञापन
आपस में समझौता करना पहली प्राथमिकता
आने वाले केस को गंभीरता से देखा जाता है। अधिकांश मामले मामूली विवाद के कारण होते हैं। इसलिए पहली प्राथमिकता काउंसिलंग से सुलह कराना होता है। काउंसलिंग में परिवार, पति पत्नी को समझाबुझा कर मामले को खत्म किया जाता है।
कीर्ति शर्मा, एसएचओ, गांधीनगर महिला थाना
गांधीनगर महिला पुलिस थाना में घरेलू हिंसा के मामले सबसे ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों से आ रहे हैं। इसमें आरएस पुरा और अन्य बार्डर इलाके के हैं। इन इलाकाें की महिलाएं अपनी शिकायत लेकर थाने आ रही हैं। थाना में जुलाई माह में अधिकांश मामले, घर में मामूली नोक झोंक, सोशल साइट पर चैटिंग के हैं। थाने में एसएचओ कीर्ति शर्मा ने बताया कि मामूली हिंसा के मामले में भी महिलाएं थाने पहुंच जाती हैं। इसमें से पति-पत्नी में नोकझाेंक, आपसी असहमति के केस होते हैं। ज्यादातर मामले को थाना में काउंसलिंग द्वारा निपटाया जाता है। महिला के पति को थाने बुलाकर समझाया जाता है। उन्होंने कहा कि मारपीट के संगीन मामले में मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर जांच प्रक्रिया शुरू की जाती है। जरूरत पड़ने पर एफआईआर दर्ज करने को कहा जाता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकाें की नव विवाहित महिलाओं में सोशल साइट को लेकर काफी विवाद हो रहे हैं।
विज्ञापन
प्रति दिन आते हैं मामले
महिला पुलिस थाना गांधीनगर में वर्ष 2016 में 1359 मामले दर्ज हुए। इसमें से 1239 केस का निपटान थाना में काउंसलिंग से करवाया गया। वहीं 2017 में 1073 मामले दर्ज हुए इसमें से 746 केस का निपटान किया गया जबकि 67 केस को कोर्ट में भेजा गया।
विज्ञापन
आपस में समझौता करना पहली प्राथमिकता
आने वाले केस को गंभीरता से देखा जाता है। अधिकांश मामले मामूली विवाद के कारण होते हैं। इसलिए पहली प्राथमिकता काउंसिलंग से सुलह कराना होता है। काउंसलिंग में परिवार, पति पत्नी को समझाबुझा कर मामले को खत्म किया जाता है।
कीर्ति शर्मा, एसएचओ, गांधीनगर महिला थाना