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पालीथिन प्रतिबंध के दावे नहीं बन पा रहे हकीकत
Updated Sat, 03 Feb 2018 01:29 AM IST
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बसोहली। राज्य में पालीथिन पर प्रतिबंध के दावे हकीकत नहीं बन पा रहे हैं। जिला कठुआ की बसोहली तहसील में धड़ल्ले से पालीथिन की बिक्री हो रही है। कसबे की गलियों और नालियों में पालीथिन के ढेर आम तौर पर देखे जा सकते हैं। अक्सर मवेशी भी खाने की तलाश में पालीथिन को निगलकर बीमार होते हैं। यहां तक की कई बार उनकी जान पर भी बन आती है, लेकिन प्रशासन कुछ नहीं कर पा रहा है।
प्रतिबंध के सरकारी आदेश की परवाह न करते हुए बसोहली कसबे की कई बड़ी दुकानों में पॉलीथिन की बिक्री की जा रही है। इस पर रोक के लिए नगर परिषद द्वारा अभियान तो चलाया जाता है, लेकिन इसके बावजूद भी कसबे व ग्रामीण क्षेत्रों ने पालीथिन का प्रयोग रोकने में सफलता नहीं मिल पा रही है। बस स्टैंड बसोहली के साथ लगती किराना व सब्जी की दुकानों में पालीथिन का उपयोग खुलेआम चल रहा है। पंजाब से अटल सेतु से आने वाले वाहनों में सब्तिजों की खेप में छिपाकर पालीथिन लाया जा रहा है। अटल सेतु पर लगाए गए विभिन्न नाकों पर इन वाहनों की चेकिंग न होने के कारण भारी तादाद में पालीथिन बसोहली पहुंचता है। प्रशासन को इस मामले में सख्त कदम उठाने चाहिए।
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प्रतिबंध के सरकारी आदेश की परवाह न करते हुए बसोहली कसबे की कई बड़ी दुकानों में पॉलीथिन की बिक्री की जा रही है। इस पर रोक के लिए नगर परिषद द्वारा अभियान तो चलाया जाता है, लेकिन इसके बावजूद भी कसबे व ग्रामीण क्षेत्रों ने पालीथिन का प्रयोग रोकने में सफलता नहीं मिल पा रही है। बस स्टैंड बसोहली के साथ लगती किराना व सब्जी की दुकानों में पालीथिन का उपयोग खुलेआम चल रहा है। पंजाब से अटल सेतु से आने वाले वाहनों में सब्तिजों की खेप में छिपाकर पालीथिन लाया जा रहा है। अटल सेतु पर लगाए गए विभिन्न नाकों पर इन वाहनों की चेकिंग न होने के कारण भारी तादाद में पालीथिन बसोहली पहुंचता है। प्रशासन को इस मामले में सख्त कदम उठाने चाहिए।
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