{"_id":"5ca66451bdec2256d212b1c1","slug":"111554408529-jammu-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहरों की सफाई का काम तेज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नहरों की सफाई का काम तेज
विज्ञापन
सांबा। जिले की संपर्क नहरों की मरम्मत व सफाई का काम तेज हो गया है। अब किसानों को उम्मीद जगी है कि उन्हें अंतिम छोर तक सिंचाई के पानी की आपूर्ति मिल सकेगी। यहां के किसान नहर की सफाई न होने पर काफी चिंतित दिखाई दे रहे थे। उन्हें आशंका थी कि अगर सही समय पर नहर की सफाई कर पानी नहीं छोड़ा गया तो खेत की सिंचाई नहीं कर पाएंगे।
किसान पुरुख सिंह, जनकार सिंह, हंस राज, बलवीर आदि ने बताया कि करीब 35 वर्ष बाद नहरों की साफ सफाई का काम शुरू किया गया है। पहले संपर्क मार्ग के किनारे पर नहरों की सफाई की जाती थी बाकी के हिस्से में पेड़ पौधे लगे रहते थे, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए पानी ही नहीं उपलब्ध होता था। पानी रास्ते में ही बिखर कर रह जाता था। अब संपर्क नहरों की सफाई होने से किसान कुछ राहत महसूस कर रहे हैं। किसानों के अनुसार की कई वर्षों से नहरों का पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच रहा था जिस से हर वर्ष किसानों को परेशानी बनी रहती थी। इसका मुख्य कारण था कि नहरों की ढंग से सफाई ही नहीं की जाती थी। संपर्क नहरों में तो बडे़-बड़े पौधे लगे हुए थे, जिस कारण नहरों का पानी आगे पहुंचता ही नहीं रहा था।
नहर की सफाई में हो रही खानापूर्ति
बाड़ी ब्राह्मणा। नहरों की सफाई पूरे जम्मू में जोरों पर है। बैसाखी पर इनमें पानी छोड़ा जाना है। इसके लिए सिंचाई विभाग हर साल मई तक पूरी नहरों की सफाई करने में जुटा है ताकि किसानों को पानी मिल सके। हालांकि किसानों का कहना है कि देखा जाए तो बाड़ी ब्राह्मणा में हर साल की तरह इस साल भी सफाई के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है।
विज्ञापन
बाड़ी ब्राह्मणा के आसपास के गांव के किसानों का कहना है कि विभाग बैसाखी से कुछ दिन पहले इस काम को शुरू करता है, जिससे नहरों की सफाई पूरी तरह से नहीं हो पाती और न ही नहरों से निकलने वाली छोटी नहरों, सुओं की सफाई कराई जाती है। इससे लोगों के द्वारा फेंका गया कूड़ा करकट खेतों में चला आता है, जिससे खेत खराब हो रहा है। कई बार इसकी शिकायत की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। एक तरफ सरकार किसानों को अच्छी सुविधाएं देने की बात करती है दूसरी तरफ खेतों में कूड़ा करकट भेज जा रहा है जो खेतों की उर्वरकता को खत्म कर रहा है। हमारी सरकार से मांग है कि नहरों में कूड़ा न फेंकने के लिए कोई कानून बनाया जाय। ब्यूरो
पांच सौ हेक्टेयर उपजाऊ भूमि पर सूखे का रहेगा खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
अरनिया। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक क्षेत्र के करीब बीस गांवों के किसान चिंता में हैं। इन किसानों की करीब पांच सौ हेक्टेयर भूमि पर लगाई जाने वाली विश्व विख्यात बासमती फसल पर सूखे का खतरा मंडराना शुरू हो चुका है।
मौसम विभाग के अनुसार इस साल सामान्य से भी कम बारिश होने का अनुमान है, जिससे क्षेत्र के अला, काकू दे कोठे, रख, अरनिया, कदोयाल, चानना, चंगिया, रंग पुर त्रेवा, त्रेवा, कोटली काजियां व जब्बोयाल सहित करीब बीस गांवों के किसान खेतों में इस बार धान फसल की रोपाई करने से वंचित रह सकते हैं जिसका मुख्य कारण डी.17 नामक अति संवेदन शील नहर की सफाई का न होना माना जा रहा है। करीब तीन किलोमीटर लंबी यह नहर पाक रेंजरों के निशाने पर रहने से सिंचाई विभाग इसे साफ कर पाना काफी चुनौती व साहस भरा कार्य बन चुका है। हालांकि विभाग द्वारा करीब एक माह पहले ही इस नहर को साफ करने का कार्य शुरू कराया गया था, मात्र पांच सौ मीटर तक ही सफाई होने के बाद पाक रेंजरों ने लगाईं गई जेसीबी व श्रमिकों को वहां से वापस भेज कर कार्य को रुकवा दिया था। हालांकि विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस नहर की सफाई के लिए आईजी बीएसएफ से संपर्क साधा गया है जिससे मसला हल होने की उम्मीद है।
वहीं अगर फिर भी मसला हल नहीं हुआ तो बीस गांवों के यह सैकड़ों किसान पांच सौ हेक्टेयर में इस बार विश्व विख्यात बासमती का उत्पादन करने से वंचित रह जाएंगे।
बताते चलें कि डी-17 नामक नहर का यह भाग तारबंदी के उस पार है और बीस गांवों के किसान करीब पिछले पांच साल से हर बार धान की रोपाई के लिए बारिश पर ही निर्भर करते हैं जो इस बार धोखा दे सकती है।
विज्ञापन
किसान पुरुख सिंह, जनकार सिंह, हंस राज, बलवीर आदि ने बताया कि करीब 35 वर्ष बाद नहरों की साफ सफाई का काम शुरू किया गया है। पहले संपर्क मार्ग के किनारे पर नहरों की सफाई की जाती थी बाकी के हिस्से में पेड़ पौधे लगे रहते थे, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए पानी ही नहीं उपलब्ध होता था। पानी रास्ते में ही बिखर कर रह जाता था। अब संपर्क नहरों की सफाई होने से किसान कुछ राहत महसूस कर रहे हैं। किसानों के अनुसार की कई वर्षों से नहरों का पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच रहा था जिस से हर वर्ष किसानों को परेशानी बनी रहती थी। इसका मुख्य कारण था कि नहरों की ढंग से सफाई ही नहीं की जाती थी। संपर्क नहरों में तो बडे़-बड़े पौधे लगे हुए थे, जिस कारण नहरों का पानी आगे पहुंचता ही नहीं रहा था।
विज्ञापन
नहर की सफाई में हो रही खानापूर्ति
बाड़ी ब्राह्मणा। नहरों की सफाई पूरे जम्मू में जोरों पर है। बैसाखी पर इनमें पानी छोड़ा जाना है। इसके लिए सिंचाई विभाग हर साल मई तक पूरी नहरों की सफाई करने में जुटा है ताकि किसानों को पानी मिल सके। हालांकि किसानों का कहना है कि देखा जाए तो बाड़ी ब्राह्मणा में हर साल की तरह इस साल भी सफाई के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है।
विज्ञापन
बाड़ी ब्राह्मणा के आसपास के गांव के किसानों का कहना है कि विभाग बैसाखी से कुछ दिन पहले इस काम को शुरू करता है, जिससे नहरों की सफाई पूरी तरह से नहीं हो पाती और न ही नहरों से निकलने वाली छोटी नहरों, सुओं की सफाई कराई जाती है। इससे लोगों के द्वारा फेंका गया कूड़ा करकट खेतों में चला आता है, जिससे खेत खराब हो रहा है। कई बार इसकी शिकायत की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। एक तरफ सरकार किसानों को अच्छी सुविधाएं देने की बात करती है दूसरी तरफ खेतों में कूड़ा करकट भेज जा रहा है जो खेतों की उर्वरकता को खत्म कर रहा है। हमारी सरकार से मांग है कि नहरों में कूड़ा न फेंकने के लिए कोई कानून बनाया जाय। ब्यूरो
पांच सौ हेक्टेयर उपजाऊ भूमि पर सूखे का रहेगा खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
अरनिया। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक क्षेत्र के करीब बीस गांवों के किसान चिंता में हैं। इन किसानों की करीब पांच सौ हेक्टेयर भूमि पर लगाई जाने वाली विश्व विख्यात बासमती फसल पर सूखे का खतरा मंडराना शुरू हो चुका है।
मौसम विभाग के अनुसार इस साल सामान्य से भी कम बारिश होने का अनुमान है, जिससे क्षेत्र के अला, काकू दे कोठे, रख, अरनिया, कदोयाल, चानना, चंगिया, रंग पुर त्रेवा, त्रेवा, कोटली काजियां व जब्बोयाल सहित करीब बीस गांवों के किसान खेतों में इस बार धान फसल की रोपाई करने से वंचित रह सकते हैं जिसका मुख्य कारण डी.17 नामक अति संवेदन शील नहर की सफाई का न होना माना जा रहा है। करीब तीन किलोमीटर लंबी यह नहर पाक रेंजरों के निशाने पर रहने से सिंचाई विभाग इसे साफ कर पाना काफी चुनौती व साहस भरा कार्य बन चुका है। हालांकि विभाग द्वारा करीब एक माह पहले ही इस नहर को साफ करने का कार्य शुरू कराया गया था, मात्र पांच सौ मीटर तक ही सफाई होने के बाद पाक रेंजरों ने लगाईं गई जेसीबी व श्रमिकों को वहां से वापस भेज कर कार्य को रुकवा दिया था। हालांकि विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस नहर की सफाई के लिए आईजी बीएसएफ से संपर्क साधा गया है जिससे मसला हल होने की उम्मीद है।
वहीं अगर फिर भी मसला हल नहीं हुआ तो बीस गांवों के यह सैकड़ों किसान पांच सौ हेक्टेयर में इस बार विश्व विख्यात बासमती का उत्पादन करने से वंचित रह जाएंगे।
बताते चलें कि डी-17 नामक नहर का यह भाग तारबंदी के उस पार है और बीस गांवों के किसान करीब पिछले पांच साल से हर बार धान की रोपाई के लिए बारिश पर ही निर्भर करते हैं जो इस बार धोखा दे सकती है।