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उधमपुर में चक्काजाम ने ठिठुरते लोगों का निकाला पसीना
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उधमपुर में चक्काजाम के कारण पैदल जाते यात्री।
- फोटो : UDHAMPUR
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उधमपुर। 15 वर्ष पुराने यात्री वाहनों को चलने की अनुमति ने देने, वाहन पंजीकरण टैक्स नौ फीसदी किए जाने के फैसले के खिलाफ सभी वाहन चालकों ने ऑल ट्रांसपोर्ट यूनियन के बैनर तले चक्काजाम रखा। इसके चलते जिले की सड़कों पर दिनभर वाहनों के न चलने से जनजीवन प्रभावित रहा। छात्रों से लेकर कर्मचारी, श्रमिक और अन्य को गंतव्यों तक आने पहुंचने में मुकिश्ल उठानी पड़ी।
सुबह से ही सभी वाहन चालकों ने अपने वाहनों को खड़ा कर टाउन हाल के समीप स्थित मेटाडोर अड्डे पर धरना दिया। केंद्र सरकार और उपराज्यपाल जीएस मुर्मू के खिलाफ नारेबाजी करते हुए इस फैसले को वापस लिए जाने की मांग की। इसके बाद दोपहर को बारह बजे के करीब सभी ट्रांसपोर्टरों ने मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जुलूस भी निकाला। जो गोल मार्केट से होता हुआ सलाथिया चौक पहुंचा, जहां ट्रांसपोर्टरों ने धार रोड पर जाम लगा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और डा. जितेंद्र सिंह का पुतला फूंका। इसके बाद प्रदर्शनकारियों का जुलूस जिला विकास आयुक्त डा. पीयुष सिंगला को ज्ञापन सौंपने के लिए उनके कार्यालय में पहुंचा। ट्रांसपोर्ट यूनियन के जिला प्रधान दर्शन कोतवाल ने कहा कि सरकार ने 15 वर्ष पुराने सभी वाहनों को सड़कों से हटाए जाने का फैसला लिया है। इसके साथ ही वाहन पंजीकरण टैक्स को बढ़ाकर नौ प्रतिशत कर दिया गया है। जो सही नहीं है। अगर सड़कों से ऐसे सभी वाहनों को हटा दिया गया तो इस कारोबार से जुडे़ सैकड़ों युवा बेरोजगार हो जाएंगे। इसके लिए सरकार की ओर से कोई भी रोजगार पालिसी नहीं बनाई गई है। उन्होंने कहा कि सरकार बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने की बजाय उनसे रोजगार छीनने का काम कर रही है। ट्रांसपोर्टर और बेरोजगार युवा जैसे-तैसे पैसों का प्रबंध करके वाहन खरीदते हैं सरकार ने अब वाहन पंजीकरण टैक्स को भी बढ़ाकर नौ फीसदी कर दिया है जिससे टैक्स लगने के बाद वाहन काफी महंगा हो गया है। कहा कि जिले के बहुत से वाहन इस फैसले से बेकार हो जाएंगे जो प्रतिदिन दस से पचास किलोमीटर तक के रूट पर ही चलते हैं।
उन्होंने कहा के मोदी सरकार ने चुनावों से पहले गरीबों के अच्छे दिन लाने के झूठे प्रलोभन दिखाकर सत्ता में आने के बाद आज इस तरह के तुगलकी फैसले लेकर व गरीबों पर जजिया कर लगाकर गरीबों की लुटिया ही डूबो दी है। केंद्र सरकार के बाद उन्हें पीएमओ राज्यमंत्री डा. जितेंद्र सिंह पर उम्मीद थी कि वह गरीब लोगों के हक को लेकर आवाज उठाएंगे। उन्होंने भी सत्ता का सुख भोगने के लालच में इस मामले पर चुप्पी साध रखी है। अगर वे केंद्र सरकार के समक्ष इस मामले की जमीनी सच्चाई बयान करते तो उन्हें इस प्रकार की परेशानी न उठानी पड़ती। उन्होंने कहा कि आज उनके द्वारा इस मामले को लेकर एक दिवसीय चक्का जाम की गई है लेकिन अगर सरकार की ओर से इन फैसले को वापस नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में ट्रांसपोर्टर प्रदेश स्तर पर उग्र आंदोलन करेंगे।
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सुबह से ही सभी वाहन चालकों ने अपने वाहनों को खड़ा कर टाउन हाल के समीप स्थित मेटाडोर अड्डे पर धरना दिया। केंद्र सरकार और उपराज्यपाल जीएस मुर्मू के खिलाफ नारेबाजी करते हुए इस फैसले को वापस लिए जाने की मांग की। इसके बाद दोपहर को बारह बजे के करीब सभी ट्रांसपोर्टरों ने मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जुलूस भी निकाला। जो गोल मार्केट से होता हुआ सलाथिया चौक पहुंचा, जहां ट्रांसपोर्टरों ने धार रोड पर जाम लगा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और डा. जितेंद्र सिंह का पुतला फूंका। इसके बाद प्रदर्शनकारियों का जुलूस जिला विकास आयुक्त डा. पीयुष सिंगला को ज्ञापन सौंपने के लिए उनके कार्यालय में पहुंचा। ट्रांसपोर्ट यूनियन के जिला प्रधान दर्शन कोतवाल ने कहा कि सरकार ने 15 वर्ष पुराने सभी वाहनों को सड़कों से हटाए जाने का फैसला लिया है। इसके साथ ही वाहन पंजीकरण टैक्स को बढ़ाकर नौ प्रतिशत कर दिया गया है। जो सही नहीं है। अगर सड़कों से ऐसे सभी वाहनों को हटा दिया गया तो इस कारोबार से जुडे़ सैकड़ों युवा बेरोजगार हो जाएंगे। इसके लिए सरकार की ओर से कोई भी रोजगार पालिसी नहीं बनाई गई है। उन्होंने कहा कि सरकार बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने की बजाय उनसे रोजगार छीनने का काम कर रही है। ट्रांसपोर्टर और बेरोजगार युवा जैसे-तैसे पैसों का प्रबंध करके वाहन खरीदते हैं सरकार ने अब वाहन पंजीकरण टैक्स को भी बढ़ाकर नौ फीसदी कर दिया है जिससे टैक्स लगने के बाद वाहन काफी महंगा हो गया है। कहा कि जिले के बहुत से वाहन इस फैसले से बेकार हो जाएंगे जो प्रतिदिन दस से पचास किलोमीटर तक के रूट पर ही चलते हैं।
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उन्होंने कहा के मोदी सरकार ने चुनावों से पहले गरीबों के अच्छे दिन लाने के झूठे प्रलोभन दिखाकर सत्ता में आने के बाद आज इस तरह के तुगलकी फैसले लेकर व गरीबों पर जजिया कर लगाकर गरीबों की लुटिया ही डूबो दी है। केंद्र सरकार के बाद उन्हें पीएमओ राज्यमंत्री डा. जितेंद्र सिंह पर उम्मीद थी कि वह गरीब लोगों के हक को लेकर आवाज उठाएंगे। उन्होंने भी सत्ता का सुख भोगने के लालच में इस मामले पर चुप्पी साध रखी है। अगर वे केंद्र सरकार के समक्ष इस मामले की जमीनी सच्चाई बयान करते तो उन्हें इस प्रकार की परेशानी न उठानी पड़ती। उन्होंने कहा कि आज उनके द्वारा इस मामले को लेकर एक दिवसीय चक्का जाम की गई है लेकिन अगर सरकार की ओर से इन फैसले को वापस नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में ट्रांसपोर्टर प्रदेश स्तर पर उग्र आंदोलन करेंगे।
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