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मां चंडी के दर पर 446 भक्तों ने नवाया शीश
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किश्तवाड़। मचैल माता के दरबार में बुधवार को 446 भक्तों ने माथा टेककर सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। अभी कुंडेल पुल तैयार न होने से यात्रा में हवाई मार्ग से अधिक श्रद्धालु माता चंडी के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। बुधवार को हेलिकॉप्टर से 100 से ज्यादा यात्री मां के दर्शन करने मचैल पहुंचे। हवाई सेवा के लिए दोनों तरफ का किराया, 5130 रुपये तय किया गया है। इससे मैचल पहुंचने में सात मिनट का समय लग रहा है।
उधर, पुल बनाने में नॉर्दर्न कमांड उधमपुर इंजीनियरिंग-52 के जवान जुटे हुए हैं। दो दिन में पुल तैयार हो जाएगा। मचैल निवासी दुकानदार श्रीकृष्ण का कहना है वह जम्मू और किश्तवाड़ से सामान लेकर आते हैं, लेकिन मचैल तक पहुंचाने में काफी खर्च आ रहा है। खच्चर वाले प्रति घोड़ा एक हजार रुपये लते हैं, जो हमें काफी महंगा पड़ेगा।
रोजाना 100 से अधिक श्रद्धालु हेलिकॉप्टर से माचा चंडी के दर्शन के लिए मचैल जा रहे हैं। कुछ यात्री मस्सू से कुकांद्रव गांव से पैदल यात्रा कर रहे हैं। 25 जुलाई से शुरू हुई यात्रा में अब तक एक हजार भक्तों ने माता रानी के दर्शन किए हैं। मचैल में लंगर की व्यवस्था भी की गई है। किश्तवाड़ शहर के पहले पहुंचने वालों को भी शालीमार में भोजन करने की लंगर की व्यवस्था है। लोग बेसब्री से पुल तैयार होने का इंतजार कर रहे हैं। पुल खुलते ही यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी होगी।
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उधर, पुल बनाने में नॉर्दर्न कमांड उधमपुर इंजीनियरिंग-52 के जवान जुटे हुए हैं। दो दिन में पुल तैयार हो जाएगा। मचैल निवासी दुकानदार श्रीकृष्ण का कहना है वह जम्मू और किश्तवाड़ से सामान लेकर आते हैं, लेकिन मचैल तक पहुंचाने में काफी खर्च आ रहा है। खच्चर वाले प्रति घोड़ा एक हजार रुपये लते हैं, जो हमें काफी महंगा पड़ेगा।
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रोजाना 100 से अधिक श्रद्धालु हेलिकॉप्टर से माचा चंडी के दर्शन के लिए मचैल जा रहे हैं। कुछ यात्री मस्सू से कुकांद्रव गांव से पैदल यात्रा कर रहे हैं। 25 जुलाई से शुरू हुई यात्रा में अब तक एक हजार भक्तों ने माता रानी के दर्शन किए हैं। मचैल में लंगर की व्यवस्था भी की गई है। किश्तवाड़ शहर के पहले पहुंचने वालों को भी शालीमार में भोजन करने की लंगर की व्यवस्था है। लोग बेसब्री से पुल तैयार होने का इंतजार कर रहे हैं। पुल खुलते ही यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी होगी।
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